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World Hepatitis Day 2022: एक्यूट हेपेटाइटिस से बचने के लिए जल्द डायग्नोसिस है जरूरी, एक्सपर्ट से जानें कब करानी चाहिए स्क्रीनिंग

वर्ल्ड हेपेटाइटिस दिवस (World Hepatitis Day 2022) के आयोजन के पीछे मुख्य उद्देश्य दुनियाभर में वायरल हेपेटाइटिस के बारे में लोगों को सही जानकारी पहुंचाना, हेपेटाइटिस के मामलों को बढ़ने से रोकने और वैश्विस स्तर पर हेपेटाइटिस से जुड़ी स्थिति में बदलाव लाना है।

Written By Sadhna Tiwari
Updated : July 27, 2022 7:01 AM IST

World Hepatitis Day 2022: हेपेटाइटिस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिन (World Hepatitis Day 2022) मनाया जाता है। यह दिन डॉ. बरुच ब्लूमबर्ग (birthday of Dr Baruch Blumberg) का जन्मदिन भी है जिन्होंने हेपेटाइटिस बी वायरस (hepatitis B virus) की खोज की थी। इसके साथ ही उन्होंने ही हेपेटाइटिस वायरस का पता लगाने वाले ब्लड टेस्ट (blood test for hepatitis B) को तैयार किया था और हेपेटाइटिस की वैक्सीन (vaccine for hepatitis B)  भी उन्होंने ही बनायी थी। वर्ल्ड हेपेटाइटिस दिवस के आयोजन के पीछे मुख्य उद्देश्य दुनियाभर में वायरल हेपेटाइटिस के बारे में लोगों को सही जानकारी पहुंचाना, हेपेटाइटिस के मामलों को बढ़ने से रोकने और वैश्विस स्तर पर हेपेटाइटिस से जुड़ी स्थिति में बदलाव लाना है।

क्या है हेपेटाइटिस और यह कितने प्रकार का होता है ? (types of the hepatitis virus)

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एक्सपर्ट्स के अनुसार हेपेटाइटिस लीवर में सूजन (inflammation of the liver) से जुड़ी हुई एक स्थिति है। डॉ. के. विनोदिनी (Dr.K. Vinodini Senior Consultant Microbiologist Neuberg Diagnostics) के अनुसार,  हेपेटाइटिस मुख्य रुप से 5 तरह के वायरस की वजह होने वाली बीमारी है। हेपेटाइटिस वायरस के प्रकार हैं-

  • हेपेटाइटिस ए (Hepatitis A)
  • हेपेटाइटिस बी (hepatitis virus B)
  • हेपेटाइटिस सी (hepatitis virus C)
  • हेपेटाइटिस डी (hepatitis virus D) और,
  • हेपेटाइटिस ई (hepatitis virus E)

वहीं, कुछ समय पहले ही हेपेटाइटिस जी ( Hepatitis G) का भी पाया गया है। हालांकि, यह भी पाया गया है कि हेपेटाइटिस जी का संबंध हेपेटाइटिस ए या ई के वायरस से बिल्कुल नहीं है। हेपेटाइटिस बी,सी और डी (Hepatitis D) संक्रमण का प्रसार इंफेक्टेड ब्लड (infected blood) और शरीर से निकलने वाले अन्य लिक्विड (body fluids) के जरिए होता है। वहीं इन वजहों से भी हेपेटाइटिस का प्रसार (High-risk practices for hepatitis) हो सकता है-

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  • बिना जांच किए किसी को ब्लड चढ़ाने
  • एक ही सुई की मदद से इंजेक्शन लगाने (sharing needles for injections)
  • टैटू बनवाने (tattooing)
  • कान छिदवाने (ear piercing)
  • हेल्थ वर्कर्स को सुइयों या अन्य औजारों से (needle stick injury in health workers) चोट लगने
  •  अनसेफ सेक्लुअल प्रैक्टिसेस के कारण

वहीं, हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस ई का प्रसार आमतौर पर दूषित पानी पीने या दूषित भोजन खाने (contaminated food and water) से होता है।

हेपेटाइटिस के लक्षण क्या हैं?

डॉ.विनोदिनी के अनुसार, अक्यूट या गम्भीर हेपेटाइटिस (acute hepatitis) में मरीज में इस तरह के लक्षण (symptoms of acute hepatitis) दिखायी दे सकते हैं-

  • बुखार (fever)
  • पेट में दर्द (pain abdomen)
  • भूख ना लगना या भूख मर जाना (loss of appetite)
  • अचनाक से वजन कम होना ( sudden weight loss)

वहीं, जब लीवर को बहुत अधिक नुकसान (liver is damaged)  पहुंचता है तो इस तरह के लक्षण दिखायी देते हैं-

  • यूरीन का कलर बदल जाता है (colour of urine)
  • आंखों का रंग पीला होना( eyes)
  • त्वचा का रंगत बदलना (skin becomes dark yellow)

हेपेटाइटिस के टेस्ट कब कराने चाहिए?

डॉ. विनोदिनी का कहना है कि भले ही हेपेटाइटिस बी और सी के मरीजों में इंफेक्शन के कई साल बाद (और कुछ में 10 साल के बाद) भी लक्षण नहीं दिखायी देते और लीवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचता ही रहता है। इसीलिए, नियमित स्क्रीनिंग कराना इन बीमारियों के जल्द निदान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। अर्ली डिटेक्शन की मदद से बीमारी को गम्भीर बनने से रोका जा सकता है और गम्भीरता के अनुसार बीमारी का इलाज भी जल्द से जल्द शुरू किया जा सकता है। इसके साथ ही लीवर सिरोसिस (Cirrhosis) और लीवर कैंसर (liver cancer) जैसी गम्भीर बीमारियों का रिस्क भी कम किया जा सकता है। इसीलिए कुछ लोगों को अपनी स्थिति के अनुसार जल्द स्क्रीनिंग करा लेनी चाहिए। जैसे-

  • प्रेगनेंट महिलाएं ( pregnant women)
  • HBsAg पॉजिटिव मांओं के नवजात बच्चे
  • रक्तदान करने वाले लोग
  • प्लाज़्मा डोनेट करने वाले लोग
  • अंगदान करने वाले लोग
  • एचआईवी पॉजिटिव (HIV positive) लोग
  • हेल्थ केयर सेक्टर में काम करने वाले लोग
  • ड्रग्स का सेवन करने वाले लोग

क्या हेपेटाइटिस पूरी तरह ठीक हो सकता है?

एक्सपर्ट के अनुसार, बीमारी का जल्द इलाज शुरू हो जाने से लीवर कैंसर ( liver cancer) या लीवर फेलियर (liver failure) जैसी स्थितियों से बचा जा सकता है। लेकिन, फिलहाल हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस ई के लिए किसी प्रकार का विशेष उपचार (treatment for Hepatitis A or E) उपलब्ध नहीं है। वही, ज्यादातर इंफेक्शन्स को कुछ सपोर्टिव ट्रीटमेंट्स की मदद से गम्भीर होने से रोका जा सकता है। हेपेटाइटिस बी और सी के इलाज के लिए कई प्रकार की एंटीवायरल दवाइयां उपलब्ध हैं। जहां एंटीवायरल दवाओं के साथ हेपेटाइटिस बी का इलाज काफी लम्बा चलता है वहीं, हेपेटाइटिस सी के अधिकांश मरीजों में यह बीमारी दवाइयों की मदद से पूरी तरह ठीक हो सकती है। (treatment of Hepatitis with antiviral medicines)

हेपेटाइटिस से बचाव के उपाय क्या हैं?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने सभी देशों से अपील की है कि वे साल 2030 तक अपने क्षेत्र से हेपेटाइटिस की बीमारी के खात्मे के लिए प्रयास करें। इसके साथ ही हेपेटाइटिस से बचाव के लिए (Prevention from Hepatitis) कुछ तरह के सुरक्षा उपाय और सावधानियां बरतने की भी सलाह दी गयी हैं, जैसे -

  • सभी गर्भवती महिलाओं का हेपेटाइटिस बी टेस्ट कराएं और जरूरत के अनुसार इलाज प्रदान किया जाए।
  • हेपेटाइटिस के खतरे के साथ पैदा हुए नवजात शिशुओं (Treatment of high-risk newborns in cases of hepatitis B ) को तुरंत इलाज मुहैया कराया जाए।
  • नवजात बच्चों को हेपेटाइटिस बी वैक्सीन (Hepatitis B vaccination for all newborns) की कम से कम 2 खुराकें उपलब्ध करायी जाएं और आवश्यकता के अनुसार उनका फॉलोअप किया जाए। ये वैक्सीन्स हेपेटाइटिस डी (hepatitis D infection) के खिलाफ भी बच्चे को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करेंगी।
  • एक वर्ष का होने के बाद बच्चे को हेपेटाइटिस ए की वैक्सीन (hepatitis A Vaccine) लगायी जाए।
  • किसी को भी खून चढ़ाने से पहले खून की जांच की जानी चाहिए।
  • हेल्थ केयर स्टाफ को भी विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए, जैसे इंजेक्शन देने से पहले नयी सीरींज का इस्तेमाल करें, इस्तेमाल के बाद सुई और बायोलॉजिकल वेस्ट को सही तरीके से डिस्पोज किया जाए।
  • साफ-सफाई का ध्यान रखें।
  • साफ पानी पीएं और भोजन को दूषित होने से बचाएं ताकि, आप साफ और स्वच्छ भोजन का सेवन कर सकें।
  • जिन लोगों को बार-बार खून चढ़ाने या इंजेक्शन लगाने की आवश्यकता पड़ती है उन्हें नियमित जांच करानी चाहिए। इसी तरह हेल्थ वर्कर्स को भी अपनी नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए।