
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 29, 2024 9:01 PM IST
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Heart Diseases In Family: हार्ट प्रॉब्लम्स अब बड़े-बुजुर्गों मे ही नहीं बल्कि कम उम्र के लोगों में भी बहुत कॉमन हो गयी हैं। बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की जान भी हार्ट अटैक (heart attacks) या सडेन कार्डियाक अरेस्ट (sudden cardiac arrest) की वजह से जा रही है जिनकी उम्र बहुत कम है। हृदय रोगों के बढ़ने का कारण है लोगों की अनहेल्दी लाइफस्टाइल, गलत डाइट, फिजिकली एक्टिव ना रहना, स्ट्रेस या हमेशा बैठे रहने या कसरत न करने की आदत। इसी तरह हार्ट अटैक का एक और बड़ा कारण है फैमिली हिस्ट्री या अनुवांशिकता।
कार्डियोलॉजी स्पेशलिस्ट डॉ. समीर पागड (Dr Sameer V Pagad, Senior consultant Interventional Cardiologist, Gleneagles Hospitals Parel) कहते हैं कि, ऐसे लोग जिनके परिवार में लोगों को हार्ट डिजिजेज,स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसी कंडीशन्स का इतिहास रहा है, उन लोगों में इन स्थितियों का खतरा दूसरों से अधिक रहता है। इसीलिए, इन लोगों को बहुत सावधान रहना चाहिए और अपनी हार्ट हेल्थ को ठीक रखने के लिए सही उपाय अपनाने चाहिए।
डॉ. समीर सलाह देते हैं कि हार्ट डिजिजेज का रिस्क कम करने के किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए। (Follow these essential measures for ensuring optimum heart health ) आइए पढ़ें हृदय रोगों से बचने में मददगार इन टिप्स और लाइफस्टाइल से जुड़ीं सावधानियों के बारे में
अगर किसी को इस बात की जानकारी है कि उनके परिवार में अन्य लोगों को हार्ट डिजिजेज रहीं हैं तो बेहतर होगा कि वे अपनी कार्डियाक स्क्रिनिंग (cardiac screening) शुरु करें। इसके लिए आप अपने डॉक्टर की सलाह लें और उसके अनुसार स्क्रीनिंग कराएं। फैमिली हिस्ट्री की अनदेखी करने से हार्ट डिजिजेज काफी गम्भीर हो सकती हैं। बता दें कि, हमारे देश में हार्ट डिजिज के कारण होनेवाली मृत्युदर काफी हाई है।
जो भी बीमारियां आपके परिवार में पहले से चली आ रही हैं उनके बारे में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करें। डॉ. समीर के अनुसार, कार्डियोमायोपैथी (cardiomyopathy (heart muscle disease) या हार्ट के मसल्स से जुड़ी बीमारियों, फैमिलिअल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (familial hypercholesterolemia) या हार्ट अरिदिमिया ( heart arrhythmias) जैसी जानलेवा कंडीशन्स ऐसी हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों को हो सकती हैं। इसीलिए, अपने डॉक्टर से बात करते समय ये सभी जानकारियां शेयर भी करें और इनके बारे में अधिक से अधिक जानकारी भी प्राप्त करें।
इसी तरह परिवार में अन्य बीमारियों और हेल्थ कंडीशन्स के बारे में भी पता करें। अपने माता-पिता और भाई-बहनों के अलावा नाना-नानी और दादा-दादी में स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल या बायपास सर्जरी के बारे में पूरी जानकारी आपके पास होगी तो आपके डॉक्टर के लिए भी आपकी मदद कर पाना आसान होगा।
बता दें कि, मोटापा, नींद की कमी और पौष्टिक डाइट की कमी जैसी चीजें हृदय रोगों का जोखिम बढ़ा सकती हैं। इसीलिए, इन सबके बारे में अगर आपके पास सटीक जानकारी होगी तो आपके हार्ट इवैल्युलेशन और कार्डियाक प्रॉब्लम्स से बचाव में काफी हद तक मदद हो सकती है।
आपका डॉक्टर आपको जो भी गाइडलाइंस देता है उनका पालन करें। स्क्रिनिंग के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी का पता लगने के बाद डॉक्टर हाइपरटेंशन या हाई कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिएदवाइयां या लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जो भी सलाहें देता है उनपर ध्यान दें और उन्हें फॉलो करेँ। पौष्टिक डाइट, रोजाना एक्सरसाइज करने और नींद पूरी करने जैसी टिप्स आपको दी जा सकती हैं।
वहीं, तनाव कम करने और रिलैक्स महसूस करने के लिए आपको योग और मेडिटेशन करने की सलाह दी जा सकती है। डॉक्टर द्वारा बतायीं गयीं इन सब बातों का ख्याल रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि, ये सभी उपाय आपके हार्ट को हेल्दी रखने में मदद कर सकती हैं।
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