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Written By: Agencies | Updated : January 5, 2017 8:38 AM IST
मूल स्रोत: IANS Hindi
अगर आपके शिशु को फ्लू, टौंसिल या सर्दी-खांसी जैसी आम बीमारी होती है तो आपको नजरअंदाज नहीं करनी चाहिए, इससे टाइप 1 डाइबिटीज़ होने का बढ़ता है खतरा।
नवजात के प्रथम छह महीने के दौरान श्वसन तंत्र में संक्रमण जैसे सर्दी-खांसी, फ्लू, टौंसिल, कफ वाली खांसी और नीमोनिया के होने से बच्चों में टाइप 1 मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। एक नए शोध से यह जानकारी मिली है। इस शोध के निष्कर्षो में कहा गया है कि बच्चों के शुरुआती छह महीने उसके शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली के विकास के लिए अहम होते हैं, जो टाइप 1 मधुमेह (टीआईडी) जैसे रोगों से लड़ता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, जिन बच्चों में जन्म से 2,9 महीने के दौरान श्वसन तंत्र में संक्रमण होता है, उनमें जन्म से लेकर तीन से पांच, नौ महीनों के बीच श्वसन तंत्र के शिकार बच्चों के मुकाबले टाइप 1 मधुमेह होने की संभावना अधिक होती है। इसी उम्र में अगर बच्चा किसी प्रकार के श्वसन तंत्र के संक्रमण से प्रभावित नहीं है तो उसके टाइप 1 मधुमेह होने की संभावना कम हो जाती है।
शोधकर्ताओं में से एक जर्मनी के हेल्महोल्ट्ज जेंट्रम मंचेन का कहना है, 'हमारे निष्कर्षो से पता चलता है कि बच्चों में जन्म के पहले छह महीनों में श्वसन तंत्र में संक्रमण से बच्चे में टाइप 1 मधुमेह विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।'
नवजात बच्चों में वयस्कों के मुकाबले श्वसन तंत्र के संक्रमण (जिनमें सर्दी-खांसी, फ्लू, टौंसिलाइटिस, कफ वाली सर्दी और नीमोनिया शामिल है) का खतरा अधिक होता है, क्योंकि उनका प्रतिरक्षण तंत्र विकसित नहीं होता है।
यह अध्ययन जेएएमए पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।
चित्र स्रोत: Shutterstock