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खाने-पीने का शौक है तगड़ा? तो यह आपके लीवर पर पड़ सकता है भारी !

जानें कैसे ओवर ईटिंग आपके लीवर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।

Written by Sadhna Tiwari |Updated : June 18, 2018 5:55 PM IST

क्या आपको लगता है कि मौका मिलने पर आप दुनिया के सारे गोल-गप्पे अकेले खा जाएंगे?  अपनी डायट को कंट्रोल करने के लिए आप हर साल  रेजोलूशन्स तो बनाते हैं  लेकिन जैसे ही कोई स्वादिष्ट पकवान दिखा नहीं कि अपने डायट प्लान तो भूलाकर लग जाते हैं उसका स्वाद लेने में? अगर ये दोनों बातें आप पर फिट बैठती हैं तो इसका मतलब केवल यही है कि आपको खाने-पीने का शौक है और अपने दोस्तों में आपकी पहचान सबसे बड़े फूडी के तौर पर की जाती हैं, है ना? लेकिन ऐसा करके भले ही आप अपने पेट और दिल को खुश कर लेते हैं, पर आपके लीवर के लिए यह  नुकसानदायक साबित हो सकता है।

जी हां , लीवर हमारी बॉडी का बहुत ही महत्त्वपूर्ण अंग है और ओवर ईटिंग या बहुत ज़्यादा खाना खाने से उसे नुकसान पहुंच सकता है। तली-भुनी चीज़ें या बहुत अधिक फैट्स वाला खाना खाने से डायबिटीज़ और मोटापा जैसी समस्याओं का कारण तो बनता ही है, साथ ही इस तरह का खाना हमारी किडनी, फेफड़े और लीवर को नुकसान पहुंचा सकता है।

ओवर ईटिंग कितना नुकसान दायक है इस बात  का अंदाजा एक  रिसर्च के नतीजो से लगाया जा सकता है। दरअसल न्यूकेस्टल यूनिवर्सिटी के एक रिसर्च के मुताबिक, 2020 तक यूनाइटेड किंगडम में होनेवाली आधे से अधिक लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरीज ओवर ईटिंग की वजह से करनी पड़ेंगी।

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इस बारे में हमने बात की  मुंबई के एसवीआर अस्पताल के कंसल्टेंट गैस्ट्रोएन्टरालोजिस्ट डॉ. जय कोटेचा से जिन्होंने बताया कि, अगर कोई व्यक्ति डायबिटीज़ या लीवर सम्बंधित किसी समस्या से पीड़ित है तो लगातार तली-भुनी और चिकनाई युक्त चीज़ें  खाने से उनके लीवर को गम्भीर रूप से  नुकसान पहुंच सकता है।

ओवर ईटिंग किस तरह हमारे लीवर को प्रभावित करती है ?

मान लीजिए  आपकी थाली में पूरी-परांठे, पनीर मखनी या बटर चिकन ज्यादा होता है तो इस तरह के भोजन से ( इसे ज़्यादा खाने की वजह से) नॉन -एल्कोहोलिक फैटी लीवर डिजीज़ (Non-alcoholic fatty liver disease) की सम्भावनाएं बढ़ जाती हैं। क्यूंकि इस तरह के भोजन में मौजूद फैट,  लीवर की नाड़ियों में इकट्ठा होने लगता है और लीवर की कार्यप्रणाली को प्रभावित करने लगता है, और नतीजतन हमारे शरीर में घातक और विषैले तत्वों का निर्माण होने लगता है। ठीक इसी तरह मोटापे से पीड़ित लोगों में एनएएफएलडी की सम्भावनाएं अधिक होती हैं जिसके चलते पीड़ित व्यक्ति की तोंद निकल सकती है।

यही नहीं अगर आपके भोजन में एनिमल फैट की मात्रा अधिक हो तो यह लीवर से जुड़ी रक्तवाहिनियों को संकुचित कर सकता है और पथरी जैसी बीमारियों की वजह बन सकता है। लीवर के प्रमुख  कार्यों में से एक है पित्त का निर्माण। लेकिन ज़्यादा चिकनाईयुक्त खाने से पित्त का निर्माण बाधित होता है, जिससे हमारी पाचनशक्ति  कमज़ोर हो जाती है और वजन बढ़ने लगता है।

क्या करें क्या न करें ?

खाने के शौकिन लोग भी कुछ बातों पर ध्यान देकर अपने लीवर को सुरक्षित रख रख सकते हैं। डॉ. कोटेचा इसका तरीका बताते हैं वो कहते हैं, 'आप अपनी पसंद का खाना खाएं लेकिन संभलकर। लीन मीट खाएं, चाय के शौकीन हैं तो स्किम्ड मिल्क का इस्तेमाल करें। उन पदार्थों/चीज़ों  को अपने भोजन में शामिल करें जिनमें अनसैचुरेटेड फैट्स हो क्योंकि अनसैचुरेट फैट लीवर की पाचनशक्ति बाधित नहीं करते। इसी तरह अपने लीवर का ध्यान रखते हुए समय पर भोजन करें और दो भोजन के बीच एक निश्चित अंतर रखें। एक साथ भरपेट खाना खाने की बजाय, दिन भर में 4 -5 बार थोड़ा-थोड़ा खाना खाएं।' हेल्थ एक्पर्ट्स के मुताबिक इस तरह लीवर को अपना काम सुचारु रूप से करने और खाना पचाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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