... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:38 AM IST
Read this in English
अनुवादक: Anoop Singh
आज यह खबर काफी सुर्ख़ियों में है कि हरियाणा में 72 साल की एक उम्रदराज औरत ने एक बच्चे को जन्म दिया है। रिपोर्ट के अनुसार माता पिता दोनों ने हरियाणा स्थित नेशनल फर्टिलिटी एंड टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर से आइवीएफ तकनीक की मदद ली है। माँ दलजिंदर कौर और पिता मोहिंदर सिंह गिल के घर में 46 साल बाद यह बच्चा पैदा हुआ है। लगभग 2 सालों के आईवीएफ ट्रीटमेंट के बाद दलजिंदर कौर ने इस बच्चे को 19 अप्रैल 2016 को जन्म दिया है। रिपोर्ट के अनुसार इस ट्रीटमेंट में माता और पिता दोनों के अंडाणु और शुक्राणु का इस्तेमाल किया गया है। इस बारे में हमने आईवीएफ क्लिनिक के संचालक डॉ. अनुराग बिश्नोई से बात करने की कई कोशिशें की लेकिन उन्होंने हमारे किसी भी फोन कॉल का उत्तर नहीं दिया।
आईवीएफ ट्रीटमेंट में प्रयोगशाला में स्पर्म और अंडाणु को एक साथ गर्भाशय जैसा माहौल बनाकर रखा जाता है और फिर निषेचन के बाद इसे अगले 9 महीने तक विकसित होने के लिए माँ के गर्भ में डाल दिया जाता है। आज के समय में शुक्राणु और अंडाणु पेरेंट्स के भी हो सकते हैं और आप इन्हें किसी डोनर से भी ले सकते हैं। इस मामले में महिला की उम्र 70 साल है और सामान्य तौर पर 45 साल की उम्र के बाद महिलाओं में मेनोपॉज हो जाता है। अब सवाल यह उठता है कि 70 साल की उम्र में उनमें अंडे कैसे बन सकते हैं? क्या उन्हें अभी तक मेनोपॉज नहीं हुआ? इतनी उम्र में युटेरस ठीक से काम भी नहीं करता है फिर वह गर्भ को कैसे संभाल पायेगा?
इन सारे सवालों के जवाब के लिए हमने मुंबई की आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. अनिरुद्ध मालपानी से बात की और उन्हें पूछा की यह कैसे संभव है? उन्होंने बताया की यह बिल्कुल असंभव है और यह खबर पूरी तरह झूठी है। पूरी दुनिया में सिर्फ 1% महिलायें ही 45 साल से अधिक उम्र में बच्चे पैदा कर पाती हैं वहीँ 50 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में यह आंकड़ा जीरो है। उनका यह भी कहना है कि जो लोग स्टेम सेल्स और गर्भाशय को फिर से एक्टिव करने की झूठी बाते कर रहे हैं वे सिर्फ हमारे देश के आईवीएफ स्पेशलिस्ट की नकारात्मक छवि पेश कर रहे हैं।
इन सारी झूठी ख़बरों का सबसे बुरा असर यह होता है की देश की सरकार यह सोचने लगती है की हमारे देश के आईवीएफ स्पेशलिस्ट सही नहीं हैं और उन पर अभी भी नियंत्रण की ज़रूरत है। इन्ही वजहों से सरकार ‘असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी बिल’ पास करने की सोच रही है जिससे 45 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को बच्चे पैदा करने से रोका जा सकेगा। डॉ. मालपानी बताते हैं की सरकार द्वारा 45 साल की उम्र निर्धारित कर देने से सबसे बड़ा यह नुकसान है कि वे महिलायें जिनमे 46 साल की उम्र में आईवीएफ तकनीक द्वारा बच्चे पैदा करने की कुछ संभावनाएं हैं उन्हें भी रोक दिया जायेगा। इसके अलावा वह यह भी कहते हैं की जब एक पुरुष को 45 साल के बाद बच्चे पैदा करने की अनुमति है तो महिला को इसके लिए मना करना सरासर गलत है।
इन सारी बातों को समझकर इन सबसे बचने का सबसे अच्छा तरीका है की आप इन ख़बरों को मसालेदार न्यूज़ समझकर उनपर ज्यादा ध्यान ही न दें। अगर आप नेशनल फर्टिलिटी एंड टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर की वेबसाइट पर आईवीएफ ट्रीटमेंट कराने वालों का आंकड़ा देखें तो आप चौंक जायेंगे, यह वेबसाइट यह दावा करती है कि उसने 60 और 70 साल के उम्र के कई जोड़ों के बच्चों को जन्म दिलवाया है। अभी भी यह एक रहस्य है की उससे जुड़े कोई भी डॉक्टर जवाब देने के लिए तैयार क्यों नहीं है? जाहिर तौर पर इस क्लिनिक को चलाने वाले डॉ गयावंती बिश्नोई, डॉ. अनुराग और डॉ. अमन बिश्नोई को काफी सवालों के जवाब देने पड़ेंगे।
डॉ. मलपानी कहते हैं की ऐसी झूठी अफवाहें फैलाने वाले लोगों के खिलाफ सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए और लोगों से भी यह गुजारिश है की वे इन अफवाहों के चक्कर में न पड़ें और झूठे दावे करने वाले डॉक्टरों से बचें। आइये देखते हैं डॉ. मालपानी से हमारी बातचीत का वीडियो :
चित्र स्रोत: Shutterstock