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Written By: Agencies | Updated : January 5, 2017 8:30 AM IST
मूल स्रोत: IANS Hindi
आम तौर पर गर्भवती मां के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का सीधा प्रभाव गर्भस्थ शिशु पर पड़ता है लेकिन हाल के एक अनुसंधान से ये पता चला है कि पिता के अवसादग्रस्त रहने का प्रभाव आने वाला संतान मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।
मां के अवसाद और बच्चे के स्वास्थ्य में संबंध की बात लंबे समय से की जाती रही है। अब एक नए अध्ययन में पाया गया है कि पिता के अवसाद का भी होने वाली संतान के स्वास्थ्य पर असर होता है। अध्ययन के मुताबिक, पिता के अवसाद के कारण गर्भ में पल रहे शिशु का जन्म कई बार समय से पहले हो जाता है। यानी पिता के अवसादग्रस्त रहने से भी समय पूर्व प्रसव का जोखिम बना रहता है।
स्वीडन की 'सेंटर फॉर हेल्थ इक्विटी स्टडीज' की डॉक्टर एंडर्स जर्न ने बताया, 'हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि अवसाद से पीड़ित माता-पिता दोनों को ही संतान के अपरिपक्व जन्म के लिए जिम्मेदार माना जाना चाहिए और उनकी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की जांच होनी चाहिए।'
पिता के द्वारा पड़ने वाले प्रभावों के बारे में जर्न ने बताया, 'साथी का अवसाद गर्भवती महिला के लिए अवसादग्रस्त होने की सबसे बड़ी वजह होती है, जिसके द्वारा संतान में समय से पहले जन्म लेने का खतरा बढ़ता है।'
जर्न कहती हैं, 'पिता के अवसादग्रस्त रहने से शुक्राणु की गुणवत्ता प्रभावित होती है। अवसादग्रस्त पिता के द्वारा संतान के डीएनए पर एपिजेनेटिक प्रभाव पड़ता है और उसका गर्भनाल का क्रियान्वयन भी बाधित होता है। हालांकि इलाज के द्वारा इस समस्या से निदान पाया जा सकता है।'
अध्ययन के नतीजे पत्रिका 'बीजेओजी' में प्रकाशित हुए हैं।
चित्र स्रोत: Shutterstock