... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Agencies | Updated : January 5, 2017 8:31 AM IST
A lot of hormonal changes take place in teenagers which makes them susceptible to mood swings and behavioural changes. And a healthy diet plays an important role in maintaining that hormonal balance. Because junk food lack those essential nutrients, the likelihood of teenagers to suffer from depression is increased by 58 percent.
मूल स्रोत: IANS Hindi
क्या आपको पता है डिप्रेशन कम करने वाली दवाएं भी बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इसके सेवन से उनकी प्रवृत्ति आक्रामक हो सकती है या उनमें आत्महत्या करने की भी इच्छा पनप सकती है। हाल के एक रिसर्च के दौरान ये पता चला कि डिप्रेस्थ युवा या बच्चों को एन्टीडिप्रेसेन्ट दवा देने के जगह पर एक्सरसाइज़ करवाना या साइकोथेरेपी करवाना ज्यादा सेफ रहता है। इसलिए अवसादग्रस्त होने से अच्छा है खुद ही इस स्थिति से बाहर निकालने की कोशिश करें। इसलिए खुश रहे और तनावमुक्त रहने की कोशिश करें। इससे आप कुछ हद तक डिप्रेशन को अपने से दूर रख पायेंगे।
अवसादरोधी दवाएं बच्चों और किशोरों को आक्रामक बना सकती हैं, यहां तक कि उनमें आत्महत्या की प्रवृत्ति भी पनप सकती है। एक शोध में यह चेतावनी दी गई है। डेनमार्क के शोधकर्ताओं के मुताबिक, अवसादरोधी दवाओं से बच्चों और किशोरों में आक्रामकता और आत्महत्या की प्रवृत्ति का खतरा दुगना हो जाता है।
हालांकि उन्हें अवसादरोधी दवाओं और आक्रामकता व अवसाद में कोई सीधा संबंध नहीं मिला। इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए शोधदल ने 18,526 मरीजों की जांच की। जांच के दौरान उन्हें अवसादरोधी दवाएं दी गई थीं।
यह शोध बीएमजे नाम के जर्नल में प्रकाशित किया गया है। इसमें सिफारिश की गई है कि बच्चों, किशोरों और नवयुवकों को कम से कम अवसादरोधी दवाएं देनी चाहिए, क्योंकि इससे उन्हें गंभीर हानि पहुंच सकती है। इसलिए अवसाद का इलाज दवाओं के जरिए करने की बजाय वैकल्पिक इलाज जैसे व्यायाम और साइकोथेरेपी पर जोर देना चाहिए।
मूल स्रोत: Shutterstock