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ज्यादातर लोग सफर करते हुए मोबाइल फोन पर चैट करते हैं, घर में खाना खाते हुए टीवी देखते हैं और ऐसे ही कई अन्य काम साथ-साथ करते हैं। जिसके कारण मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट आई है। © Shutterstock.
अगर आपको लगता है कि आप मल्टीटास्कर हैं और मल्टीटास्किंग ने आपकी दुनिया को बेहतर किया है, तो एक बार दोबारा ठहर कर सोचिए। हाल ही में मल्टीटास्किंग करने वालों पर जो शोध हुए हैं, उनके निष्कर्ष बहुत चौंकाने वाले हैं। इसका सेहत और रिश्तों दोनों पर ही नकारात्मक असर देखने में आया है।
बढ़ रही है आदत
जब हम किसी को एक साथ कई काम करते देखते हैं तो हम भी उससे इतने ज्यादा प्रेरित होते हैं कि हम भी वैसा ही करना चाहते हैं। हमें लगता है कि एक ही समय में कई काम करके वह व्यक्ति अपनी जिंदगी और स्थिति को औरों से बेहतर कर पा रहा है, तो हमें भी ऐसा ही करना चाहिए। अब यह आदत इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि लोगों की जीवनशैली में शामिल हो गई है। ज्यादातर लोग सफर करते हुए मोबाइल फोन पर चैट करते हैं, घर में खाना खाते हुए टीवी देखते हैं और ऐसे ही कई अन्य काम साथ-साथ करते हैं। जिसके कारण मानसिक स्वास्थ्य में गिरावट आई है।
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ये हैं मल्टीटास्किंग के दुष्प्रभाव
मानसिक क्षमताओं में कमी - हाल ही में हुए एक शोध में यह परिणाम सामने आए कि जो लोग मल्टीमीडिया का इस्तेमाल करते हुए मल्टीटास्किंग करते हैं उनके दिमाग़ में धीरे-धीरे ग्रे मैटर कम होता जाता है। जिसकी वजह से बौद्धिक नियंत्रण क्षमता, भावनाओं पर पकड़ और इच्छा-शक्ति कम होने लगती है।
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भूलने की आदत - 2016 में हुए एक अध्ययन से यह बात सामने आई कि क्रॉनिक मीडिया मल्टीटास्कर्स की वर्किंग मेमरी यानी किसी काम के दौरान संबंधित जानकारियों को याद रखने की क्षमता और लॉन्ग-टर्म मेमरी यानी घटनाओं, जानकारियों को लंबे समय तक याद रखने की क्षमता कमज़ोर होती जाती है। यह स्थ्िाति अगर लगातार बनी रहे तो मल्टीटास्किंग करने वालों की मनःस्थिति भ्रमित होने लगती है। इतनी ज्यादा कि वे ज़रूरी और गैर ज़रूरी काम में ही अंतर कर पाने में फ़ेल होने लगते हैं। एक काम करते-करते दूसरे की ओर पलट जाने, भूलने, ग़लतियां करने का स्तर भी असामान्य रूप से बढ़ जाता है।
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रिश्तों में कड़वाहट – सोशल मीडिया पर चैट करते हुए लगता है कि आप अपनों के कितना करीब आ गए हैं, पर सच्चाई इसके उलट है। पर इस संबंध में हुई रिसर्च बताती है कि स्मार्टफ़ोन से संबंध सुधरने के बजाय बिगड़ रहे हैं। अनुसंधान की भाषा में इस समस्या को टेक्नोफेरेंस नाम दिया गया है, जिसका आशय उन दंपत्तियों से है जिनके रिश्ते में टेक्नोलॉजी के कारण दीवार खड़ी हो गई हो।