... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Agencies | Updated : January 5, 2017 8:33 AM IST
मूल स्रोत - IANS Hindi
हड्डी रोग से ग्रस्त (ऑर्थोपेडिक) मरीजों के लिए अपनी गतिविधियों के स्तर की निगरानी में डिजिटल फिटनेस यंत्र मददगार हैं। एक अध्ययन के बाद कहा गया है कि ये यंत्र दवाओं के इस्तेमाल, वजन, सोने के तरीके, पुनर्वास प्रक्रिया और व्यक्तिगत सेहत से जुड़े डाटा के जरिये मरीजों को उनके इलाज से जुड़े बेहतर परिणाम हासिल करने में समर्थ बनाते हैं।
न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के क्लाउडेट लाजाम ने अध्ययन रिपोर्ट में लिखा है, 'यदि हम लोगों को उनकी अपनी देखभाल में अधिक सक्रिय रखें और उन्हें बेहतर रूप पाने में मदद करें तो मरीज, डॉक्टर और स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था सबकी जीत होती है।' लाजाम इस अध्ययन रिपोर्ट के प्रमुख लेखक हैं। फ्लोरिडा स्थित ओर्लाडो में आयोजित अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन्स-2016 के वार्षिक सम्मेलन में यह अध्ययन रिपोर्ट पेश की गई। इसमें 28 लोकप्रिय स्वास्थ्य उपकरणों को समझना, उनकी कीमत, उन्हें लगाना, शरीर पर उन्हें लगाने की स्थिति और अन्य प्रासंगिक गुणों का विश्लेषण किया गया।
इनमें सबसे सामान्य फीचर मरीज ने कितनी दूरी तय की, यह बताने वाले पेडोमीटर का था। इसके अलावा दिल के धड़कनों की निगरानी करने वाले मॉनिटर थे। कितनी देर सोए और कैसे सोये और खाने में आपने कितनी कैलोरी ली यह बताने वाले यंत्र थे। इनके अलावा भी कई तरह के उपकरण थे।
लाजाम ने कहा कि फिटनेस यंत्रों से मिले डाटा का अस्थि रोगों के इलाज में कई स्तरों पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि मरीज इसकी इजाजत दें तो ये डाटा उनके चिकित्सक एवं स्वास्थ्य की देखभाल करने वाली टीम को एप के माध्यम से भेजे जा सकते हैं। ये एपल हेल्थकिट, गूगल फिट और माइक्रोसॉफ्ट हेल्थ वाल्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकार्ड सिस्टम के जरिये इंटरफेस होते हैं।
चित्र स्रोत - Shutterstock