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हार्ट मरीजों को मानसून में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? डॉक्टर से जानिए दवाओं का सही रख-रखाव

TIps for Heart Patient : मानसून में हार्ट के मरीजों को अपना खास ध्यान रखने की जरूरत होती है, ताकि इस दौरान होने वाली परेशानियों को कंट्रोल में रखा जा सके। आइए जानते हैं हार्ट के मरीज मानसून में कैसे रखें अपना ख्याल?

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Written By: Kishori Mishra | Updated : July 15, 2026 12:40 PM IST

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Medically Verified By: Dr Abhijit Borse

Heart Patient during Monsoon : बरसात का मौसम गर्मी से राहत तो लाता है, लेकिन हार्ट मरीजों की समस्याएं बढ़ भी देता है। अगर आप हार्ट के मरीज हैं तो यह मौसम अपने साथ कुछ ऐसी चुनौतियां भी लाता है, जिन्हें हल्के में नहीं लिया जा सकता। हवा में नमी, अचानक बदलते तापमान और इन्फेक्शन के बढ़ते खतरे का सीधा असर आपके हार्ट पर पड़ता है। अगर आपको हाई बीपी, हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, ब्लॉकेज या एरिथमिया जैसी समस्या है या फिर आपकी एंजियोप्लास्टी या बायपास सर्जरी हुई है, तो मानसून में आपको थोड़ी ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट के हार्ट स्पेशलिस्ट और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर अभिजीत बोरसे यहां कुछ बेहद आसान और जरूरी गाइडलाइंस बता रहे हैं, जिन्हें मानसून में हार्ट मरीजों को जरूर अपना चाहिए-

1. हार्ट की दवाइयां कभी न छोड़ें

यह सबसे पहला और सबसे जरूरी नियम है। कई बार मरीज थोड़ा ठीक महसूस होने पर खुद ही दवाइयां बंद कर देते हैं, जो कि बेहद खतरनाक है। बीपी, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और खून पतला करने वाली दवाइयां तभी काम करती हैं, जब उन्हें नियमित रूप से रोज लिया जाए। अगर आप दवा लेना भूल जाते हैं तो अलार्म लगाएं। अगर बारिश में कहीं बाहर जा रहे हैं, तो दवाइयों को वाटरप्रूफ पाउच में रखें और हमेशा कुछ दिनों का एक्स्ट्रा स्टॉक साथ रखें।

2. ब्लड प्रेशर पर नजर रखें

मौसम बदलने, फिजिकल एक्टिविटी कम होने या पानी की कमी की वजह से इस मौसम में बीपी ऊपर-नीचे हो सकता है। इसलिए सप्ताह में कम से कम दो बार घर पर अपना बीपी जरूर चेक करें और उसे एक डायरी में नोट करें। अगर बीपी लगातार नॉर्मल से ज्यादा या कम आ रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर को बताएं। खुद से दवा की डोज कम या ज्यादा करने की गलती बिल्कुल न करें। Blood Pressure

3. पानी सही मात्रा में पिएं

बरसात में पसीना कम आता है इसलिए लोग पानी पीना कम कर देते हैं। लेकिन शरीर में पानी की कमी होने से डिहाइड्रेशन तो होता ही है साथ ही बीपी लो होना, चक्कर आना और खून के थक्के बनने का डर भी रहता है। जिन मरीजों को हार्ट फेलियर या किडनी की बीमारी है, वे पानी और लिक्विड की मात्रा को लेकर अपने डॉक्टर की सलाह का सख्ती से पालन करें। ज्यादा पानी पीने से उनके फेफड़ों में पानी भर सकता है और सांस फूलने की समस्या बढ़ सकती है।

4. घर का ताजा खाना ही खाएं

मानसून में फूड पॉइजनिंग और पेट का इंफेक्शन बहुत तेजी से फैलता है। इसलिए बाहर का खाना एकदम छोड़ दें और स्ट्रीट फूड, बाहर कटे हुए फल, खुली हुई सलाद और बिना फिल्टर किया हुआ पानी बिल्कुल न पीएं। मानसून के मौसम में आपको घर का बना ताजा और गर्म खाना, जिसमें हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और दालें शामिल हों, वहीं खाना चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि अगर आपको हाई बीपी या हार्ट फेलियर है, तो खाने में नमक की मात्रा कम रखें। ज्यादा नमक से शरीर में पानी रुकता है और बीपी बढ़ जाता है।

5. घर के अंदर ही एक्टिव रहें

बारिश की वजह से अगर आप बाहर वॉक पर नहीं जा पा रहे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप पूरे दिन बैठे रहें। घर के अंदर ही वॉक करें, डॉक्टर की इजाजत हो तो धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़ें। योग, स्ट्रेचिंग या हल्की एक्सरसाइज करें। हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की हल्की फिजिकल एक्टिविटी का टारगेट रखें।

6. इन्फेक्शन और बीमारियों से बचें

इस मौसम में वायरल, फ्लू, डेंगू, मलेरिया और सांस के इंफेक्शन बहुत बढ़ जाते हैं। कोई भी इंफेक्शन दिल पर एक्स्ट्रा दबाव डालता है, जिससे हार्ट फेलियर या हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में हाथों को बार-बार धोएं, घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी या मॉस्किटो रिपेलेंट का इस्तेमाल करें। अगर बुखार, खांसी या सांस लेने में दिक्कत हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

7. इन वॉर्निंग सिग्नल्स को न छुपाएं

अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो बिना वक्त गंवाए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, जैसे-

  • छाती में दर्द, भारीपन या दबाव महसूस होना।
  • अचानक सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ।
  • पैरों, टखनों या पेट में सूजन आना।
  • दिल की धड़कन का अचानक बहुत तेज या अनियमित होना।
  • चक्कर आना, कमजोरी या बेहोशी छाना।

8. बिना डॉक्टर पूछे कोई भी दवा न लें

सर्दी, खांसी, बुखार या बदन दर्द के लिए मेडिकल स्टोर से खुद दवा खरीदकर खाना भारी पड़ सकता है। दर्द निवारक दवाइयां बीपी बढ़ा सकती हैं और किडनी व हार्ट फेलियर की स्थिति को बिगाड़ सकती हैं। वहीं, सर्दी-खांसी की कुछ दवाइयों में ऐसे तत्व होते हैं जो दिल की धड़कन और बीपी को अचानक बढ़ा देते हैं।

9. रोज अपना वजन चेक करें

हार्ट फेलियर के मरीज रोज सुबह फ्रेश होने के बाद और नाश्ते से पहले अपना वजन जरूर नापें। अगर 2-3 दिनों के अंदर अचानक 2 से 3 किलो वजन बढ़ जाता है, तो यह मोटापा नहीं बल्कि शरीर में जमा हो रहा पानी है। ऐसा होने पर तुरंत अपने डॉक्टर को रिपोर्ट करें।

10. अच्छी नींद लें और तनाव से दूर रहें

बारिश के दिनों में धूप कम निकलने की वजह से कभी-कभी मूड खराब होना या नींद न आने की समस्या हो सकती है। रोज 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें। तनाव को कम करने के लिए गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज या मेडिटेशन करें।

बरसात में दवाइयों की देखभाल कैसे करें?

दवाइयों का असर बना रहे, इसके लिए उन्हें सही तरीके से स्टोर करना बहुत जरूरी है, जैसे-

  • दवाइयों को हमेशा ठंडी और सूखी जगह पर रखें। उन्हें सीलन से बचाएं।
  • रसोई या बाथरूम जैसी जगहों पर दवाइयां न रखें, क्योंकि वहां गर्मी और नमी ज्यादा होती है।
  • दवा की एक्सपायरी डेट हमेशा चेक करते रहें।
  • इन्सुलिन जैसी जरूरी दवाइयों को निर्देशानुसार फ्रिज में ही रखें।
  • जो लोग खून पतला करने की दवा ले रहे हैं, वे समय पर अपना INR टेस्ट कराते रहें।

डायबिटीज के मरीज इंफेक्शन के दौरान अपनी शुगर ज्यादा बार चेक करें, क्योंकि बीमारी में शुगर लेवल अचानक बढ़ जाता है।

Disclaimer : यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई सलाह किसी डॉक्टर की चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अगर आप हार्ट के मरीज हैं या फिर या आपकी तबीयत में कोई असामान्य लक्षण जैसे सीने में दर्द, सांस फूलना, चक्कर आना या तेज धड़कन महसूस हो, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। दवाओं में किसी भी तरह का बदलाव या उन्हें बंद करने का निर्णय सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही लें।