नवरात्र में दिल और टाइप-2 डाइबिटीज़ मरीजों के लिए व्रत रखने के 7 एक्सपर्ट टिप्स

क्या टाइप-1 डाइबिटीज़ के मरीजों के लिए व्रत करना सेफ है?

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Written By: Agencies | Updated : January 5, 2017 8:42 AM IST

नवरात्र के दिनों में व्रत रखने की परंपरा तो सभी निभाना चाहते हैं लेकिन ये आपके सेहत के लिए कितना सेफ है सबसे पहले इस बात का ध्यान रखना ज़रूरी होता है। लेेकिन इसके लिए ज़रूरी होता है कि ये जानना कि उपवास करने के पहले और बाद में क्या खाना चाहिए?  वैसे तो व्रत कहे या उपवास इससे शरीर को बहुत तरह से फायदा मिलता है। इसके लिए ज़रूरी है कि जो लोग अपने हार्ट डिज़ीज, डाइबिटीज़. प्रेगनेंट और हाई ब्लड प्रेशर के पेशेन्ट होते हैं वे ज़रूरी एहतियात बरतें। ऐसे मरीजों में दिन में केवल एक बार भोजन करना समस्याएं पैदा कर सकती हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) मनोनीत अध्यक्ष डॉ के.के.अग्रवाल ने बताया, 'अगर पोषण की उचित गुणवत्ता शरीर को मिलती रहे, तो व्रत रखने से शरीर पर बेहद सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। जिन मरीजों को दिल की समस्या हैं, उन्हें आलू के पकौड़े और आलू के प्रोसैस्ड चिप्स जैसी तली हुई चीजें नहीं खानी चाहिए। मधुमेह के मरीजों को उसी वक्त अपना व्रत खोल देना चाहिए जब उनके रक्त शर्करा का स्तर 60 एमजी से नीचे चला जाए। उन्हें दिन में काफी मात्रा में तरल आहार भी लेते रहना चाहिए, क्योंकि शरीर में डिहाइड्रेशन होने से लकवा या दिल का दौरा पड़ सकता है।' साथ ही इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि नवरात्र के दिनों में डायरिया और फूड पॉयजनिंग से बचने के लिए क्या-क्या करना सही होता है।

उन्होंने कहा कि टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में व्रत रखने से खतरा कम होता है, लेकिन टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों को व्रत बिल्कुल नहीं रखना चाहिए। लंबी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को व्रत रखते समय डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए, क्योंकि नियमित तौर पर चल रही दवाओं की खुराक व्रत की वजह से 40 से 50 प्रतिशत तक कम करने की जरूरत हो सकती है। यहां तक इस बात की भी सही जानकारी होनी चाहिए कि नवरात्र में उपवास करने पर डायट प्लान क्या होना चाहिए ताकि बीमार न पड़े।

कुछ सेहतमंद सुझाव :-

-सादा दही की बजाए लौकी का रायता खाएं।

-बीच में बादाम खाए जा सकते हैं।

-कुटृटू के आटे की रोटी कद्दू के साथ खाएं।

-थोड़ी थोड़ी देर बाद उचित मात्रा में फल खाते रहें ताकि शरीर में पोषक तत्व बने रहें।

-सिंघाड़े और कट्टू का आटा मिला कर पकाएं।

-सिंघाड़ा अनाज नहीं बल्कि फल है, इसलिए इसे अनाज की जगह प्रयोग किया जा सकता है।

-सिंघाड़े के आटे में ग्लूटन नहीं होता इसलिए सीलियक बीमारी से पीड़ित या ग्लूटन से एलर्जी वाले मरीज इसका प्रयोग कर सकते हैं।

स्रोत: IANS Hindi

चित्र स्रोत: Shutterstock

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