
... Read More
Written By: Mousumi Dutta | Updated : January 4, 2017 7:37 PM IST
आपण जगाचा, निसर्गाचा अनुभव डोळ्यांनी घेतो. पण आपली दृष्टीच कमकुवत किंवा नाहीशी झाली तर ? या विचाराने देखील आपण अस्वस्थ होतो पण मग आपल्या डोळ्यांच्या आरोग्याबाबत हलगर्जीपणा का करतो ? म्हणूनच डोळ्यांबाबतच्या या काही रंजक आणि महत्त्वपूर्ण गोष्टी जाणून घ्या
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि बच्चों के आँख में भी कैंसर होता है। हाल के एक अनुसंधान में यह पता चला है कि इस क्षेत्र में कार्यरत ब्रिटेन के एक गैर लाभकारी संगठन ने इस बात का खुलासा किया है कि स्मार्टफोन में लगे कैमरे से आंख के कैंसर का पता लगाया जा सकता है। आमतौर पर आंख का कैंसर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में होता है। चाइल्डहुड आई कैंसर ट्रस्ट (सीएचईसीटी) के मुताबिक, स्मार्टफोन के कैमरे के फ्लैश आसानी से रेटिनाब्लास्टोमा की पहचान कर सकते हैं। रेटिनाब्लास्टोमा एक तरह का नेत्र कैंसर है, जो आमतौर पर बच्चों में होता है।
इस बीमारी से आंखों के रेटिना में ट्यूमर की समस्या उत्पन्न हो जाती है। पत्रिका 'द वर्ज' के मुताबिक, स्मार्टफोन के इस्तेमाल से संस्थान की टीम ने ब्रिटेन की महिला एलिसा सोमर्स की चार महीने की बेटी आर्विन की जान बचाई। आर्विन रेटिनोब्लास्टिका से पीड़ित थी। सीएचईसीटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जॉय फेलगेट ने कहा, 'हमारी उम्मीद यह है कि हमारे शोध से कोई भी बच्चा इस बीमारी से पीड़ित नहीं होगा।'
इस बीमारी से पीड़ित बच्चे का फोटो खींचने पर उसकी आंख की पुतली के आसपास सफेद चमक दिखाई देती है। जब किसी बच्चे की आंख के भीतर ट्यूमर बढ़ता है तो फ्लैश फोटो में सफेद छाया के रूप में उसका प्रतिबिंब दिखाई देता है। इसकी जल्द पहचान कर बच्चे की दृष्टि, उसकी आंख और जिंदगी बचाई जा सकती है।
स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Getty image
हिन्दी के और आर्टिकल्स पढ़ने के लिए हमारा हिन्दी सेक्शन देखिए।लेटेस्ट अप्डेट्स के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो कीजिए।स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए न्यूजलेटर पर साइन-अप कीजिए।