महिलाओं को ज्यादातर इस समय आता है हार्ट अटैक, पुरुषों के मुकाबले थोड़े अलग होते हैं लक्षण, जानिए एक्सपर्ट की राय

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों के मुकाबले थोड़े अलग होते हैं। यहां तक की महिलाओं में हार्ट अटैक आने पर छाती में दर्द होने की संभावना भी कम होती है। महिलाओं में हार्ट अटैक के संबंध में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर संतोष कुमार डोरा।

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Written By: Atul Modi | Updated : December 15, 2021 8:14 PM IST

दिल का दौरा या हार्ट अटैक (Heart Attack) के सबसे सामान्य लक्षणों में से एक जिसके बारे में हमें पता है, वह है छाती में किसी प्रकार का दर्द, दबाव या असहजता महसूस होना, जो एक मिनट से लंबे समय तक रहता है या आता और जाता रहता है। जबकि कुछ महिलाएँ इन लक्षणों का अनुभव कर सकती हैं, लेकिन पुरुषों की तुलना में इसकी बहुत अधिक संभावना है कि महिलाओं में हार्ट अटैक के ऐसे लक्षण दिखाई दें जिनका छाती के दर्द से कोई संबंध नहीं होता। आमतौर पर छाती में दर्द की बजाय महिलाओं को एंजाइना (जब दिल की नसों में खून का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता) के समय सांस लेने में तकलीफ, पेट में असहज महसूस होना, चक्कर आना, पसीना आना, बांह में दर्द, गर्दन दर्द इत्यादि महसूस हो सकता है। पुरुषों में जिस तरह देखा जाता है, उससे कहीं ज़्यादा और अक्सर, महिलाओं में भी आराम करते समय या यहां तक कि जब नींद में हों, लक्षण सामने आ सकते हैं। कई बार यह भी हो सकता है कि वे पूरी तरह ग़ैर-मौजूद रहें। करीब दो तिहाई उन महिलाओं में, जिनकी मौत कोरोनरी धमनी रोग से अचानक होती है, हो सकता है इससे पहले कोई लक्षण दिखाई न दें।

हार्ट अटैक से जुड़े लक्षण, जिन्हें महिलाओं को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए

महिलाओं में दिल का दौरा पड़ने के पूर्व दिखाई देने वाले कुछ लक्षणों में शामिल हैं, जिनके बारे में विस्तार से बता रहे हैं सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट, डॉ. संतोष कुमार डोरा।

  1. गर्दन, जबड़े, कंधे, पीठ के ऊपरी भाग में या पेट में असहज महसूस करना
  2. सांस लेने में तकलीफ
  3. एक या दोनों बांहों में दर्द
  4. मतली या उल्टी
  5. पसीना आना
  6. चक्कर आना
  7. असामान्य थकान
  8. बदहजमी

तनाव, पारिवारिक इतिहास और रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज़) महिलाओं में दिल की बीमारियों के कुछ जोखिम कारकों में शामिल हैं। रजोनिवृत्ति के बाद उनमें कार्डियो वास्कुलर (ह्रदय तथा रक्तवाहिकाओं संबंधी) बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। क्योंकि ये लक्षण आम तौर पर नहीं होते और छाती में तेज़ दर्द की तरह तुरंत ध्यान में नहीं आते, इसलिए हमेशा महिलाएं इसे समय पर पहचान नहीं पाती हैं। इस वजह से, महिलाएं इमरजेंसी मामलों में ही अस्पताल में आती है, जब ह्रदय को नुकसान हो गया होता है। जबकि, पूरी दुनिया में महिलाओं में मौत के लिए सबसे प्रमुख कारणों में से एक ह्रदय रोग है, लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि बड़े तौर पर इसे रोका जा सकता है। यदि महिलाएं उनके दिल के अनोखे लक्षणों और जोखिम कारकों के बारे में अधिक जागरुक रहें, तो जीवन के प्रत्येक चरण में ह्रदय रोग संबंधी समस्याओं को दूर रखा जा सकता है।

महिलाओं में हार्ट अटैक से बचाव के उपाय - Ways to Prevent Heart Attack in Women

  • एक सेहतमंद आहार का सेवन करें और एक आदर्श वज़न बनाए रखें
  • नियमित सक्रिय व्यायाम, कम से कम 30 मिनट प्रतिदिन, एक सप्ताह में कम से कम 5 दिन या प्रति सप्ताह 150 मिनट महत्वपूर्ण है
  • वार्षिक स्वास्थ्य जांच में ह्रदय जांच शामिल होना चाहिए
  • यदि आपके परिवार में कोरोनरी धमनी रोग का तगड़ा इतिहास रहा है, तो आपको 5 वर्षों में कम से कम एक बार सीटी कोरोनरी कैल्शियम स्कोर या कोरोनरी एन्जियोग्राम कराना चाहिए
  • यदि आपको डायबिटीज (मधुमेह) या उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) की बीमारी है, तो इसे सामान्य सीमा में रखने के लिए उपाय करें और दवाइयां लें
  • धूम्रपान करना, ह्रदय रोग के लिए एक बड़ा खतरे का कारक है, इसलिए इसे पूरी तरह छोड़ दें
  • स्वयं को तनावमुक्त रखें। योग, प्राणायाम इत्यादि का अभ्यास करें। जब भी आपको मौका मिले आपके शौक में मन लगाएं।
  • पर्याप्त नींद लें, कम से कम 7 से 8 घंटे
  • आपके लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें। यदि आपको ऐसे किसी लक्षणों का अनुभव हो, जो नहीं होने चाहिए, तो आपके डॉक्टर से बात करें और स्वयं की संपूर्ण जांच कराएं। महिलाओं में ह्रदय संबंधी लक्षणों की प्रकृति बहुत असामान्य होती है।

(इनपुट्स: डॉ. संतोष कुमार डोरा, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट, एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट, बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स, मुंबई)

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