Women's Health : 30 से अधिक है उम्र, तो सेहत के प्रति अलर्ट हो जाइए वरना हो सकती है कई समस्याएं

लाइफस्टाइल, डायट आदि पर ध्यान न दिया जाए, तो 30 की उम्र पार करते ही आप आसानी से कई शारीरिक समस्याओं की शिकार हो सकती हैं। जानें, महिलाओं में 30 वर्ष की उम्र के बाद होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में...

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Written By: Anshumala | Updated : January 3, 2020 3:59 PM IST

तीस की उम्र पार करते ही महिलाओं को डायट और फिटनेस रुटीन में बदलाव करने शुरू कर देना चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि ये बदलाव ही उम्र बढ़ने के बाद होने वाली शारीरिक समस्याओं (Health problems for women over 30) को कम कर सकते हैं। तीस वर्ष की उम्र से पहले जहां शरीर पूरी तरह से फिट और ऊर्जावान रहता है, वहीं 30 पार करते ही शरीर की चाल धीमी पड़ने लगती है। यदि लाइफस्टाइल, डायट आदि पर ध्यान न दिया जाए, तो उम्र के इस पड़ाव पर आप आसानी से कई शारीरिक समस्याओं की शिकार हो सकती हैं। कुछ गंभीर मामलों में आप मां बनने के सुख से भी वंचित रह सकती हैं। मदर्स लैप आईवीएफ सेंटर (दिल्ली) की मेडिकल डायरेक्टर एवं आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. शोभा गुप्ता ने उन गंभीर समस्याओं के बारे में बताया, जो महिलाओं में 30 वर्ष के उम्र के बाद होने की संभावना (Age related problem in women) बढ़ जाती है।

1फाइब्रॉइड की समस्या (Fibroids)

आजकल फाइब्रॉइड महिलाओं की सबसे आम समस्या बन गई है। यह आमतौर पर 30 से 50 वर्ष की उम्र वाली महिलाओं में विकसित (Health problems for women over 30) होता है। इससे ग्रस्त कुछ महिलाओं को अपने फाइब्रॉइड के बारे में पता ही नहीं होता है, जबकि कुछ फाइब्रॉइड को चिकित्सक के जरिए अंदरूनी परीक्षण से भी महसूस किया जा सकता है। इसकी पुष्टि अल्ट्रासाउंड या अन्य जांचों से की जा सकती है।

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2 इंफर्टिलिटी (Infertility in women)

महिलाओं में 30 की उम्र के आसपास प्रजनन क्षमता कम होने लगती है। 35 साल की उम्र के बाद, तो यह और अधिक तेजी से घटने लगती है। जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती जाती है, उसके गर्भवती होने की संभावना भी कम होने लगती है। प्रजनन अक्षमता (इन्फर्टिलिटी) उत्पन्न होने की संभावना बढ़ती जाती है। 35 वर्ष की उम्र के बाद इन्फर्टिलिटी, गर्भपात या शिशु में समस्याओं का सामना करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ती जाती है।

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3 डायबिटीज (Diabetes)

डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं में फैलोपियन ट्यूब के विकारग्रस्त होने और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) से ग्रस्त होने की आशंकाएं काफी बढ़ जाती हैं। फैलोपियन ट्यूब का विकारग्रस्त होना ज्यादातर महिलाओं में इन्फर्टिलिटी का एक प्रमुख कारण है। मधुमेह के कारण प्रेगनेंट महिला के भ्रूण पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। यह समस्या 30 की उम्र पार करने के बाद गंभीर रूप ले सकती है।

4 प्रीमेच्योर ओवेरियन फेलियर (Premature Ovarian failure)

भारत में 30 से 40 वर्ष की उम्र वाली महिलाओं (Age Related Diseases in women in hindi) में प्रीमेच्योर ओवेरियन फेलियर या पीओएफ (Premature Ovarian failure) के मामले 0.1 प्रतिशत है। हालांकि यह आंकड़ा देखने में कम लगता है, लेकिन 25 प्रतिशत महिलाएं अनियमित पीरियड्स या कई महीने तक पीरियड्स न होने के बाद फिर से होना, जिसे अमेनोरिया (Amenorrhea) कहते हैं, जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं। पीओएफ का मतलब है 40 की उम्र से पहले ओवरीज का सामान्य रूप से काम न करना यानी कि ओवरीज में नियमित रूप से अंडे का रिलीज न होना। इससे इन्फर्टिलिटी या बच्चा न होने की समस्या हो जाती है।

5 पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome)

महिलाओं में इन्फर्टिलिटी की समस्या का एक मुख्य कारण पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome) है। इसकी वजह से बनने वाले सिस्ट का समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह कैंसर का रूप ले सकता है। करीब दस फीसदी महिलाएं किशोरावस्था में ही पीसीओएस की समस्या से प्रभावित हो जाती हैं।

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