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Written By: Agencies | Updated : January 5, 2017 8:32 AM IST
मूल स्रोत – IANS Hindi
एक्स-रे और सिटी स्कैन आधुनिक चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाली ऐसी तकनीक हैं जिसने चिकित्सा को काफी आसान बनाया है। इनकी मदद से बहुत कम वक्त में शरीर के अंदर की समस्या को समझा जा सकता है और फिर उपचार सही तरीके से किया जा सकता है। इन दिनों लगभग हर अस्पताल में ये चिकित्सीय सुविधाएं मौजूद है। लेकिन जहां हम इसके फायदों के बारे में जानते हैं वहीं साथ ही साथ लोगों के बीच यह आम धारणा बन गई है कि एक्स-रे व सीटी स्कैन कराने से कैंसर रोग हो सकता है, लेकिन यह धारणा सच्चाई से कोसों दूर है। हाल ही में हुए एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है।
अमेरिकी पत्रिका 'क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी' में प्रकाशित अध्ययन में कम मात्रा में विकिरण से कैंसर के खतरों के बारे में जानने के लिए वैज्ञानिकों ने लीनियर नो-थ्रेसहोल्ड (एलएनटी) मॉडल का इस्तेमाल किया।
अमेरिका के लोयोला यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के शोधकर्ता जेम्स वेल्स ने लिखा, ‘इस मॉडल के आधार पर जोखिम केवल सैद्धांतिक है और वास्तविक सच्चाई से इसका कोई लेना-देना नहीं है।’ यह मॉडल फिजिशियन को उपयुक्त इमेजिंग प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से रोकता है।इस मॉडल के मुताबिक, विकिरण की कितनी भी कम मात्रा शरीर के लिए हानिकारक है, जबकि मानव शरीर में कई प्रकार की अनुकूलता होती है और कम मात्रा में विकिरण से हुई क्षति का यह खुद मरम्मत कर लेता है।
लेखक ने कहा कि एलएनटी मॉडल बेकार है और फिजिशियन अगर इसके अनुसार काम करे, तो रोगी का इलाज होना नामुमकिन है।
चित्र स्रोत - Shutterstock