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Written By: Agencies | Updated : January 5, 2017 8:21 AM IST
ग्रीन टी - वजन कमी करण्यासोबतच तुम्हांला फ़ीट ठेवण्यासाठी ग्रीन टी फायदेशीर ठरते. त्यातील अॅन्टीऑक्सिडंट घटक शरीरातील फॅट बर्न करण्यास मदत होते. परिणामी ब्लॉकेजेस निर्माण होण्याची शक्यता कमी होते.
ग्रीन टी के शौकीन संभल जाएं क्योंकि एक नए शोध के मुताबिक यह आपकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। आमतौर पर ग्रीन टी आम चाय की तुलना में स्वास्थ्य के लिए लाभदायक मानी जाती है लेकिन एक नए शोध से सामने आया है कि इसके लगातार सेवन से प्रजनन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कैलिफोर्निया-इरविन यूनिवर्सिटी के एक दल ने फ्रूट फ्लाइस (फल मक्खियों) पर किए गए परीक्षण में पाया कि ग्रीन टी की अत्यधिक खपत से उनका विकास और प्रजनन क्षमता प्रभावित हुई है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, 'ग्रीन टी की बढ़ती लोकप्रियता इसका सेवन करने वालों की संख्या को लगातार बढ़ा रही है जो कि गलत है। ग्रीन टी या फिर अन्य किसी प्राकृतिक उत्पाद का अत्यधिक सेवन सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।' पढ़े- ग्रीन टी पीने से हो सकते हैं ये 6 नुकसान
फार्मास्युटिकल साइंसेज के सह प्राध्यापक महताब जाफरी कहती हैं, 'ग्रीन टी के उचित सेवन से स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव होता है, वहीं इसका अत्यधिक सेवन शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।' उन्होंने बताया कि कोई ठोस निर्णय देने से पहले अभी हमें इस शोध पर काफी काम करना है लेकिन हमारा सुझाव है कि इसका कम मात्रा में सेवन करना चाहिए।
वैज्ञानिकों ने ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर फ्रूट फ्लाई पर ग्रीन टी के हानिकारक प्रभावों का परीक्षण किया है। उन्होंने देखा कि जिन मक्खियों के लार्वा और भ्रूण ग्रीन टी पॉलीफिनाल्स (एंटी ऑक्सीडेंट) की विभिन्न खुराकों के अधीन थे। उनकी संतानों में धीमी गति का विकास और अजीब से बदलाव देखे गए। जाफरी का मानना है कि ग्रीन टी की उच्च खुराक की वजह से कोशिकाएं मरने लगती हैं।
उन्होंने बताया, 'केमेलिया सिनेसिस से उत्पन्न ग्रीन टी पूरी दुनिया में अपने गुणों के लिए मशहूर है। लेकिन जब हमने इसका परीक्षण चूहों और कुत्तों पर किया, तो ग्रीन टी की अधिक मात्रा से उनका वजन कम हो गया और भ्रूण का विकास भी प्रभावित हुआ।'
'हम ग्रीन टी और अन्य प्राकृतिक उत्पादों की उचित मात्रा की जानकारी के लिए मक्खियों पर परीक्षण की तैयारी कर रहे हैं। इसके बाद हम मानवों के लिए इसकी सही और उचित खुराक को बताने में सक्षम हो जाएंगे।' यह अध्ययन 'फंक्शनल फूड्स' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
मूल स्रोत -IANS Hindi
चित्र स्रोत - Shutterstock
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