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Written By: Agencies | Updated : January 5, 2017 8:29 AM IST
मूल स्रोत -IANS Hindi
महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज़ या रजोनिवृत्ति का समय आते ही कई तरह की शारीरिक समस्याएं बनने लगती है। मेंनोपॉज होते ही किसी को डाइबीटिज़ खतरा हो जाता है तो कोई डिप्प्रेशन में चला जाता है। किसी का मूड स्विंग बहुत होता है और तो किसी को पहले से ज्यादा गर्मी लगने लगती है। लेकिन हाल के एक अनुसंधान से ये पता चला है कि जिन महिलाओं में रजनोवृत्ति देर से होती है, उन महिलाओं को भविष्य में अवसाद ग्रसित होने का खतरा कम होता है। एक नए शोध में यह बात सामने आई है। अध्ययन में पाया गया है, जिन महिलाओं को 40 साल या उससे अधिक उम्र में रजनोवृत्ति होती है, उनकी तुलना में समय से पहले रजनोवृत्ति के दौर से गुजरने वाली महिलाओं को अवसाद का खतरा अधिक होता है। इसलिए देर से मेनोपॉज़ होने पर चिंता न करके खुशी मनाने का अवसर होता है।पढ़े- मेनोपॉज़ के बाद क्या डाइबिटीज़ होने का खतरा बढ़ जाता है?
रजनोवृत्ति में विलंब या लंबा प्रजनन काल का अर्थ अधिक समय तक एंडोजीनस और सेक्स हॉर्मोन एस्ट्रोजन का सक्रिय रहना है। शोधार्थी कहते हैं, 'यह अध्ययन बताता है कि एंडोजीनस और सेक्स हॉर्मोन एस्ट्रोजन का अधिक समय तक सक्रिय रहना सुरक्षित है।'
यूनिवर्सिटी ऑफ एथेंस के शोधाविज्ञानी एलिनी पेट्रीडाउ के अनुसार, 'निष्कर्ष बताते हैं कि यह एक महत्वपूर्ण नैदानिक प्रभाव है, जो यह बताता है कि अवसाद के उच्चतम खतरे से गुजर रही महिलाओं को मनोचिकित्सक की देखरेख में एस्ट्रोजन आधारित थेरेपी से काफी लाभ मिलता है।' यह अध्ययन पत्रिका 'जेएएमए (जामा) साइकियाट्री' में प्रकाशित किया गया है।
चित्र स्रोत - Shutterstock