हार्ट फेल्योर को आमतौर पर एक ऐसी स्थिति के रूप में संदर्भित किया जाता है, जिसमें हमारा दिल रक्त को शरीर के दूसरे अंगों को काम करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पंप नहीं कर पाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे दिल की कार्डियक मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और वो दिल में खुद रक्त को भरने में असक्षम साबित होती हैं। ये समझना बहुत ही जरूरी है कि हार्ट फेल्योर एक बहुत ही गंभीर स्थिति है, जिसमें तत्काल चिकित्सा उपचार की जरूरत होती है। ये स्थिति बहुत कम अवधि में विकसित हो सकती है या फिर बहुत समय से धीरे-धीरे शरीर में बढ़ती है।
हार्ट फेल्योर आपके दिल के एक या फिर दोनों हिस्सों को प्रभावित कर सकता है और ऐसा कई कारणों से हो सकता है। शरीर में पहले से मौजूद कोरोनरी ह्रदय रोग, दिल की अनियमित धड़कन, सूजन और हाइपरटेंशन जैसी स्वास्थ्य स्थितियां हार्ट फेल्योर का कारण बन सकती हैं। उम्रदराज लोग हार्ट फेल्योर के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। महिलाओं में अक्सर पुरुषों के मुकाबले उम्र के एक पड़ाव पर हार्ट फेल्योर का खतरा ज्यादा होता है। इस स्थिति के विकसित होने के पीछे कारण कभी-कभी लिंग पर भी निर्भर करते हैं।
हार्ट फेल्योर शरीर के दूसरे अंगों जैसे किडनी, लिवर और शरीर के अंदरूनी अंगों को प्रभावित करता है। हार्ट फेल्योर दूसरी जटिलताओं का भी कारण बन सकता है, जिसमें हार्ट अटैक, पल्मोनरी हाइपरटेंशन, दिल की अनियमित धड़कन जैसी स्थितियां शामिल हैं।
हार्ट फेल्योर को प्रमुख रूप से तीन वर्गों में विभाजित किया जाता है, दो एक तरफ और उसके काम करने को प्रभावित करती है। आइए जानते हैं इसके प्रकारः
लेफ्ट साइड हार्ट फेल्योर - ऑक्सीजन से भरा हुआ रक्त फेफड़ों से हृदय तक प्रवाहित होता है, जहां यह हमारे दिल के बाएं चैंबर में प्रवेश करता है। उसके बाद यह बाई आट्रियम और फिर बाएं वेंट्रिकल तक जाता है, जिसके बाद ये शरीर के विभिन्न हिस्सों में पंप होता है। हमारे दिल का बायां चैंबर सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है और थोड़ा बड़ा भी होता है क्योंकि इसका काम पूरे शरीर में रक्त पंप करना होता है। इसलिए, लेफ्ट साइड हार्ट फेल्योर बाएं आट्रियम और वेंट्रिकल पर काम का बोझ बढ़ा देता है। लेफ्ट साइड हार्ट फेल्योर के दो मुख्य प्रकार हैं:
सिस्टोलिक फेल्योर - इस स्थिति में ह्रदय से निकलने वाले रक्त में कमी आनी शुरू हो जाती है। बाएं वेंट्रिकल की असमर्थता के कारण हृदय, शरीर के दूसरे अंगों में पर्याप्त बल के साथ रक्त पंप करने की क्षमता खो देता है।
डायस्टोलिक फेल्योर - इस स्थिति में ह्रदय से निकलने वाले रक्त की प्रक्रिया सामान्य ही रहती है। हालांकि, इस स्थिति में बाएं वेंट्रिकल की मांसपेशियों में अकड़न आ जाती है, जिसकी वजह से ये हिस्सा पर्याप्त रूप से आराम करने की क्षमता खो देता है। इस कारण से हृदय रक्त को नहीं भर पाता।
राइट साइड हार्ट फेल्योर - इस स्थिति में हमारे दिल का दायां वेंट्रिकल मुख्य रूप से शामिल होता है और आमतौर पर द्रव का दबाव बढ़ जाने के कारण लेफ्ट साइड हार्ट फेल्योर के बाद होता है। द्रव का ये दबाव हमारे फेफड़ों में स्थानांतरित हो जाता है, जो कि हमारे दाएं चैंबर को प्रभावित करता है, जिससे नसों में रक्त का प्रवाह होता है और शरीर के विभिन्न हिस्से में सूजन आनी शुरू हो जाती है।
कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर - कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर तब होता है, जब हृदय से रक्त के प्रवाह की दर में कमी आ जाती है और इसकी वजह से नसों में रक्त का निर्माण बढ़ जाता है और शरीर के विभिन्न अंगों जैसे पैरों और टखनों में सूजन आने लगती है। अक्सर हमारे फेफड़ों में जमा होने वाले तरल पदार्थ के कारण सांस लेने में कठिनाई होती है और अगर इसे सही तरीके से प्रबंधित नहीं किया जाता है तो सांस लेने में तकलीफ होती है।
हार्ट फेल्योर के लक्षण
लेफ्ट साइड हार्ट फेल्योर के लक्षण -
सांस लेने में कठिनाई
फेफड़ों में बनने वाले द्रव की मात्रा बढ़ जाने से खांसी
थकान और कमजोरी
ध्यान लगाने में दिक्कत
ऊबाउपन
उंगलियों और होठों का नीला पड़ना
सोते समय सीधा होने में कठिनाई
राइट साइड हार्ट फेल्योर के लक्षण -
भूख न लगना और जी मिचलाना
सूजन के कारण पेट दर्द
टखनों, पैरों, पेट और गर्दन की नसों में सूजन
बार-बार पेशाब आना
वजन बढ़ना
हार्ट फेल्योर
हार्ट फेल्योर आम तौर पर हृदय को प्रभावित करने वाली कई अन्य स्थितियों के परिणामस्वरूप होता है। हार्ट फेल्योर के सामान्य कारणों में शामिल हैं:
कोरोनरी हृदय रोग - यह स्थिति आमतौर पर तब होती है जब हमारी धमनियों में फैट जैसे पदार्थ, जिसे प्लाक के नाभ से भी जाना जाता है, बहुत तेजी से बनने लगता है और रक्त के बहाव में रुकावट आने लगती है। धमनियों को अवरुद्ध करने वाले प्लाक के जमा हो जाने को एथेरोस्क्लेरोसिस नाम की स्थिति भी कहा जाता है। इस प्लाक की वजह से धमनियों में रक्त का प्रवाह बाधित होता है, जिससे हार्ट टिश्यू तक होने वाली ऑक्सीजन की मात्रा की आपूर्ति कम हो जाती है। ऑक्सीजन की कमी एनजाइना या कार्डियक अरेस्ट का कारण बनती है।
हाई ब्लड प्रेशर - ब्लड प्रेशर के बढ़ने से रक्त वाहिकाओं और हृदय पर दबाव पड़ता है, जिससे हृदय की गति रुक जाती है।
कार्डियोमायोपैथी - ये एक ऐसी स्थिति हैं, जिसमें हार्ट टिश्यू अपने आप क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिसकी वजह से हार्ट फेल्योर हो सकता है। इस स्थिति में हृदय की मांसपेशियां प्रभावित होती है, जिससे वे कमजोर हो जाती हैं।
दिल की अनियमित धड़कन - इस स्थिति में आमतौर पर हमारे दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है। ये स्थिति हार्ट फेल्योर को खतरे को बढ़ाने का काम करती है।
हृदय वाल्व के क्षतिग्रस्त होना - इससे हमारा दिल सही तरीके से रक्त पंप नहीं कर पाता है और इसके परिणामस्वरूप निलय में वेंट्रिक्ल्स में रक्त नहीं भर पाता है। इसकी वजह से भी हृदय गति रुकने जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
जन्मजात हृदय रोग - ये जन्म से ही मौजूद दोष हैं और अगर इस स्थिति का सही उपचार या प्रबंधन न किया जाए तो यह हार्ट फेल्योर का कारण बन सकता है।
नशा करना - शराब का अत्यधिक सेवन, ड्रग्स या धूम्रपान जैसे जीवनशैली से संबंधित कारक हृदय को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
हाइपरथायरायडिज्म या पल्मोनरी हाइपरटेंशन - ऐसी स्वास्थ्य स्थितियां भी हृदय की गति को रोक सकती हैं।
हार्ट फेल्योर जोखिम कारक
हार्ट फेल्योर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं -
आयु - 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में हार्ट फेल्योर का खतरा अधिक होता है।
लिंग - महिलाओं की तुलना में पुरुषों में हार्ट फेल्योर की संभावना अधिक होती है।
पारिवारिक इतिहास - अगर आपके परिवार में किसी को ये स्थिति रही है तो आपको भी हार्ट फेल्योर का खतरा बढ़ जाता है।
डायबिटीज - डायबिटीज के साथ-साथ हाई ब्लड प्रेशर और कोरोनरी धमनी रोग मरीजों में इस स्थिति के विकसित होने की संभावना को बढ़ा देता है।
जीवनशैली - मोटापा, धूम्रपान, शराब का सेवन समय के साथ-साथ हार्ट फेल्योर के खतरे को बढ़ा देता है।
दवाएं - एनाबॉलिक स्टेरॉयड या कैंसर की दवाएं जैसी दवाएं दिल को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे हार्ट फेल्योर का खतरा बढ़ जाता है।
हार्ट फेल्योर का निदान
हार्ट फेल्योर का पता लगाने के लिए शारीरिक जांच की आवश्यकता हो सकती है। अगर कोई व्यक्ति इन लक्षणों में से किसी को महसूस कर रहा है तो डॉक्टर से मिलना जरूरी हो जाता है। डॉक्टर टू-डायमेंशनल इकोकार्डियोग्राम, डॉपलर फ्लो के माध्यम से पुष्टि करता है। इसके अलावा किडनी कैसा काम कर रही है, शरीर का टोटल कोलेस्ट्रॉल, इलेक्ट्रोलाइट्स के स्तर जैसे सोडियम, पोटेशियम का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है। डॉक्टर छाती के एक्स-रे की भी सलाह दे सकता है। ईसीजी और एमआरआई भी कराई जाती है, जो वेंट्रिकुलर फंक्शन का पता लगाने में मदद करती है।
हार्ट फेल्योर की की रोकथाम
हार्ट फेल्योर को रोकने के लिए जोखिम कारकों का पता लगाना बहुत जरूरी है। अन्य उपायों में आप हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज को कंट्रोल करने और जीवनशैली में सुधार करना जैसे तनाव को कम करना, वजन कंट्रोल करना, शराब का सेवन और धूम्रपान छोड़ने जैसे उपायों की मदद से हार्ट फेल्योर के खतरे को कम किया जा सकता है।
हृदय संबंधी समस्याएं होने पर शरीर में कई संकेत और लक्षण देखने को मिलते हैं, जिन्हें पहचान कर आप भविष्य में हार्ट फेलियर जैसी स्थितियों से बच सकते हैं। इस लेख में हम आपको हार्ट फेलियर के 8 लक्षण बता रहे हैं।
हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और कार्डियक अरेस्ट (Heart Attack, Heart Failure And Cardiac Arrest) के बीच अंतर को स्पष्ठ किया है, मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर संतोष कुमार डोरा ने।
युवाओं में ह्रदय रोगों के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है विश्व स्वास्थ संगठन भी मानता है कि पहले की तुलना में आजकल का युवा वर्ग हृदय रोगों से ज्यादा ग्रसित हो रहा है जिसके कई कारण हो सकते हैं।
किसी का हार्ट अचानक से फेल नहीं होता है, ऐसा होने से पहले शरीर में कई बदलाव और लक्षण दिखाई देते हैं; आइये मुंबई के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संतोष कुमार डोरा के माध्यम से इसे विस्तार से जानते हैं।
क्रिकेटर की हार्ट अटैक के कारण मौत हो गई है। पुलिस का कहना है कि खिलाड़ी पुणे के जुन्नर जिले में क्रिकेट मैच खेल रहा था, जहां खेल के दौरान ही उसकी मौत हो गई।
आधुनिक जीवनशैली और खान-पान की खराब आदतों ने जिस तरीके से हमारी जीवन में दस्तक दी है उसके कारण 30 से 40 साल की उम्र में ही हमारा दिल कमजोर होना शुरू हो जाता है। ये लक्षण बताते हैं कमजोर हो गया है आपका दिल।
यूं तो हार्ट अटैक के पीछे कई कारण होते हैं लेकिन जाने-अनजाने में आप ऐसी गलतियां करते हैं तो दिल के दौरे का कारण बनती है। इस लेख में हम आपको ऐसी ही 5 गलतियों के बारे में बता रहे हैं, जो हार्ट अटैक का कारण बनती हैं।
हार्ट को हेल्दी रखना हर सूरत में जरूरी होता है। क्योंकि हृदय ही वह अंग होता है जो पूरी बॉडी में ब्लड की सप्लाई करता हैं लेकिन कभी कभी लोग जाने अनजाने में ऐसी गलतियां कर देते हैं जो हमारे हृदय को कमजोर बनाती है और ऐसे में हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए जरूरी है कि हम अपने हृदय की उचित तरह से देखभाल करें। आज हम आपको कुछ ऐसे तरीके बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप खुद ही अपने दिल की देखभाल कर सकते हैं।
दिल की सेहत के लिए कार्डियो को हमेशा से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के मुकाबले ज्यादा पसंद किया जाता है। कार्डियो, एरोबिक एक्सरसाइज का एक प्रकार है, जिसके दौरान हमारा शरीर अधिक ऑक्सीजन का उपयोग करता है क्योंकि कार्डियो करते वक्त हमारी हृदय गति बढ़ जाती है। वहीं स्ट्रेंथ ट्रेनिंग हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में अधिक फायदेमंद माना जाती है। टोंड बॉडी या फिर बॉडी बिल्डिंग करने वाले लोग अक्सर वेट लिफ्टिंग की कोशिश करते हैं। लेकिन एक हालिया अध्ययन के मुताबिक, हमारे दिल की सेहत के लिए कार्डियो उतना अच्छा नहीं है, जितना कि इसे स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से ज्यादा माना जाता है।
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, 5 में से एक पुरुष और 8 में से एक महिला दिल की बीमारियों के चलते अपनी जान गंवा बैठते हैं। हार्ट फेलियर रक्त वाहिकाओं की धमनी में वसा की परत जमने के कारण होता है। इसके लिए जीवनशैली की आदतें, धूम्रपान, मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल, उच्च-रक्तचाप और डायबिटीज को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जाता है।
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आज से 20-25 वर्षों पहले तक 50-60 वर्ष के बुजुर्गों में हार्ट अटैक आने की समस्या अधिक देखी जाती थी, पर अब ऐसा नहीं है। 30-40 वर्ष के युवाओं को भी हार्ट अटैक आने का खतरा काफी बढ़ गया है। ऐसे में अलर्ट होने की जरूरत है। अपने दिल का ख्याल रखना होगा। अपने दिनचर्या को सुधारना होगा। जानें, हार्ट अटैक से बचने के लिए क्या करना होगा आपको...
हार्ट अटैक के बाद दिल को फिर बेहतर तरीके से काम करने के लिए हीलिंग की जरूरत होती है. एक नये शोध में यह पाया गया है कि हार्ट अटैक के मरीज को अगर हार्ट अटैक के बाद विटामिन ई का सप्लिमेंट दिया जाये तो हृदय तेजी से मजबूत होता है.
दिल की बीमारी या हृदय रोग से बचने के लिए बेहतर जीवनशैली के साथ रोजाना एक्सरसाइज, वर्कआउट या योग जरूरी है. हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर से बचने के लिए ये 2 योग बहुत ही फायदेमंद होते हैं.
हृदय रोग (cardiovascular diseases) की मुख्य वजह मोटापा है. मोटापा (obesity) की मुख्य वजह खराब खान-पान और गलत जीवनशैली. अगर आप मोटापा और खराब खान-पान को नियमित कर सकें तो हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर से खुद को बचा सकते हैं.
हार्ट फेलियर की घटनाएं बढ़ रही हैं। मैं एक माह में जितने हार्ट फेलियर के रोगी देखता हूं, उनमें से 20-22 प्रतिशत की यह स्थिति इश्चेमिक हार्ट डिजीज के कारण है। जोखिम के कारकों की बेहतर स्क्रीनिंग और शीघ्र तथा पर्याप्त उपचार से बहुत हद तक इसकी रोकथाम की जा सकती है।
शरीर में गर्माहट की कमी अथवा शरीर के भीतरी तापमान में गिरावट उन मरीजों के लिए खतरनाक स्थिति होती है, जिन्हें कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां हैं। ऐसे में, ठंड के दिनों में अपना खूब ख्याल रखें।
लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस (एलवीएडी) एक तरह का मेकैनिकल पंप है, जो कि अंत-करण हृदय की विफलता के कारण हृदय प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे रोगियों में प्रत्यारोपित किया जाता है।
अपने हार्ट को हेल्दी रखना चाहते हैं, तो 40 साल के उम्र वाले लोगों को अच्छी नीद लेना बहुत जरूरी है। पर्याप्त नीद ना लेने पर शरीर से स्ट्रेस हार्मोन्स निकलते हैं, जो धमनियों को ब्लॉक कर देते हैं और जलन पैदा करते हैं।
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