
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 20, 2024 4:13 PM IST
Heatwave side effects: देशभर में गर्मी का पारा चढ़ चुका है। देश के कुछ हिस्सों में लू चलने और हीट वेव का अलर्ट भी जारी कर दिया गया है। हीट वेव की वजह से लोगों को धूप और गर्मी के गम्भीर साइड-इफेक्ट्स का सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि गर्मियों में हीट स्ट्रोक के कारण डिहाइड्रेशन, चक्कर खाकर बेहोश होने और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
लेकिन, हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार बढ़ते तापमान की वजह से इन समस्याओं के साथ ऑर्गन डैमेज का खतरा (risk of organ damage) भी बढ़ सकता है। गर्मियों में शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान हो सकता है जिससे उनके खराब होने का खतरा भी बढ़ जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार बहुत अधिक गर्मी या हाई टेम्परेचर के सम्पर्क में आने से लोगों को मेमरी से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। इससे लंग्स, हार्ट और किडनी डैमेज हो सकती है।
जो लोग हीटस्ट्रोक की चपेट में आते हैं उनमें डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। शरीर में पानी की कमी के कारण किडनी फंक्शनिंग में समस्या आ सकती है। जैसा कि किडनी का मुख्य काम शरीर में जमा टॉक्सिंस को साफ करना है जो डिहाइड्रेशन के कारण मुश्किल हो सकता है। शरीर से ये गंदगी बाहर ना निकाल पाने के कारण किडनी डैमेज का खतरा बढ़ सकता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, बहुत अधिक गर्मी के कारण कॉग्निटिव हेल्थ (Cognitive health) बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। इससे लोगों को मतिभ्रम और मेमरी लॉस जैसी समस्याएं हो सकते हैं। कुछ स्टडीज के अनुसार, गर्मी में मेंटल हेल्थ से जुड़ी प्रॉब्लम्स बढ़ सकती हैं।
हीटस्ट्रोक के कारण हार्ट पर बहुत अधिक प्रेशर पड़ सकता है। इससे हार्ट को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। अगर आपका हार्ट हेल्थ शरीर के तापमान के साथ तालमेल नहीं बिठा नहीं पाता तो इससे हार्ट को नुकसान होता है। इससे शरीर में रक्त की सप्लाई भी प्रभावित होती है जिससे बहुत अधिक थकान जैसी समस्याएं महसूस हो सकती है।
Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।
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