... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Yogita Yadav | Published : April 10, 2019 1:40 PM IST
गर्मी में बरती गई जरा सी लापरवाही शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम डिस्टर्ब कर देती है, इससे होने वाली परेशानियों से बचना है तो इन बातों का जरूर ध्यान रखें। © Shutterstock.
गर्मी बढ़ने के साथ ही गर्मी से जुड़ी तमाम बीमारियां भी बढ़ती जा रहीं हैं। इनमें सबसे ज्यादा खतरनाक है हीट स्ट्रोक। इसमें व्यक्ति के शरीर का तापमान इतना अधिक बढ़ जाता है कि उससे कई तरह की परेशानियां होने लगती हैं। अगर जरा सी भी लापरवाही की जाए तो इससे व्यक्ति की जान भी जा सकती है।
यह भी पढ़ें - जानिए इस मौसम में क्यों जरूरी है दही का सेवन
क्या है हीट स्ट्रोक
मनुष्य के शरीर का तापमान सामान्य अवस्था में 98.6 डिग्री फरेन्हाईट होना चाहिए। मनुष्य के शरीर की बनावट ऐसी होती है जिसमें अत्यधिक गर्मी या तापमान पसीने के रूप में बाहर निकलता रहता है जिससे शरीर का तापमान ज्यों का त्यों बना रहता है। परन्तु हीट स्ट्रोक की स्थिति में शरीर का प्राकृतिक कुलिंग सिस्टम सुचारू रूप से काम करना बंद कर देता है। अगर किसी व्यक्ति के शरीर का तापमान 100 डिग्री फॉरेनहाइट के ऊपर जाने लगे तो घरेलू उपचार से उसके तापमान को कम करना चाहिए लेकिन अगर उसका तापमान कम नहीं हो रहा हो और बढ़ता ही जा रहा हो तो उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
यह भी पढ़ें - मक्खन की जगह आहार में शामिल करें घी और तेल, होंगे ये फायदे
यह हो सकती है समस्या
गर्मी के कारण शरीर का तापमान अत्यधिक बढ़ जाने पर खतरनाक स्थिति उत्पन्न हो सकती है। बुखार दिमाग तक चढ़ने के कारण मस्तिष्क में गड़बड़ी उत्पन्न हो सकती है, जिससे व्यक्ति अनर्गल बातें करने लगता है। कई बार अंग भी ख़राब हो सकते हैं। अंगों में लकवा मार सकता है और समस्या नियंत्रण से बाहर होने पर मौत भी हो सकती है।
यह भी पढ़ें – बचना है गर्मी की समस्याओं से, तो सलाद को इस तरह करें डायट में शामिल
हीट स्ट्रोक के कारण
तेज गर्मी बढ़ने पर शरीर में होने वाला डिहाड्रेशन इसकी सबसे बड़ी वजह है।
थाइरायड में असंतुलन पैदा होना, शरीर में रक्त शर्करा में कमी आना (ऐसा मधुमेह के मरीजों में होता है)
शराब के सेवन से, उच्च रक्तचाप या अवसाद आदि के उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं की वजह से भी हीट स्ट्रोक हो सकता है।
यह भी पढ़ें – ओवरहाइड्रेशन : जानिए क्या है ये और कैसे करें इससे बचाव
हीट स्ट्रोक हो के लक्षण
गर्मी के दिनों में या तेज धूप में काम करने से यदि आपको चक्कर आने लगे, या उलटी - मितली जैसा लगे।
आपका रक्त चाप अचानक से कम होने लगे।
आपको तेज बुखार हो जाये तो।
शराब के सेवन से, उच्च रक्तचाप या अवसाद आदि के उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं की वजह से भी हीट स्ट्रोक हो सकता है। © Shutterstock.
हीट स्ट्रोक से बचने के उपाय
तेज धूप में निकलने से बचें। अगर तेज धूप में निकलना जरुरी हो तो निकलते वक़्त छाता लगा लें या टोपी पहन लें। संभव हो तो आंखों पर धूप से बचने वाला चश्मा भी लगा लें ।
हीट स्ट्रोक से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि डिहाइड्रेशन न होने पाए। अपने साथ पानी की बोतल रखें और बीच-बीच में ग्लूकोज युक्त अन्य तरल पदार्थ भी लेते रहें।
यह जरूरी नहीं है कि आप सिर्फ प्यास लगने पर ही पानी पिएं, बल्कि बीच-बीच में पानी पीते रहे। पानी न सिर्फ शरीर का तापमान नियंत्रित रखता है, बल्कि शरीर के भीतर से अन्य विषैले पदार्थ भी बाहर निकालता है।
जरूरी नहीं है कि हीटस्ट्रोक से ही पानी की कमी महसूस हो, बल्कि त्वचा का बेजान होना और बालों का झड़ना भी पानी की कमी के लक्षण हैं।
चाय-कॉफ़ी की बजाये आप फलों के रस, ठंडाई, शिकंजी आदि पियें।
कच्चे आम का रस मानव शरीर का तापमान कम करने में बहुत हीं प्रभावकारी माना जाता है। कच्चे आम का गुदा आपके शरीर में इलेक्ट्रोलाईट बहाल करने में बहुत हीं मददगार होता है।
इलेक्ट्रोलाईट नमक - पानी एवं कई खनिजो का मिश्रण होता है जो डिहाइड्रेशन की अवस्था में आपके शरीर में बहुत हीं कम हो जाता है।
शरीर में खनिजो एवं नमक पानी के कम होने से कमजोरी महसूस होती है। बदन, मांसपेशियों में दर्द एवं कमजोरी भी इसी के लक्षण हैं।
बहुत ज्यादा पसीना निकलने की वजह से, कम पानी पीने की वजह से, बहुत ज्यादा मूत्र विसर्जन करने की वजह से या बार-बार मल त्यागने के लिए जाने की वजह से आपके शरीर इलेक्ट्रोलाईट की कमी हो जाती है।
अगर इसकी लगातार पूर्ति न की जाए तो हीटस्ट्रोक के अलावा व्यक्ति की मृत्यु का जोखिम भी बढ़ जाता है।
कर सकते हैं ये घरेलू उपाय
साधारण पानी में थोडा नमक एवं शक्कर (चीनी) डालकर नीम्बू निचोड़ लें एवं उस मिश्रण को मरीज को पिलाते रहें। ऐसा करने से डिहाइड्रेशन से जल्दी ही छुटकारा मिलता है। नीम्बू का पानी शरीर की गर्मी को भी बाहर निकालता है और ठंडक पहुँचाता है।
छाछ यानि की मट्ठा हीट स्ट्रोक में बहुत हीं प्रभावकारी होता है। यह मरीज को बहुत हीं लाभ पहुंचता है एवं उसे ताकत भी देता। छाछ हीट स्ट्रोक के इलाज के लिए सबसे सफल प्राकृतिक घरेलू उपचारों में से एक है।