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बड़ों हो ही नहीं बच्चों को भी आ सकता है हार्ट अटैक, एक्सपर्ट से जानिए इसके कारण, लक्षण और बचाव के तरीके

Heart Attack in Children : बच्चों में हार्ट अटैक का खतरा काफी तेजी से बढ़ रहा है। आइए जानते हैं क्या हैं इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय-

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Written By: Kishori Mishra | Updated : March 13, 2023 7:01 AM IST

Heart Attack in Children : आधुनिक समय में हार्ट अटैक के मामले काफी ज्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि हार्ट अटैक न सिर्फ बुजुर्गों को आ रहा है, बल्कि आधुनिक समय में युवा वर्ग से लेकर बुजुर्ग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में हार्ट अटैक आना या फिर इसके लक्षण दिखना आज के समय में काफी ज्यादा गंभीर विषय बन चुका है। आज हम इस लेख में बच्चों में हार्ट अटैक के कारण, लक्षण और बचाव के तरीकों के बारे में जानेंगे। इस विषय पर जानकारी के लिए हमने दिल्ली के शालीमार बाग में स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिएटी हॉस्पिटल के पेडियाट्रिक्स हेड ऑफ डिपार्टमेंट के डॉक्टर परविंदर सिंह नारंग ( Dr Parvinder Singh Narang,  Head of Department, Pediatric - Max Super Specialty Hospital, Shalimar Bagh, Delhi ) से बातचीत की है। आइए जानते हैं क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट?

बच्चों में हार्ट अटैक के क्या कारण हैं?

डॉक्टर परविंदर का कहना है कि बच्चों में हार्ट अटैक की संभावना तुलनात्मक रूप से कम होती है। हालांकि, आधुनिक समय में इसके मामलों में बढ़ोतरी हुई है। बच्चों में हार्ट अटैक के कई कारण हो सकते हैं, जिसके प्रमुख कारणों में जन्मजात हृदय रोग, बाई ओर की कोरोनरी आर्टरी में किसी तरह की परेशानी हो सकते हैं। इसके अलावा कुछ बच्चों को रुमेटिक हार्ट डिजीज होता है, जिसकी वजह से भी उनमें हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा छाती के आस-पास किसी तरह की गंभीर चोट के कारण भी बच्चों को हार्ट अटैक का सकता है। 

डॉक्टर का कहना है कि आधुनिक समय में बच्चों के लाइफस्टाइल में काफी ज्यादा बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उनकी फिजिकल एक्टिविटी पहले की तुलना में काफी कम हो चुका है। इसके अलावा कई बच्चे अपने गलत खानपान के कारण मोटापे का शिकार हो रहे हैं, जिसकी वजह से उनमें हार्ट अटैक का खतरा बढ़ रहा है। 

बच्चों में हार्ट अटैक के क्या हैं लक्षण?

बच्चों में हार्ट अटैक से पहले आपको कुछ बदलाव नजर आ सकते हैं, जैसे-

  • अन्य बच्चों के साथ किसी भी तरह की शारीरिक एक्टिविटी में असमर्थ महसूस करना। 
  • अन्य बच्चों की तुलना में थोड़ी सी भी एक्विटिकी के बाद सांस फूलने की परेशानी
  • हल्के-फुल्के एक्सरसाइज से भी काफी ज्यादा पसीना आना। 
  • मसूढ़ों/जीभ का नीला पड़ जाना।
  • व्यायाम के दौरान सीने में काफी दर्द होना।

दिल की धड़कन रुक जाना या असामान्य रूप से धड़कना, इत्यादि हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं। 

बच्चों में हार्ट अटैक से कैसे करें बचाव?

डॉक्टर का कहना है कि अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा हार्ट अटैक जैसी घातक बीमारी से कोसों दूर रहे, तो सबसे पहले आपको अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जरूरत होती है। दरअसल, माता-पिता और परिवार बच्चों के पहले रोल मॉडल होते हैं। ऐसे में अगर आप हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करते हैं, तो आपका बच्चा भी कम उम्र से ही हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करेगा। इससे हार्ट डिजीज के खतरों को कम करने में मदद मिल सकती है।

इसमें सबसे पहले आपको अपने आहार में संतुलित और स्वस्थ डाइट का चुनाव करने की जरूरत है। इसके साथ ही फैट युक्त आहार न खुद खाएं और न बच्चों को खिलाएं। साथ ही बच्चों के साथ नियमित रूप से एरोबिक एक्सरसाइज करें। ताकि आपका बच्चा एक्टिव रह सके। 

बच्चों में हार्ट अटैक के मामले काफी ज्यादा बढ़ रहे हैं। ऐसे में आपको अपने साथ-साथ बच्चों के लाइफस्टाइल पर भी ध्यान देने की जरूरत है। ताकि उन्हें आप एक स्वस्थ और हेल्दी जीवन जीने के लिए प्रेरिण कर सकें।