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डेंगू के अलावा इन 5 स्थितियों के कारण भी हो सकती है प्लेटलेट्स की कमी, जानें और नजरअंदाज ना करें

प्लेटलेट्स की कमी (platelet count decreased) क्यों होती है? दरअसल, ये ज्यादा ब्लीडिंग होने की वजह से और इंफेक्शन के कारण भी हो सकता है।

डेंगू के अलावा इन 5 स्थितियों के कारण भी हो सकती है प्लेटलेट्स की कमी, जानें और नजरअंदाज ना करें

Written by Pallavi |Published : November 5, 2022 1:18 PM IST

डेंगू में अक्सर प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है। दरअसल, ये खून के थक्के कम होने की वजह से हो सकता है। एक स्वस्थ व्यक्ति के अंदर 150 हजार से 450 हजार प्रति माइक्रोलीट प्लेटलेट काउंट होता है, लेकिन जब ये इससे नीचे चला जाता तो शरीर में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है। लेकिन, हर किसी को लगता है कि प्लेटलेट काउंट सिर्फ डेंगू में कम होता है पर कुछ ऐसी बीमारियां भी हैं जिसमें प्लेटलेट्स की कमी हो सकती है। आइए, जानते हैं उन स्वास्थ्य स्थितियों के बारे में या उन बीमारियों के कारण जिसमें शरीर में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है।

1. एनीमिया-Anemia

एनीमिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें प्लेटलेट्स की कमी हो सकती है। अप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic anemia) तब होता है जब आपका बोन मेरा पर्याप्त लाल और सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स नहीं बनाता है। यह स्थिति आपको थका हुआ महसूस करा सकती है, संक्रमण का खतरा बढ़ा सकती है, और आपको आसानी से चोट लग सकती है या खून बह सकता है। ऐसे में अगर आपके शरीर में प्लेटलेट्स की कमी हो तो डॉक्टर को दिखाएं।

2. हेपेटाइटिस सी वायरस-Hepatitis C Viral

हेपेटाइटिस सी वायरस, लिवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस बाद में हाइपरस्प्लेनिज्म यानी एक प्रकार के प्लेटलेट्स की कमी का कारण बन सकता है। ये थ्रोम्बोपोइटिन और एंडोथेलियल डिसफंक्शन का कारण भी बनता है जो सभी थ्रोम्बोसाइटोपेनिया कारण बन सकता है। जिसमें कि शरीर में प्लेटेस की कमी होती है।

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3. कैंसर के कारण -Cancer

कैंसर की बीमारी खास कर कि ब्लड कैंसर और ल्यूकेमिया में प्लेटलेट्स की कमी होने लगती है। ल्यूकेमिया में व्हाइट ब्लड सेल्स बनना बंद हो जाते हैं और डीएनए को क्षति पहुंचने लगती है। इसमें कैंसर की कोशिकाएं अस्थि मज्जा यानी बोन मेरो में बढ़ने लगती है और हेल्दी ब्लड सेल्स को सामान्य रूप से बढ़ने और काम करने से रोकती हैं। इसके शुरुआत में ही शरीर में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है।

4. हीमोलाइटिक यूरीमिक सिंड्रोम-Hemolytic uremic syndrome

हीमोलाइटिक यूरीमिक सिंड्रोम यह रेयर डिजीज है। इस बीमीरी में प्लेटलेट्स में तेज गिरावट आती है और रेड ब्लड सेल्स के विकास को नुकसान होता है। साथ ही ये रेड ब्लड सेल्स को रह-रह कर नुकसान करती है। इस रोग वाले लोगों में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है, जिसे पहचानना कई बार मुश्किल हो जाता है।

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5. इम्यून थ्रोम्बोसाइटोपेनिया-Immune thrombocytopenia

म्यून थ्रोम्बोसाइटोपेनिया, एक प्रकार का ऑटोइम्यून रोग, जैसे ल्यूपस और रुमेटीइड गठिया। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से प्लेटलेट्स पर हमला करती है और नष्ट कर देती है। ये रोग जिन लोगों को होता है, बचपन से होता है और ये समय के साथ बढ़ने लगता है।

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