कहीं आप तो नहीं कर रहे अर्थराइटिस का ऐसा उपचार?

जानिये अर्थराइटिस में किस तरीका का उपचार नहीं करना चाहिए।

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Written By: Agencies | Updated : January 5, 2017 8:36 AM IST

स्रोत - IANS हिंदी

अगर आप अर्थराइटिस यानी गठिया का उपचार मछली का तेल या विटामिन डी से कर रहे हैं, तो ये जानकारी आपके लिए है। ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने चिकित्सीय परीक्षण में मछली के तेल और विटामिन डी को ऑस्टियोआर्थराइटिस यानी गठिया के उपचार को कारगर नहीं माना है। समाचार एंजेसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, यूनिवर्सिटी ऑफ तस्मेनिया मेन्जीस के शोध दल ने देखा है कि विटामिन डी और मछली का तेल व्यापक रूप से घुटने के मुलायम अस्थि की क्षति और सूजन को कम करते हैं, लेकिन इसका अस्थि-संधि शोथ यानी ऑस्टियोआर्थराइटिस पर कोई अलग प्रभाव नहीं पाया गया है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस 60 साल से अधिक उम्र के 10 प्रतिशत पुरुषों और 13 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करता है। ज्वाइंट-रिप्लेसमेंट सर्जरी और दर्द की सामान्य दवाओं के अलावा इस पुरानी बीमारी का कोई इलाज नहीं है। इस शोध के लिए ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञों ने 413 रोगियों को दो भागों में विभाजित कर दिया था, जिसमें एक समूह को विटामिन डी और दूसरे समूह को प्लेसबो की चिकित्सा दी गई।  दो सालों के परीक्षण के बाद विशेषज्ञों ने देखा कि दोनों ही समूह के रोगियों के घुटनों में प्रत्यक्ष रूप से अंतर नहीं मिला।

इस अध्ययन के मुख्य लेखक डिंग चंघाई ने गुरुवार को बताया, ‘यह आंकड़े बताते हैं कि विटामिन डी अनुपूरक को ऑस्टियोआर्थराइटिस रोग को कम करने या रोग में होने वाले दर्द को घटाने के बहुत ही कम सबूत हैं।’ उन्होंने कहा, ‘ऑस्टियोआर्थराइटिस रोग पर विटामिन डी के प्रभावों के आकलन के तहत यह शोध विश्व में सबसे बड़ा शोध है।’

यह शोध पत्रिका जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (जेएएमए) में प्रकाशित किया गया है।

चित्र स्रोत - Shutterstock


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