भारत में इस उम्र के लोगों में बढ़ रहा है ल्यूकेमिया का खतरा, एक्सपर्ट से जानिए ब्लड कैंसर के कारण

World Blood Cancer Day 2025-भारत में ब्लड कैंसर स्वास्थ्य से जुड़ी एक बहुत बड़ी चुनौती है क्योंकि दुनियाभर में ब्लड कैंसर के मामलों में भारत तीसरे स्थान पर है। हर साल भारत में 70 से 80 हजार लोगों की मौत ब्लड कैंसर के कारण हो सकती है। भारत में ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और मल्टीपल मेलोमा के मामले अधिक देखे जाते हैं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 28, 2025 7:22 PM IST

भारत में बुजुर्गों की तेजी से बढ़ रही जनसंख्या में ल्यूकेमिया से जुड़ी एक खास स्थिति (pre-leukaemia condition) जिसे एमडीएस ( Myelodysplastic syndrome -MDS) कहा जाता है। यह एक प्रकार का ब्लड कैंसर (a type of blood cancer) है जिसमें बोन मैरो में असामान्य गति से सेल्स का निर्माण (  bone marrow produces abnormal blood cells) होता है। ये सेल्स अच्छी तरह मैच्योर नहीं हो पातीं और अधूरे विकास के कारण इनका शरीर में कोई खास उपयोग नहीं हो पाता। आमतौर पर एमडीएस के मरीजों में जो लक्षण (MDS show symptoms ) दिखायी देते हैं उनमें ये समस्याएं शामिल हैं-

  • एनिमिया (anemia)
  • बार-बार इंफेक्शन और बुखार होना ( frequent infections and fevers)
  • आसानी से चोट लगना (  easy bruising)
  • ब्लीडिंग या खून बहना (bleeding)

भारत में क्यों बढ़ रहे हैं MDS के मामले ?

ऑन्कोलोजिस्ट और हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. राधेश्याम नाइक  (Dr. Radheshyam Naik, Consultant, Medical Oncologist and Hematologist, Sammprada Multi-speciality Hospital, Bengaluru) कहते हैं कि, एमडीएस के साथ सबसे बड़ी समस्या ये है कि, एमडीएस के 20-30% मामलों में बीमारी तेजी से ल्यूकेमिया में बदल जाती है। इस स्थिति को एक्यूट मेलाइट ल्यूकेमिया (acute myeloid leukaemia) कहते हैं। इस स्थिति में व्हाइट ब्लड सेल्स (white blood cells) का विकास तेजी से होता है।

डॉ. नायक कहते हैं कि, “एमडीएस (MDS ) ब्लड डिसॉर्डर्स का एक ग्रुप है जिसमें डीएनए और ब्लड सेल्स में बदलाव आ जाते हैं। बुजुर्गों और 70 साल से अधिक उम्र के लोगों में इसका रिस्क अधिक होता है। जैसा कि देश में एक बड़ी तादाद में लोगों की उम्र तेजी से बढ़ रही है,देश में एमडीएस के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसी तरह स्मोकिंग करने की आदत के चलते लोगों में एमडीएस का खतरा भी बढ़ा है।”

कैंसर ट्रीटमेंट के बाद भी हो सकता है ब्लड कैंसर- Reoccurrence of cancer after treatment.

डॉ. नाइक कहते हैं कि,“ कैंसर के मरीज जिनका ट्रीटमेंट हो चुका हो और जो एक हेल्दी लाइफ जी रहे हैं उनमें ही कैंसर दोबारा होने का रिस्क तो होता ही है साथ ही एमडीएस और एएमएल जैसी स्थितियों का रिस्क भी अधिक होता है। इससे यह समझा जा सकता है कि कैंसर का कोई स्थायी इलाज ना हो। लेकिन, सही ट्रीटमेंच की मदद से बीमारी के बढ़ने की गति धीमी हो सकती है।”

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।