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Written By: Anshumala | Published : November 25, 2019 6:34 PM IST
तनाव, डायबिटीज, मोटापा दिल को कर देते हैं कमजोर, हो सकती हैं कई समस्याएं। © Shutterstock.
आज लोगों में कम उम्र में ही दिल से संबंधित रोग की समस्याएं देखने को मिल रही हैं। कई वजहों से ऐसा होता है। लुधियाना स्थित सिबिया मेडिकल सेन्टर के निदेशक डॉ.एस एस सिबिया का कहना है कि भोजन में अधिक वसा, व्यायाम की कमी, तंबाकू का सेवन, बीपी, मधुमेह, मोटापा और अत्यधिक तनाव पर नियंत्रण न होने के कारण हृदय रोग (Heart Problem) होता है। कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड नामक वसा, यदि रक्त में अधिक वर्षों से हृदय की नलियों के अंदर जमा रहती हैं, तो काफी नुकसान पहुंच सकता है।
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हृदय रोगी इन ब्लॉकों के बारे में अनजान रहते हैं। जब तक कि यह 70-80 प्रतिशत चरण तक नहीं पहुंचता है, क्योंकि हृदय को इसकी रक्त की आपूर्ति का केवल 20-30 प्रतिशत की ही आवश्यकता होती है। जब तक लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक ब्लॉक 80 प्रतिशत या उससे अधिक तक पहुंच चुके हैं। तब केवल यही होते हृदय रोगी अस्पतालों में पहुंचते हैं और हृदय रोग विशेषज्ञ इसका उपचार महंगे स्टेंट और बाईपास जैसा उपचार बताते हैं। स्टेंटिंग के बाद भी मरीज उसी जीवनशैली के साथ आगे बढ़ते हैं और स्टेंट को वापस से ब्लॉक कर लेते हैं- इस प्रकार अगला स्टेंट लगाया जाता है। तब आदर्श समाधान क्या हो सकता है?
डॉ. सिबिया के अनुसार, सबसे अच्छा विकल्प हृदय रोगियों की जीवनशैली प्रशिक्षण और उसकी शिक्षा है। हृदय रोगियों में से अधिकांश चिकित्सकीय रूप से निरक्षर हैं। उन्हें कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स, व्यायाम, तनाव प्रबंधन कौशल, हृदय रोग को रोकने के लिए योग, मधुमेह, उच्च बीपी, अधिक वनज को नियंत्रित करने के तरीकों और साधनों के बारे में जानने की आवश्यकता है। यदि दिल की धमनी के ब्लॉक उन्नत चरण में हैं, तो उन्हें इष्टतम चिकित्सा प्रबंधन की भी आवश्यकता है।
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