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Written By: Agencies | Updated : January 5, 2017 8:31 AM IST
Mosquito bites: These are very common, especially during monsoons or when you are out after sunset. Wash the area with water and apply honey which has antimicrobial and healing on it to reduce the itching and swelling caused. You can also apply aloe vera gel to soothe the itching.
मूल स्रोत: IANS Hindi
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जीका वायरस के फैलने की चेतावनी जारी किए जाने के एक दिन बाद भारत सरकार ने शुक्रवार को कहा कि कई देशों में जीका वायरस के प्रसार पर बराबर नजर रखी जा रही है।
सरकार ने कहा है कि देश में इस वायरस के संभावित प्रकोप से बचने के लिए कई कमद उठाए गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा, 'हम स्थिति पर बराबर नजर रखे हुए हैं और भारत में इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए कई जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।'
नड्डा ने शुक्रवार को कई देशों में अपने पैर पसार चुके जीका वायरस पर अपने मंत्रालय के अधिकारियों और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों के साथ बैठक की। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें देशों में जीका वायरस के प्रसार पर निगरानी रखने के लिए एक तकनीकी समूह के गठन का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही इस समूह को किसी भी गंभीर स्थिति में एहतियाती कदम सुझाने का कार्य भी सौंपा गया है।
जीका विषाणु का संक्रमण एडीज प्रजाति के मच्छरों के काटने से होता है, जो डेंगू फैलाने वाले मच्छरों की तरह जमा साफ पानी में पैदा होते हैं। डेंगू के मच्छर की तरह ही यह भी दिन में ही काटते हैं। इस वायरस की रोकथाम के लिए अभी कोई विशेष उपचार या टीका उपलब्ध नहीं है। इस वायरस की पहचान सबसे पहले 1947 में अफ्रीका में रहने वाले बंदरों में हुई थी। पिछले साल यह वायरस एक महामारी की तरह अमेरिका में फैला और अब ब्राजील में भी इसका प्रभाव दिखने लगा है।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, जीका विषाणु के संक्रमित व्यक्ति में हल्का बुखार, त्वचा पर चकत्ते और आंखों में जलन जैसी परेशानियां होती हैं।
महाजन ने आईएएनएस से कहा, 'अभी की चिंता के दो कारण हैं। पहला, 2015 में जब यह बीमारी सामने आई थी, तब से लेकर आज तक कई देश इसकी चपेट में हैं। दूसरा, अगर कोई गर्भवती इससे पीड़ित होती है तो जन्म लेने वाले बच्चे में जन्मजात दोष हो सकते हैं। '
महाजन के मुताबिक भारत में डेंगू ने जिस तरह पैर पसारा है, उसके रिकार्ड को देखते हुए कहा जा सकता है कि यहां मच्छर काफी तेजी से पैदा होते हैं और उन पर नियंत्रण काफी कठिन होता है। महाजन ने कहा, 'मच्छरों से पैदा होने वाली बीमारियां भीड़ और गंदगी वाले इलाकों में अधिक तेजी से फैलती हैं। यह हालात भारत में आम है। ऐसे में हम मच्छरों को पैदा होने से रोककर भी एक तरह से जीका विषाणु जैसे रोगजनकों पर लगाम लगा सकते हैं।'
बीएलके सुपर स्पेशिलिटी हास्पीटल के सीनियर कंसल्टेंट और एचओडी (पेडियाट्रिक एंड नियोनाटोलोजी डिपार्टमेंट) के डॉक्टर जेएस भसीन मानते हैं कि भले ही यह जीका विषाणु अभी भारत में नहीं है लेकिन अगर कोई पीड़ित भारत आ गया और उसका संक्रमण सक्रिय रहा तथा उसे किसी एडीज मच्छर ने काट लिया तो फिर वह मच्छर जितने लोगों को काटेगा, उसे यह बीमारी हो जाएगी। भसीन ने कहा, 'अगर ऐसा हुआ तो इसके भारत में तेजी से फैलने का खतरा है।'
डब्ल्यूएचओ की महानिदेशक मार्गरेट चान के मुताबिक हालात गम्भीर हैं क्योंकि इससे जुड़े कई सवाल अनसुलझे हैं और अस्थिरता और अज्ञानता का माहौल बना हुआ है। हमें जल्द ही इन सवालों के हल निकालने होंगे।
जीका विषाणु एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में यह मुख्य रूप से एडीज एजिप्टी से फैलता है। यही मच्छर डेंगू, चिकनगुनिया और पीत ज्वर के लिए जिम्मेदार होता है।
इसके निदान का पता लगाने के लिए पॉलिमेरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) और रक्त के नमूनों से विषाणु की जांच की जाती है तथा इसके रोकथाम के लिए वही उपाय सुझाए गए हैं, दो आमतौर पर मलेशिया, डेंगू और चिकनगुनिया से बचने के लिए सुझाए जाते रहे हैं।
चित्र स्रोत: Shutterstock