
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Updated : April 28, 2026 3:38 PM IST
Image credits by: healthy eating habits and risk of lung cancer in young age (This image was generated with chatgpt)
दुनिया का कोई भी डॉक्टर, डाइटीशियन या न्यूट्रिशनिस्ट आपको यह नहीं कहेगा कि आपको हेल्दी खाना नहीं खाना चाहिए या फिर हेल्दी खाना खाने से आप बीमार पड़ जाएंगे, क्योंकि यही सच है। हेल्दी डाइट हमें हेल्दी रखने के लिए ही होती है और उसका कोई नुकसान नहीं होता है। अमेरिकन एसोसिएशन फॉर कैंसर रिसर्च में प्रस्तुत की गई एक खास रिसर्च में कुछ चौंकाने वाले आंकड़े मिले, जिसमें कुछ लोगों पर की गई एक स्टडी में पाया गया कि जो लोग डाइट ज्यादा फल व सब्जियां खा रहे हैं, उनमें लंग कैंसर का खतरा ज्यादा बढ़ा है। Medical News Today ने अपने आर्टिकल में इस स्टडी के बारे में काफी महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। अगर आप भी हेल्दी डाइट फॉलो करते हैं और खूब फल व सब्जियां खाने पर ध्यान देते हैं, तो आपको डरने की जरूरत नहीं है और ये चीजें खाना बंद करने की जरूरत है। बल्कि आपको जरूरत है यह आर्टिकल पूरा पढ़ने की, ताकि आप स्टडी के दूसरे पन्ने को भी देख सके और लंग कैंसर जैसी समस्याओं से कैसे बचना है ये भी जान सकें।
यूनिवर्सिटी ऑफ साउथर्न कैलिफोर्निया के रिसर्चर ने एक रिसर्च की और उसमें पाया कि कम उम्र के लोग जो स्मोकिंग नहीं करते हैं और हेल्दी डाइट ले रहे हैं उनमें लंग कैंसर के मामले ज्यादा मिले हैं। खासतौर पर उन लोगों में जो डाइट में फल, सब्जियां और साबुत अनाज जैसी चीजों को शामिल कर रहे हैं। लेकिन यह रिसर्च सिर्फ इसी नतीजे पर खत्म नहीं हुई कि जो लोग फल और सब्जियां जैसी हेल्दी चीजें खाते हैं, तो उनमें लंग कैंसर का खतरा बढ़ जाता है जबकि रिसर्चर ने इसकी जड़ तक जाने का निर्णय किया।
healthy eating habits and risk of lung cancer (This Image was generated by Gemini)
आगे रिसर्च में यह पाया कि दिक्कत हेल्दी खाने या यानी फल, सब्जियां और साबुत अनाज में नहीं है बल्कि उनपर इस्तेमाल किए गए पेस्टिसाइड्स में हैं। खासतौर पर जो नॉन-ऑर्गेनिक फ्रूट्स और वेजिटेबल्स हैं, उनमें पेस्टिसाइड्स व अन्य केमिकलों का इस्तेमाल किया जाता है और वे केमिकल कुछ हद तक उनकी सतह पर रह जाते हैं।
रिसर्च के दौरान एक और चौंकाने वाला फैक्ट सामने आया और पाया गया कि यह खतरा पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में है। यानी अपनी डाइट में नियमित रूप से फल व सब्जियां शामिल करने वाले और स्मोकिंग न करने वाले पुरुषों व महिलाओं में, लंग कैंसर का मामले महिलाओं में ही पाए गए। जिसमें यह पाया गया कि जो महिलाएं ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स (Birth Control Pills) लेने से महिलाओं के शरीर में जो केमिकल बनते हैं और फलों व सब्जियों पर मौजूद केमिकल दोनों आपस मिलकर कैंसर रिस्क को और ज्यादा बढ़ा रहे हैं।
(और पढ़ें - क्या कॉन्ट्रासेप्टिव लेने से इनफर्टिलिटी का खतरा बढ़ता है)
washing thoroughly vegetable and fruits is safe (This Image was generated by chatgpt)
आपके मन में भी यही विचार आ रहा होगा कि अब तो लगता है फल और सब्जियां ही खाना बंद करना पड़ेगा। लेकिन ऐसा करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि दिक्कत फलों, सब्जियों का साबुत अनाज में नहीं है, बल्कि उनके ऊपर इस्तेमाल किए गए पेस्टिसाइड व अन्य केमिकल स्प्रे से है। ऐसे में आप क्या कर सकते हैं जानें -
हालांकि, इस रिसर्च को सिर्फ अमेरिकन एसोसिएशन फॉर कैंसर रिसर्च प्रस्तुत ही किया गया है और अभी तक कहीं भी आधिकारिक रूप से पब्लिश नहीं किया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि अभी भी इसपर रिसर्च चल रही हैं और अभी बहुत से फैक्ट्स की जानकारी करनी है। तब तक आप डरें नहीं बल्कि अपनी डाइट में पर्याप्त फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाएं, लेकिन धोकर।
अस्वीकरण: इस आर्टिकल का उद्देश्य सिर्फ रिसर्च में बताई गई जानकारी देना है और Thehealthsite.com इसमें से किसी भी जानकारी की जिम्मेदारी नहीं लेता है। अगर आपको स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी समस्या है, तो उसके बारे में अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।
फेफड़ों के कैंसर का पता लगातार खांसी (जो 3 सप्ताह से अधिक रहे), खून वाली खांसी, सांस फूलना, सीने में दर्द और बिना कारण वजन कम होने से चलता है। फेफड़ों के कैंसर का पता लगाने के लिए लो-डोज सीटी स्कैन (LDCT), छाती का एक्स-रे, बलगम की जांच (cytology) और बायोप्सी जैसे टेस्ट किए जाते हैं।
धूम्रपान के अलावा प्रदूषण, धुआं, केमिकल्स के सम्पर्क में आने से होने वाला डैमेज, कुछ पुरानी बीमारियों और अनुवांशिक कारणों से भी लोगों में लंग कैंसर हो सकता है।
हां, धूम्रपान किए बिना भी लंग कैंसर होना संभव है। पैसिव स्मोकिंग, वायु प्रदूषण, रेडॉन गैस, फैमिली हिस्ट्री या कार्यस्थल पर जहरीले पदार्थों का संपर्क भी फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकता है।
जी हां, अगर फेफड़ों के कैंसर को शुरुआती स्टेज में ही पहचान लिया जाए तो सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी की मदद से इसका इलाज संभव है।
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