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महिलाओं में क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट डिजीज के रिस्क? डॉक्टर बता रहे हैं कौन से कारक हैं जिम्मेदार

Heart Problems in Women: आज के समय में हार्ट डिजीज का खतरा न सिर्फ पुरुषों को है, बल्कि महिलाओं में भी इसके मामले लगातार बढ़ते नजर आ रहे हैं। ऐसे में इस विषय पर भी चर्चा करना बहुत ही जरूरी है कि आखिर महिलाओं में हार्ट संबंधी समस्याओं के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?

महिलाओं में क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट डिजीज के रिस्क? डॉक्टर बता रहे हैं कौन से कारक हैं जिम्मेदार
Heart attack risk factors in women
VerifiedMedically Reviewed By: Dr Abhijit Borse

Written by Kishori Mishra |Updated : March 10, 2026 4:23 PM IST

Heart attack risk factors in women : लंबे समय तक हमारे समाज में यह धारणा बनी रही कि दिल की बीमारियां सिर्फ पुरुषों की समस्या हैं। लेकिन आज के बढ़ते आंकड़े एक बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। सच तो यह है कि आज दुनिया भर में महिलाओं की मौत का सबसे बड़ा कारण दिल की बीमारी ही है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) का अनुमान है कि दुनिया भर में होने वाली कुल मौतों में से करीब एक-तिहाई मौतें दिल की बीमारियों की वजह से होती हैं, और इस आंकड़े में महिलाओं की एक बहुत बड़ी तादाद शामिल है। इससे भी ज्यादा चिंता की बात वह ट्रेंड है जिसे डॉक्टर्स और रिसर्चर्स पिछले कुछ दशकों से ट्रैक कर रहे हैं। महिलाओं में लाइफस्टाइल (जीवनशैली) से जुड़े रिस्क फैक्टर्स लगातार बढ़ रहे हैं। भारत के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट और मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में सीनियर डॉक्टर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट अभिजीत बोरसे हमें बता रहे हैं कि यह बदलाव क्यों हो रहा है और इस पर खुलकर बात करना पब्लिक हेल्थ और बीमारी से बचाव के लिए अब क्यों जरूरी हो गया है।

आधुनिक शहरी जीवन की हकीकत

दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण है शहरीकरण की वजह से जीवनशैली में आया तेजी से बदलाव। चलिए ईमानदारी से बात करते हैं कि आज के काम करने का तरीका कैसा हो गया है: घंटों डेस्क पर बैठे रहना, स्क्रीन से चिपके रहना और शारीरिक मेहनत का लगभग खत्म हो जाना। आज कई महिलाएं एक साथ अपनी चुनौतीपूर्ण प्रोफेशनल लाइफ और घर की भारी जिम्मेदारियों को संभाल रही हैं, जिसकी वजह से उनके पास एक्सरसाइज के लिए बिल्कुल वक्त नहीं बचता।

शारीरिक सक्रियता की यह कमी सीधे तौर पर मोटापे, इंसुलिन रेजिस्टेंस और हाई ब्लड प्रेशर की ओर ले जाती है, जो दिल की बीमारियों की बड़ी वजह बनते हैं। 'जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी' की रिसर्च बताती है कि दिन भर में थोड़ी बहुत हलचल भी दिल के खतरेको काफी कम कर सकती है। िइसके बावजूद, महिलाओं की एक बड़ी आबादी रिकमेंडेड एक्टिविटी लेवल से पीछे रह जाती है, और इसकी एकमात्र वजह है—वक्त की भारी कमी।

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[caption id="attachment_1308006" align="alignnone" width="1200"]Abhijit Borse Abhijit Borse[/caption]

प्रोसेस्ड फूड और समय की कमी

हमारी खान-पान की आदतों पर भी बुरा असर पड़ा है। नमक, चीनी और अनहेल्दी फैट्स से भरे प्रोसेस्ड फूड के बढ़ते चलन ने दिल की सेहत को काफी नुकसान पहुंचाया है। जब शेड्यूल बहुत बिजी

होता है, तो सुविधा के हिसाब से रेडी-टू-ईट खाना मंगाना या खाना स्किप कर देना बहुत आसान लगता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन अक्सर इस बात पर जोर देता है कि खराब डाइट दिल के रोगों का एक मुख्य कारण है, खासकर तब जब आप दिन भर बैठकर काम करते हैं।  ज्यादा रिफाइंड कार्ब्स और ट्रांस फैट खाने से वजन बढ़ता है, कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और मेटाबॉलिक समस्याएं शुरू हो जाती हैं। कई शहरों में समस्या सिर्फ जरूरत से ज्यादा खाना नहीं है, बल्कि पोषण का सही संतुलन न होना है। ताजे फल, सब्जियों, साबुत अनाज और हेल्दी फैट्स की कमी हमारे वैस्कुलर सिस्टम (नसों के तंत्र) को उन जरूरी पोषक तत्वों से दूर रखती है जिनकी उसे स्वस्थ रहने के लिए जरूरत होती है।

बढ़ता मोटापा और मेटाबॉलिक सिंड्रोम

दुनिया भर में महिलाओं के बीच मोटापा एक आम समस्या बनता जा रहा है। यह एक जटिल जाल की तरह है, जिसमें सुस्त जीवनशैली, प्रोसेस्ड खाना, शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव और 'स्ट्रेस-ईटिंग' (तनाव में ज्यादा खाना) जैसी चीजें अहम भूमिका निभाती हैं। दुर्भाग्य की बात यह है कि मोटापा कभी अकेला नहीं आता; यह अपने साथ हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल के खतरनाक स्तर (डिस्लिपिडेमिया) को भी साथ लाता है। जब ये सारी बीमारियां एक साथ शरीर को घेर लेती हैं, तो इसे 'मेटाबॉलिक सिंड्रोम' कहा जाता है। 'सर्कुलेशन' (Circulation) जर्नल में प्रकाशित रिसर्च बताती है कि मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जूझ रही महिलाओं में कोरोनरी आर्टरी डिजीज (दिल की नसों से जुड़ी बीमारी) होने की संभावना उन महिलाओं के मुकाबले कहीं ज्यादा होती है जिन्हें यह सिंड्रोम नहीं है।

तनाव और वर्क-लाइफ का बोझ

अब हम आखिरकार उस भारी शारीरिक नुकसान को समझने लगे हैं जो मानसिक तनाव की वजह से होता है। महिलाएं अक्सर एक साथ कई मोर्चों पर तनाव झेलती हैं—ऑफिस की जिम्मेदारियां, बच्चों

या बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और समाज की उम्मीदें। क्रोनिक स्ट्रेस (लगातार रहने वाला तनाव) सिर्फ आपके दिमाग तक सीमित नहीं रहता; यह शरीर में ऐसे हार्मोनल बदलाव लाता है  जो ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं, सूजन (इन्फ्लेमेशन) पैदा करते हैं और खून की नसों को नुकसान पहुंचाते हैं। एंग्जायटी (घबराहट) और डिप्रेशन जैसी स्थितियां, जो महिलाओं में ज्यादा देखी जाती हैं, उनका सीधा संबंध दिल के बढ़ते खतरों से है।

'द लैंसेट' (The Lancet) के अध्ययन बताते हैं कि लगातार रहने वाला तनाव हमारे नर्वस सिस्टम को हमेशा 'ओवरड्राइव' मोड में रखता है, जिससे कोर्टिसोल का स्तर बढ़ा रहता है और धीरे-धीरे दिल थकने लगता है। इतना ही नहीं, तनाव हमें गलत आदतों की ओर भी धकेलता है, जैसे कि खराब खाना चुनना, नींद पूरी न करना, जिम न जाना या स्मोकिंग शुरू कर देना।

बदलती आदतें और तंबाकू का सेवन

पुराने समय में महिलाएं पुरुषों के मुकाबले काफी कम स्मोकिंग करती थीं, लेकिन अब कई क्षेत्रों में, खासकर युवा महिलाओं के बीच तंबाकू का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। स्मोकिंग हमारी खून की नसों के लिए बहुत हानिकारक है और यह नसों में गंदगी (Plaque) जमने की रफ्तार को तेज कर देती है, जिससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। यहाँ तक कि कभी-कभार या कम मात्रा में धूम्रपान करना भी खतरनाक है। गौर करने वाली बात यह है कि रिसर्च बताती है कि अगर स्मोकिंग के साथ गर्भनिरोधक गोलियों (Oral Contraceptives) का सेवनकिया जाए, तो महिलाओं में गंभीर वैस्कुलर समस्याओं का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।

बायोलॉजी और लक्षणों को पहचानने में चूक

महिलाओं के शरीर में कई अनोखे जैविक बदलाव होते हैं। मेनोपॉज (Menopause) के दौरान शरीर में सुरक्षा देने वाले 'एस्ट्रोजन' हार्मोन का स्तर तेजी से गिरता है, जिससे शरीर में फैट का  वितरण बदल सकता है और कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है। हालांकि, मेनोपॉज के बाद दिल की सेहत कैसी रहेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि जवानी में आपकी लाइफस्टाइल कैसी थी। इसका मतलब है कि बचाव की शुरुआत कम उम्र से ही होनी चाहिए। यहाँ तक कि प्रेग्नेंसी भी भविष्य की सेहत का आईना हो सकती है—गर्भावस्था के दौरान होने वाली शुगर (Gestational Diabetes) या हाई ब्लड प्रेशर को अब भविष्य में होने वाली दिल की बीमारियों के शुरुआती चेतावनी संकेत के रूप में देखा जाता है।

एक और बड़ी अड़चन है लक्षणों के प्रति जागरूकता की कमी। महिलाओं में अक्सर हार्ट अटैक के लक्षणपुरुषों जैसे नहीं होते। सीने में तेज दर्द के बजाय, एक महिला का शरीर हार्ट अटैक के दौरान बहुत ज्यादा थकान, जी मिचलाना या सांस फूलने जैसे संकेत दे सकता है। चूंकि ये लक्षण बहुत सामान्य लगते हैं, इसलिए अक्सर बीमारी को पहचानने और इलाज शुरू करने में देरी हो जाती है। साथ ही, इतिहास में दिल की बीमारियों पर हुई रिसर्च और क्लीनिकल ट्रायल्स में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम रही है, हालांकि शुक्र है कि अब यह कमी धीरे-धीरे पूरी की जा रही है।

नजरिया बदलने की जरूरत

भले ही ये आंकड़े डरावने लगें, लेकिन राहत की बात यह है कि महिलाओं में दिल की ज्यादातर बीमारियों को सिर्फ जीवनशैली (Lifestyle) में बदलाव करके रोका जा सकता है। शरीर को सक्रिय  रखना, संतुलित और शुद्ध खान-पान, तनाव का सही प्रबंधन और तंबाकू से दूरी—ये आपके सबसे मजबूत सुरक्षा कवच हैं। इसके साथ ही, समय-समय पर ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और वजन की जांच करवाना भी बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी खतरे के संकेत को शुरुआत में ही पकड़ा जा सके।

महिलाओं में बढ़ता दिल की बीमारियों का खतरा समाज में आए बड़े बदलावों का ही एक हिस्सा है। शिक्षा और करियर के बेहतर अवसरों ने निश्चित रूप से महिलाओं को सशक्त बनाया है, लेकिन साथ ही स्वास्थ्य से जुड़ी नई चुनौतियां भी पेश की हैं। इस समस्या से निपटने के लिए व्यक्तिगत जागरूकता के साथ-साथ बेहतर स्वास्थ्य नीतियों और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर तक आसान पहुंच की जरूरत है। महिलाओं के दिल की रक्षा करना सिर्फ एक मेडिकल जरूरत नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए। अगर हम इन लाइफस्टाइल रिस्क को शुरुआत में ही पहचान लें, तो हम इस पूरी कहानी को बदल सकते हैं और दुनिया भर में महिलाओं के स्वास्थ्य को एक बेहतर भविष्य दे सकते हैं।

कुछ अन्य कारण

  • इसके अलावा कुछ अन्य कारण हो सकते हैं, जो निम्न हैं-
  •  बढ़ती हुई सुस्त लाइफस्टाइल
  • खराब डाइट
  • लंबे समय तक चलने वाला स्ट्रेस और स्मोकिंग भी हार्ट  डिजीज का  रिस्क  बढ़ाता है, इत्यादि।

हार्ट डिजीज के लक्षण क्या हैं?

हार्ट में होने वाली समस्याओं के कुछ लक्षण लगभग एक जैसे होते हैं, जिसकी समय पर पहचान जरूरी होती है।  आइए जानते हैं इन लक्षणों के बारे में-

[caption id="attachment_1308016" align="alignnone" width="1200"]Symptoms of Heart Diseases Symptoms of Heart Diseases[/caption]

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  • सीने में काफी दर्द होना, इस दौरान कई बार मरीजों को सीने में दबाव जैसा अनुभव होता है। यह दर्द या जकड़ने धीरे-धीरे जबड़े या पीठ में फैल सकता है।
  • सांस फूलना, कुछ लोगों की सामान्य से अधिक सांस फूलने लगती है। ऐसे लक्षणों को इग्नोर करने से बचें और फौरन डॉक्टर की मदद लें।
  • थकान और कमजोरी, हार्ट संबंधी किसी भी तरह की समस्या होने पर मरीजों को काफी ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होने लगती है।
  • अचानक पसीना आना भी हार्ट डिजीज के लक्षण हो सकते हैं, जिसे इग्नोर करने से बचें।
  • अगर आपको पाचन संबंधी दिक्कतें बार-बार हो रही हैं, तो ऐसे में एक बार डॉक्टर की मदद लें।

Highlights

  • आधुनिक जीवनशैली  के चलते हार्ट डिजीज  का खतरा बढ़ा है।
  • खराब आदतों से हार्ट पर असर पड़ता है।
  • मेटाबॉलिक  सिंड्रोम हाार्ट डिजीज का कारक बनता है।

Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।