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दिल का दौरा यानी हार्ट अटैक (Heart Attack) और स्ट्रोक (Stroke) दोनों ही अचानक होने वाली एक स्वास्थ्य स्थितियां है। इन दोनों बीमारियों में तुरंत उपचार की जरूरत पड़ती है। लेकिन इन दोनों में काफी असमानताएं हैं। जब हार्ट अटैक और स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें तो आपको इनका अंतर स्पष्ट होना चाहिए। हालांकि इन दोनों ही परिस्थितियों में आपको इमरजेंसी नंबर पर कॉल करना चाहिए ताकि समय रहते उपचार मिल सके। तो आइए सबसे पहले जानते हैं हार्ट अटैक और स्ट्रोक में अंतर और इसके होने पर शरीर में कौन-कौन से लक्षण दिखाई देते हैं।
शारदा हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा के डायरेक्टर न्यूरो सर्जरी डॉक्टर विकास भारद्वाज के मुताबिक, हार्ट अटैक और स्ट्रोक दोनों ही समस्याएं शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में ब्लड सरकुलेशन की कमी के कारण होता है। जब मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है तो स्ट्रोक की घटना घटित होती है जबकि हृदय की धमनियों में रक्त प्रवाह अवरुद्ध होने पर हार्ट अटैक होता है।
डॉक्टर विकास भारद्वाज के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक का मुख्य कारण होता है। इसके अलावा गलत खान-पान और खराब जीवनशैली, योग और एक्सरसाइज का अभाव और तनावपूर्ण जीवन शैली इसका मुख्य कारण है। इसके अलावा नसों में कोलेस्ट्रोल का जमाव भी रक्त प्रवाह के रुकावट का कारण बनता है जिसके कारण इस प्रकार की परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं। हालांकि दोनों का उपचार अलग-अलग तरीकों से होता है।
डॉक्टर विकास के मुताबिक, हार्ट अटैक आने पर छाती में अत्यधिक दर्द शुरू हो जाता है और हृदय की गति धीमी हो जाती है। घबराहट और बेचैनी जैसे कुछ सामान्य लक्षण हैं। जबकि स्ट्रोक आने पर व्यक्ति के शरीर का कोई भी हिस्सा लकवा मार सकता है यह सब घटनाएं अचानक से घटित होती हैं। इसलिए जरूरी है कि आप अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और रूटीन चेकअप कराते रहें।
उन्होंने बताया कि हार्ट अटैक का उपचार करने के लिए एंजियोप्लास्टी की जाती है जबकि स्ट्रोक का उपचार दवाओं के माध्यम से हो जाता है। यदि मरीज को स्ट्रोक आने क 6 घंटे बाद अस्पताल ले जाया जाए तो थ्रंबोलाइसिस करके उसका स्ट्रोक ठीक कर दिया जाता है, यह दोनों ही बीमारी जानलेवा है।