
Also Read
Medically Verified By: Dr. Sukriti Bhalla
Hole in Heart: दिल में छेद एक जन्मजात समस्या है, इसे मेडिकल भाषा में Congenital Heart Defect कहा जाता है। इसमें दिल की दीवारों के बीच असामान्य छेद रह जाता है। वैसे तो यह समस्या जन्म से ही होती है, लेकिन कई मामलों में इसका पता वयस्क अवस्था में चलता है। दिल में छेद को गंभीर स्थिति माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि दिल में छेद होने पर सर्जरी ही एकमात्र विकल्प होती है। लेकिन, क्या वाकई सिर्फ दिल के छेद को सर्जरी से बंद किया जाता है? तो आइए, इस बारे में आकाश हेल्थकेयर की सीनियर कंसल्टेंट एंड यूनिट हेड कार्डियोलॉजी की डॉ सुकृति भल्ला (Dr. Sukriti Bhalla, Senior Consultant & Unit Head (Unit-2)-Cardiology, Aakash Healthcare) से विस्तार में जानते हैं
दिल चार चैंबर्स (कक्षों) से बना होता है। जब इन चैंबर्स के बीच की दीवार में छेद रह जाता है, तो शुद्ध और अशुद्ध रक्त आपस में मिल सकता है। इससे शरीर के अंगों तक सही मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है। मुख्य रूप से दिल में छेद 3 प्रकार के होते हैं।
1. एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD): यह एक जन्मजात हृदय रोग है। इसमें हृदय के 2 ऊपरी चैंबर्स (एट्रिया) के बीच की दीवार में छेद होता है। इस छेद की वजह से ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त आपस में मिल जाता है और इससे फेफड़ों पर दबाव पड़ता है। अगर इसमें छोटा छेद है, तो अक्सर अपने आप बंद हो जाता है। बड़े छेदों के लिए सर्जरी या डिवाइस की जरूरत होती है।
2. वेट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD): यह भी एक जन्मजात हृदय विकार है। यह हृदय के निचले चैंबर्स (वेंट्रिकल्स) को विभाजित करने वाली दीवार में एक छेद होता है। इसकी वजह से ऑक्सीजन युक्त रक्त, शरीर में जाने के बजाय फेफड़ों में वापस जाता है। इससे फेफड़ों और हृदय पर दबाव पड़ता है।
3. पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस (PDA): इसमें जन्म के बाद हृदय की दो धमनियों (महाधमनी और पल्मोनरी आर्टरी) के बीच की नली (डक्टस आर्टेरियोसस) बंद नहीं होती है। इससे नवजात शिशु में फेफड़ों में अत्यधिक रक्त प्रवाह, सांस लेने में कठिनाई और हृदय पर दबाव पड़ सकता है।
कई बच्चों में शुरुआती वर्षों में दिल में छेद का कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं। लेकिन, कुछ मामलों में ये संकेत नजर आ सकते हैं-
नहीं, दिल में छेद के सभी मामलों में सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती है। दिल में छेद का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि छेद का आकार, स्थान और उससे शरीर पर कितना प्रभाव पड़ रहा है।
इसमें जांघ की नस से एक पतली ट्यूब डाली जाती है और छेद को डिवाइस से बंद किया जाता है। इसमें चीरा नहीं लगता और रिकवरी जल्दी होती है।
गंभीर और जटिल मामलों में ओपन हार्ट सर्जरी सबसे प्रभावी होता है। इसकी सफलता दर सबसे अधिक है।
दिल में छेद का समय पर इलाज बहुत जरूरी है। वरना यह भविष्य में फेफड़ों की गंभीर बीमारी, दिल की कमजोरी, अनियमित धड़कन या स्ट्रोक आदि का कारण बन सकता है। इसलिए बच्चों और वयस्कों, दोनों में इसके लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
दिल में छेद होना, डराने वाला जरूर लगता है। लेकिन, हर मामले में सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती है। कुछ मामलों में यह छेद अपने आप ही बंद हो जाता है और नियमित जांच की जरूरत पड़ती है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।