
प्रिया मिश्रा
प्रिया को पिछले 4 सालों से हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर लिखने का अनुभव है। इन्हें हेल्थ और ... Read More
Heat Therapy vs Ice Therapy: अंदरुनी चोट लगने पर अक्सर हमें दर्द और सूजन की परेशानी हो सकती है। यदि दर्द काफी लंबे समय तक रहता है। कई बार दवाओं से इसका इलाज संबंध नहीं हो पाता है। ऐसे में डॉक्टर्स हमें सिंकाई करने की सलाह देते हैं। इसे लेकर कई लोग कंफ्यूज हो जाते हैं कि आखिर किस तरह की सिंकाई करें, ठंडी या गर्म? दोनों में से कौन सी सिंकाई सही होती है और जल्दी रिकवरी किस से होगी। अगर आपको भी इस तरह का कन्फ्यूजन रहता है, तो इस लेख में हम आपके इस कंफ्यूजन को दूर करेंगे। आइए जानते हैं चोट लगने पर दर्द और सूजन कम करने के लिए गर्म सिंकाई करें या ठंडी?
चोट लगने पर कई बार गर्म सिंकाई करने की सलाह दी जाती है, गर्म सिंकाई करने से जड़कन जैसी परेशानी जल्दी दूर हो सकती है। वहीं, यह जोड़ों में होने वाले दर्द को भी कम कर सकता है। इससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन काफी तेजी से हो सकता है। इसलिए यह दर्द को दूर करने में प्रभावी हो सकता है। अगर आपको किसी तरह का मोच, दर्द या फिर जोड़ों में दर्द है, तो आपके लिए गर्म सिंकाई बेहतर हो सकती है। इसके अलावा पीठ दर्द, गर्दन दर्द इत्यादि को कम करने के लिए आप गर्म सिंकाई की मदद ले सकते हैं।
चोट लगने पर अगर खून काफी तेजी से बह रहा है, तो इस स्थिति में ठंडी सिंकाई करने की सलाह दी जाती है। इससे सूजन और दर्द तुरंत कम हो सकता है। हालांकि, बर्फ को डायरेक्ट घाव पर लगाने से बचना चाहिए। अर्थराइटिस में होने वाले दर्द और सूजन को कम करने के लिए अक्सर डॉक्टर बर्फ से सिंकाई करने की सलाह देते हैं। वहीं, फिजिकल एक्टिविटी के कारण हुई दर्द और जकड़न को कम करने के लिए ठंडी सिंकाई की सलाह दी जाती है।
चोट लगने पर ठंडी और गर्म सिंकाई दोनों ही प्रभावी हो सकती है। हालांकि, अगर आपको काफी सूजन है, तो इस स्थिति में आपके लिए ठंडी सिंकाई सही है। वहीं, दर्द को कम करने के लिए आप गर्म सिंकाई कर सकते हैं। इसके अलावा कई बार ब्लड सर्कुलेशन कम होने पर गर्म सिंकाई की सलाह दी जाती है। वहीं, ब्लड के प्रवाह को कम करने के लिए ठंडी सिंकाई करने की सलाह दी जाती है। ऐसे में आपकी स्थिति कैसी है, इस बात पर निर्भर करता है कि चोट लगने पर गर्म सिंकाई करनी चाहिए या ठंडी।