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Written By: Agencies | Updated : January 4, 2017 7:54 PM IST
मोबाइल फोन के बिना आज कोई भी जिंदगी की कल्पना नहीं कर सकता है। इससे जितना जिंदगी आसान बन जाता है उतना ही मुश्किल बन जाता है जिंदगी को सेहतमंद होकर जीना।
मौजूदा समय की सबसे बड़ी जरूरत मोबाइल फोन के बारे में शंका की अटकलें पूरी तरह निराधार नहीं हैं। जिस मोबाइल फोन के बिना आज लोगों की जिंदगी की कल्पना करना मुश्किल है, वही मोबाइल फोन कैंसर जैसी घातक बीमारी का कारण भी बन सकता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। शोध में पता चला है कि वायरलेस डिवाइस के रेडिएशन से उत्पन्न मेटाबॉलिक असंतुलन आपके स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। इससे कई न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियां और कैंसर तक का खतरा हो सकता है। इस असंतुलन को ऑक्सीडेटिव तनाव भी कह सकते हैं। शोधकर्ता इसे रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पेसीज (आरओएस) और एंटी-ऑक्सीडेंट के बीच असंतुलन कहते हैं। पढ़े- सोने के वक्त मोबाइल अपने तकिये के पास क्यों नहीं रखना चाहिए ?
शोधकर्ताओं ने बताया कि वायरलेस डिवाइस से निकलने वाले खतरनाक रेडिएशन को जीवित कोशिकाओं में ऑक्सीडेटिव क्षति के क्लासिकल मैकेनिज्म से पहचाना जा सकता है। यह शोध जर्नल इलेक्ट्रोमैग्नेटिक बॉयोलॉजी एण्ड मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। पढ़े- अपने स्मार्टफोन से पता लगाएं दूध ताज़ा है या नहीं!
नेशनल युनिवर्सिटी फॉर फूड के शोधकर्ता आइगर याकीमेंको ने कहा कि रेडियो फ्रिक्वेंसी रेडिएशन (आरएफआर) से होने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव से न सिर्फ कैंसर बल्कि सिरदर्द, थकान और त्वचा में जलनजैसी छोटी-मोटी बीमारियों का भी खतरा हो सकता है।
आइगर ने कहा, 'ये आंकड़े इस बात का साफ संकेत देते हैं कि इस तरह के रेडिएशन का मानव स्वास्थ्य पर कितना बुरा असर हो सकता है।' साल 2011 में कैंसर पर शोध करने वाली एक अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी ने भी कहा था कि आरएफआर मनुष्यों में कैंसर का संभावित कारण हो सकता है। आइगर और उनकी टीम ने मोबाइल फोन और वायरलेस इंटरनेट जैसे वायरलेस उपकरणों के इस्तेमाल में एहतियात बरतने की सलाह दी है।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty image
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