अल्जाइमर से बचने के लिए तेज़ चलें!

दौड़ने की आदत हर उम्र के लिए है ज़रूरी।

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Written By: Agencies | Updated : January 5, 2017 8:21 AM IST

उम्र के बढ़ते ही यादाश्त पर इसका प्रभाव पड़ने लगता है। लोग हर रोज कुछ न कुछ भूलने लगते हैं और अपने इस भूलने की आदत को कोसने लगते हैं। लेकिन अपने रोज के आदत में थोड़ा-सा सुधार आपको अल्जाइमर जैसे रोग के खतरे को कम कर सकता है।

बुढ़ापे में आप जितना तेज चलेंगे, आपका स्वास्थ्य उतना ही अच्छा रहेगा। एक शोध में यह बात सामने आई है कि जो बुजर्ग तेज गति से चलते हैं, उन्हें अल्जाइमर रोग होने का खतरा काफी कम रहता है। अल्जाइमर एक तरह की भूलने वाली बीमारी है, जो सामान्यत बुजुर्गो में देखी जाती है। कई कारणों से मस्तिष्क में जहरीले बीटा-एमिलॉयड प्रोटीन (एक प्रकार का अघुलनशील प्रोटीन) बढ़ने लगता है, जिसके बाद अल्जाइमर रोग होता है। अगर बुजुर्ग उचित खानपान और व्यायाम करते हैं तो उनमें यह रोग होने की आशंका काफी कम होती है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि धीमी गति से चलने से मस्तिष्क में पुटामेन जैसे कई महत्वपूर्ण हिस्सों में एमिलॉयड बनने लगता है, जो स्मरण-शक्ति को प्रभावित करता है। शोधार्थियों ने तेज चलने वालों और धीमे चलने वालों का तुलनात्मक अध्ययन किया। इसके बाद उनमें एमिलॉयड के बनने की मात्रा का आकलन किया। वैज्ञानिकों ने पाया कि चलने की गति एमिलॉयड स्तर के लिए 9 प्रतिशत तक जिम्मेदार है।

वैज्ञानिकों ने जब इसका आकलन उम्र, शिक्षा स्तर व याददाश्त कमजोर होने की समस्याओं के आधार पर किया, तब एमिलॉयड के स्तर और चलने की गति के बीच संबंध की अवधारण में को बदलाव नहीं पाया। पढ़े-  ग्रीन टी पीने से अल्जाइमर के खतरे को कम किया जा सकता है

फ्रांस की तुलूज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक नटालिया डेल कैंपो ने बताया, 'यह संभव है कि धीमी गति से चलने से याददाश्त संबंधी कई तरह की समस्याएं आएं और अल्जाइमर भी हो सकता है।' अध्ययन में औसत 76 वर्ष उम्र के 128 लोगों को शमिल किया गया था। इनमें से किसी को भी डेमेन्शिया (मनोभ्रंश) की शिकायत नहीं थी, लेकिन कुछ मानसिक परेशानियों की वजह से इनमें यह रोग होने की आशंका थी।

इनमें से 48 मरीजों में एमिलॉयड के स्तर डेमेन्शिया रोग से संबंधित थे। डेल कैंपो ने बताया कि बुजुर्गो में हालांकि धीमी गति से चलने के कई अन्य कारण भी होते हैं। पढ़े-  धीमी आंच में खाना पकायें और अल्जाइमर से दूर रहें

शोध की रिपोर्ट ऑनलाइन पत्रिका 'न्यूरोलॉजी-ए' में प्रकाशित की गई है।

मूल स्रोत -IANS Hindi 

चित्र स्रोत - Shutterstock


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