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Written By: Jitendra Gupta | Published : June 1, 2022 6:31 PM IST
सिर्फ इस आदत को बदलने से 35 फीसदी तक कम हो सकता है हार्ट अटैक का खतरा! कल से कर दें शुरू
मशहूर गायक के के (Bollywood singer KK) का निधन अचानक हुए हार्ट अटैक से हुआ, जिसकी वजह से उनके फैंस सदमे में हैं। के के ने अपनी आखिरी सांस 53 साल की उम्र में ली। बताया जा रहा है कि कोलकाता के नजरुल मंच में लाइव परफोर्मेंस देने के बाद केके को हार्ट अटैक हुआ, जिसमें उनकी जान चली गई।
हार्ट अटैक एक ऐसी स्वास्थ्य स्थिति है, जिसके ढेर सारे जोखिम कारक हैं, जिसमें शामिल हैं आपकी जीवनशैली, उम्र, पारिवारिक इतिहास और दूसरे पर्यावरणीय कारक, जिसमें प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन शामिल है।
ह्रदय रोग की बढ़ती चिंताओं के बीच के बहुत से लोग जीवनशैली में कुछ बदलाव कर इस बीमारी के बढ़ते खतरे को जरूरत कम कर सकते हैं, बशर्ते उन्हें अपनी अनहेल्दी आदतों से दूरी बनानी होगी। जीवनशैली में कुछ बदलाव करने के लिए सबसे पहले आपको बिना किसी देरी के एक्सरसाइज और शारीरिक रूप से एक्टिव रहने की जरूरत है। इस बदलाव की मदद से आप ह्रदय रोग के खतरे को जरूर कम कर सकते हैं।
ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन का कहना है कि शारीरिक रूप से सक्रिय रहने पर आप हार्ट और सर्कुलेटरी रोगों के खतरे को कम से कम 35 फीसदी तक कम कर सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ अगर कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से असक्रिय रहता है या फिर खराब जीवनशैली जी रहा है तो उसे हार्ट और सर्कुलेटरी रोग जैसे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतराकई गुना तक बढ़ जाता है।
न्यू यार्क स्थित डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ के मुताबिक, ऐसा अनुमान है कि करीब 35 फीसदी कोरोनरी हार्ट डिजीज से मरने वाले लोगों की सबसे बड़ी वजह यही है कि वे शारीरिक रूप से असक्रिय रहते थे। कुल-मिलाकर कहा जाए तो दुनियाभर में 60 फीसदी लोग शारीरिक रूप से असक्रिय रहते हैं। डिपार्टमेंट का कहना है कि कोरोनरी हार्ट डिजीज से अमेरिका में सालाना 7 लाख लोगों की जान जाती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि इसके अलावा ये भी कहा गया है कि वे लोग, जो अपर्याप्त रूप से भी सक्रिय रहते हैं उनमें शारीरिक रूप से सक्रिय रहने वाले लोगों की तुलना में हार्ट अटैक से मरने का खतरा 20 से 30 फीसदी तक बढ़ जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन द्वारा जारी हालिया अनुमान के मुताबिक, सप्ताह में 35-40 घंटे काम करने की तुलना में प्रति सप्ताह 55 या अधिक घंटे काम करने से स्ट्रोक का अनुमानित 35% अधिक जोखिम और इस्केमिक हृदय रोग से मरने का 17% अधिक जोखिम होता है।
ये नतीजे एंवायरमेंट इंटरनेशनल में प्रकाशित हुए हैं।