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Written By: Agencies | Updated : January 5, 2017 8:43 AM IST
सर्दी के दिनों में बच्चों को निमोनिया होने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। क्योंकि निमोनिया विशेषकर सही तरह से बच्चों की देखभाल न करने और बाहरी संक्रमण के फैलने के कारण होता है। इसलिए देश में निमोनिया से मरने वाले बच्चों की संख्या को अगर कम करना है तो सबसे पहले लोगों को इस बारे में जागरूक होने की ज़रूरत है।
जिस देश में 4.30 करोड़ लोग निमोनिया से पीड़ित हैं, वहां पर इसकी रोकथाम और जांच के बारे में, खास कर सर्दियों में जागरूकता फैलाना बेहद आवश्यक है। इसका एक कारण यह भी है कि आम फ्लू, छाती के संक्रमण और लागातार खासी के लक्षण इससे मेल खाते हैं। आईएमए के नवनिर्वाचित अध्यक्ष एवं एचसीएफआई के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, 'छोटे बच्चे, नवजातों और प्रीमेच्योर बच्चे, जिनकी उम्र 24 से 59 महीने है और फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हैं, हवा नली तंग है, कमजोर पौष्टिकता और रोगप्रतिरोधक प्रणाली वाले बच्चों को निमोनिया होने का ज्यादा खतरा होता है। अस्वस्थ व गंदा वातावरण, कुपोषण और स्तनपान की कमी की वजह से निमोनिया से पीड़ित बच्चों की मौत हो सकती है। इस बारे में लोगों को जागरूक करना बेहद आवश्यक है। कई बच्चों की जान बचाई जा सकती है और यह चिकित्सकों का फर्ज है कि वे नई माओं को अपने बच्चों को स्वस्थ रखने एवं सही समय पर टीके लगवाने के प्रति शिक्षित करें।'
अग्रवाल ने कहा, 'निमोनिया कई तरीकों से फैल सकता है। वायरस और बैक्टीरिया अक्सर बच्चों के नाक या गले में पाए जाते हैं और अगर वे सांस से अंदर चले जाएं तो फेफड़ों में जा सकते हैं। वह खांसी या छींक की बूंदों से हवा नली के जरिए भी फैल सकते हैं। इसके साथ ही जन्म के समय या उसके तुरंत बाद रक्त के जरिए भी यह फैल सकता है।'
डॉ. अग्रवाल के अनुसार निमोनिया से बचने के लिए इन बातों पर ध्यान देने की सबसे ज्यादा ज़रूरी है, क्योंकि निमोनिया के बैक्टीरिया का इलाज एंटीबायटिक से हो सकता है, लेकिन केवल एक-तिहाई बच्चों को ही एंटीबायटिक्स मिल पा रहे हैं। इसलिए इन चीजों पर ध्यान देने की ज़रूरत है-
डब्ल्यूएचओ की हालिया रपट के मुताबिक, स्ट्रेप्टोकोक्स निमोनिया पांच साल से छोटी उम्र के बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने व मृत्यु होने का प्रमुख कारण है। डब्लयूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक पांच साल से छोटी उम्र के 1,20,000 बच्चों की मौत निमोनिया की वजह से होती है और भारत में हर एक मिनट पर एक बच्चे की निमोनिया की वजह से मौत हो जाती है। इसलिए सचेत रहकर ही इस मौत के संख्या को कम किया जा सकता है।
मूल स्रोत: IANS Hindi
चित्र स्रोत: Shutterstock