भारतीय युवाओं में बढ़ती मृत्युदर का एक बड़ा कारण हार्ट फेलियर, जानें इसके लक्षण, इलाज, बचाव के उपाय

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, 5 में से एक पुरुष और 8 में से एक महिला दिल की बीमारियों के चलते अपनी जान गंवा बैठते हैं। हार्ट फेलियर रक्त वाहिकाओं की धमनी में वसा की परत जमने के कारण होता है। इसके लिए जीवनशैली की आदतें, धूम्रपान, मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल, उच्च-रक्तचाप और डायबिटीज को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जाता है।

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Written By: Anshumala | Updated : September 30, 2020 8:06 AM IST

World Heart Day 2020 in Hindi: दिल की बिमारियों को भारत में मृत्युदर का एक प्रमुख कारण माना जाता है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, 5 में से एक पुरुष और 8 में से एक महिला दिल की बीमारियों (Heart Diseases) के चलते अपनी जान गंवा बैठते हैं। हार्ट फेलियर (Heart Failure in hindi), रक्त वाहिकाओं की धमनी में वसा की परत जमने के कारण होता है। इसके लिए जीवनशैली की आदतें, धूम्रपान, मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल, उच्च-रक्तचाप और डायबिटीज को मुख्य रूप से जिम्मेदार (Symptoms & Causes of Heart Failure) माना जाता है।

20 से 40 की उम्र वाले लोग भी दिल की बीमारियों से हो रहे हैं ग्रस्त

मैक्स हॉस्पिटल (साकेत, दिल्ली) के कार्डियक साइंसेज, चेयरमैन डॉ. बलबीर सिंह कहते हैं कि एक समय में हार्ट अटैक (Heart attack in hindi) केवल बुढ़ापे से संबंधित हुआ करता था, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि 20, 30 और 40 की उम्र वाले लोग भी दिल की बीमारियों से जूझ रहे हैं। आमतौर पर अनुवंशिकता और पारिवारिक इतिहास सबसे आम और नियंत्रित न हो पाने वाले कारक माने जाते हैं। लेकिन, आज इनके अलावा कई कारणों से भारतीय युवा हृदय रोगों (Heart diseases in Indian Youth) की चपेट में आ रहे हैं। इन कारणों में खराब जीवनशैली, तनाव, सही समय और सही मात्रा में न सोना आदि शामिल हैं। परिणास्वरूप, सूजन की समस्या होती है, जो हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ाती है। गतिहीन जीवनशैली के साथ धूम्रपान से युवा पीढ़ी में हृदय रोगों का खतरा बढ़ता है।

हर 10 सेकेंड में होती है एक मौत

हर दिन लगभग 9 हजार लोग दिल की बीमारियों से मरते हैं, जिसका मतलब है हर 10 सेकेंड में एक मौत। उनमें से 900 लोग 40 साल से कम उम्र के युवा होते हैं। भारत में हृदय रोगों की महामरी को रोकने का एकमात्र तरीका जनता को शिक्षित करना है अन्यथा 2020 तक हालात बद से बद्तर हो जाएंगे।

हार्ट फेलियर के लक्षण? (Symptoms of Heart Failure in hindi)

डॉ. बलबीर सिंह कहते हैं कि कोरोनरी हार्ट डिजीज (सीएचडी) के सभी मरीजों में लक्षण और सीने का दर्द एक समान हो, ऐसा जरूरी नहीं है। लक्षण शून्य से गंभीर तक भिन्न हो सकते हैं। कई मरीजों को अपच की समस्या हो सकती है, तो कइयों को गंभीर दर्द, भारीपन या कसाव महसूस हो सकता है। यह दर्द आमतौर पर सीने के बीचों-बीच होता है, जो हाथों, गर्दन, जबड़ा और पेट तक फैल सकता है। इसके साथ ही घबराहट और सांस लेने में मुश्किल हो सकती है। धमनियों के पूरी तरह ब्लॉक होने पर हार्ट अटैक हो सकता है, जिसके कारण दिल की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।

हार्ट अटैक के कारण होने वाला दर्द और असुविधा एंजाइना के समान होता है, लेकिन अक्सर अधिक गंभीर होता है। इसमें पसीना आना, उलझन, जी मिचलाना, सांस लेने में मुश्किल आदि समस्याएं होती हैं। यह डायबिटीज के मरीजों में आम है। हार्ट अटैक का सही समय पर इलाज (Heart Attack Treatment) न करने पर यह घातक साबित हो सकता है।

हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर का निदान

एक संदिग्ध सीएचडी के मरीज में बीमारी की पहचान के लिए चिकित्सा और पारिवारिक इतिहास, जीवनशैली का आंकलन और रक्त परीक्षण शामिल हैं। इसके अलावा सीएचडी की पहचान में प्रत्येक हार्ट वॉल्व की संरचना, मोटाई और हलचल की पहचान के लिए इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी), दिल, फेफड़ों और सीने में दिखाई देने वाले लक्षणों (Symptoms of Heart Failure) को देखने के लिए एक्स-रे, एक्सरसाइज के दौरान दिल पर पड़ने वाले असर की पहचान के लिए ट्रेडमिल टेस्ट, कार्डियोवैस्कुलर कार्टोग्राफी, हार्ट फ्लो मैपिंग, सीटी एंजियोग्राफी और ब्लॉकेज की गंभीरता की पहचान के लिए इनवेसिव कोरोनरी एंजियोग्राफी आदि जैसे नॉन इनवेसिव टेस्ट शामिल हैं।

हृदय रोगों की रोकथाम (Prevention of cardiovascular diseases)

1 कोरोनरी आर्टरी डिजीज को पूरी तरह से ठीक करना संभव नहीं है, लेकिन इसका इलाज लक्षणों के नियंत्रण, दिल की कार्यप्रणाली में सुधार और हार्ट अटैक जैसी समस्याओं के खतरे को कम करने आदि में सहायक होता है। इसमें जीवनशैली में बदलाव, दवाइयां और नॉन-इनवेसिव इलाज शामिल हैं। इनवेसिव और सर्जरी की जरूरत केवल गंभीर मामलों में पड़ सकती है।

2 जीवनशैली में कुछ आसान बदलावों की आवश्यकता पड़ती है जैसे पौष्टिक व संतुलित आहार, शारीरिक सक्रियता, नियमित व्यायाम, धूम्रपान बंद करना और कोलेस्ट्रॉल और शुगर के स्तर को नियंत्रित करना आदि। ये बदलाव सीएचडी, स्ट्रोक और कमजोर याददाश्त के खतरे को कम करते हैं।

3 दिल की विफलता (Symptoms of Heart Failure in hindi) खतरनाक होती है, लेकिन उचित निदान और देखभाल के साथ इसका इलाज संभव है। मोटापा, डायबिटीज और उच्च-रक्तचाप को बढ़ावा देने वाले आहार और जीवनशैली में बदलाव ही दिल की विफलता (Heart Failure prevention in hindi) की रोकथाम का सबसे आसान तरीका है।

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