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Medically Verified By: Dr Abhilash Mishra
Risk of Heart Blockage: बदलती जीवनशैली, बढ़ते काम के घंटे, लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव, गलत खान-पान की आदतें, धूम्रपान, शराब का सेवन, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापा ये सभी हृदय रोग के प्रमुख जोखिम कारक हैं। ये धमनियों में रुकावट पैदा करते हैं और गंभीर हृदय रोग की संभावना बढ़ा देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 35 से 50 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 40% मरीज छाती में दर्द या धड़कन तेज होने जैसे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और जब उनकी धमनियां 80 से 90% तक ब्लॉक हो जाती हैं, तभी वे चिकित्सा सहायता लेने पहुंचते हैं।
झायनोवा शाल्बी अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिलाष मिश्रा ने कहा कि, जब हृदय को रक्त पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाएं प्लाक जमने के कारण संकरी हो जाती हैं, तो वे ब्लॉक हो जाती हैं। इससे ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह सीमित हो जाता है और कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) हो जाती है। कोरोनरी आर्टरी डिजीज धीरे-धीरे विकसित होती है।
किसी भी बीमारी के प्रति जागरूकता अगर कम है, तो वह उस बीमारी को दोगुना ज्यादा खतरनाक बना देती है। इसके साथ-साथ स्वास्थ्य जांच में देरी के कारण 35 से 50 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 60% मरीज छाती में दर्द या धड़कन जैसे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और जब उनकी धमनियां 80 से 90% तक ब्लॉक हो जाती हैं। लक्षणों के गंभीर होते-होते जब तक वे अस्पताल पहुंचते हैं, तब तक स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी होती है।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि सेडेंटरी लाइफस्टाइल यानी ऐसी जीवनशैली जिसमें व्यक्ति दिन का ज्यादातर समय बैठकर या लेटकर बिता रहा होता है, उदाहरण के लिए दिनभर लैपटॉप या कंप्यूटर पे काम करना, दिनभर टीवी के सामने लेटे रहना आदि सेडेंटरी लाइफस्टाइल के उदाहरण हैं। इसके अलावा खराब खानपान, धूम्रपान, शराब, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा आदि बढ़ने से हार्ट अटैक, आर्टरी डिजीज और हार्ट से जुड़ी अन्य कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
समय पर इलाज न होने पर दिल का दौरा, एरिदमिया, हार्ट फेल्योर और सडन कार्डियक डेथ जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। चिंता की बात यह है कि 30 से 40 वर्ष आयु वर्ग में भी हृदय रोग के मामले बढ़ रहे हैं। इन जानलेवा परिणामों को रोकने के लिए समय पर निदान और इलाज बेहद जरूरी है।
डॉ. मिश्रा ने आगे कहा कि, हार्ट डिजीज के खतरे को प्रभावी रूप से कंट्रोल करने के लिए लाइफस्टाइल के अच्छे बदलाव लाएं, समय पर दवाएं लेते रहें, समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराएं व सलाह लेते रहें। इसके अलावा जो क्रोनिक बीमारियों के मरीज हैं, यानी जिन्हें किसी भी प्रकार की क्रोनिक बीमारी है जैसे हाई ब्लड प्रेशर, लो ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल या डायबिटीज आदि, तो उन्हें कट्रोल रखें। जैसा कि पहले भी बताया है कि मरीजों को संतुलित आहार लेना चाहिए, नियमित व्यायाम करना चाहिए, तनाव को नियंत्रित रखना चाहिए और धूम्रपान व शराब के सेवन से बचना चाहिए। गंभीर मामलों में एंजियोप्लास्टी, स्टेंट प्लेसमेंट या बाइपास सर्जरी जैसे उपचार जीवन रक्षक साबित हो सकते हैं। नियमित हृदय जांच से इस समस्या का समय पर पता लगाकर गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।