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Brain Tumour : कैंसर काफी ज्यादा घातक बीमारी मानी जाती है, इसलिए जब भी कैंसर का नाम सुनते हैं तो लोग अक्सर चौंक जाते हैं। कैंसर शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित करता है, जिसमें ब्रेन भी शामिल है। ब्रेन कैंसर होने की स्थिति में मस्तिष्क की कोशिकाओं की अनियमित रूप से वृद्धि होने लगती है। हालांकि, अगर समय पर मस्तिष्क कैंसर की पहचान की जाए, तो इसका इलाज संभव हो सकता है। डॉ. अमितधाकोजी, हेडऑफडिपार्टमेंटएवंकंसल्टैंट - न्यूरोसर्जन, मणिपालहॉस्पिटल, बाणेर, पुणे का कहना है कि ब्रेन कैंसर के 75 प्रतिशत मामले प्राथमिक कैंसर के होते हैं, जिसमें कैंसर ब्रेन के अंदर ही उत्पन्न होता है। वहीं, 25 प्रतिशत मामलों सेकेंड्री कैंसर होते हैं, जिसमें शरीर के अन्य हिस्सों से मस्तिष्क में कैंसर फैलता है।
डॉक्टर का कहना है कि ब्रेन ट्यूमर के 40 प्रतिशत मामलों में ब्रेन में ग्लियल सेल, ग्लियोमास से उत्पन्नघातक कोशिका वृद्धि होती है। ग्लियोब्लास्टोमास, एस्ट्रोसाईटोमास, एपेंडिमोमास, ओलिगोडेंड्रोग्लियोमास और मेडुलोब्लास्टोमास ग्लियोमास के उदाहरण है। सबसे ज्यादा पाई जाने वाले सेकेंड्री घातक कोशिका वृद्धि वो होती हैं, जो स्किन (मेलानोमा), फेफड़े, किडनी, ब्रेस्ट और कोलोन के ट्यूमर से मेटास्टेसिस द्वारा फैलती हैं।
प्राथमिक ब्रेन ट्यूमर किसी को भी प्रभावित कर सकता है, लेकिन यह मध्यम आयु वर्ग के लोगों और 15 साल से कम उम्र के बच्चों में इस कैंसर के होने की संभावना अधिक होती है। बुजुर्गों में सेकेंड्री ब्रेन ट्यूमर अधिक आम है। ब्रेन के कैंसर से बचना संभव है। ज्यादातर प्राथमिक ब्रेन ट्यूमर का इलाज समय पर शुरू किया जाए, तो इसका इलाज काफी हद तक किया जा सकता है।
डॉक्टर का कहना है कि ब्रेन कैंसर के सबसे आम लक्षण सिरदर्द और अटैक आना है। मरीजों को सिरदर्द की परेशानी सुबह के वक्त सबसे ज्यादा होती है, जिसकी वजह से उनकी नींद टूट जाती है।
वहीं, अगर मरीजों को खांसी और छींक ज्यादा आती है, जो स्थिति ज्यादा बिगड़ जाती है। मरीजों को सिरदर्द ट्यूमर के बढ़ने और सिर की हड्डी पर काफी ज्यादा प्रेशर पड़ने की वजह से होता है। इसके अलावा कुछ लक्षण निम्न हैं, जैसे-
हालांकि, ध्यान रखें कि ब्रेन कैंसर के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि ट्यूमर किस जगह स्थित है।
डॉक्टर का कहना है कि ब्रेन कैंसर का इलाज किस प्रकार होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज को ब्रेन के किस हिस्से पर ट्यूमर है।
सर्जरी : प्राथमिक ब्रेन ट्यूमर के इलाज का सबसे बेहतर तरीका सर्जरी माना जाता है, जिसमें ट्यूमर को काटकर बाहर निकाला जाना है। सर्जरी में ट्यूमर की पहचान करके उसे बाहर निकाला जाता है, ताकि सिर के अंदर दबाव को कम करने में मदद मिलती है।
रेडिएशन : ऑन्कोलॉजिस्ट द्वारा रेडिएशन थेरेपी के माध्यम से ट्यूमर का इलाज किया जाता है। यह आमतौर पर ब्रेन कैंसर के सर्जरी के बाद शुरू होती है, जिसे सर्जरी द्वारा पूरी तरह से नहीं निकाला जा सकता है। हालांकि, ध्यान रखें कि प्राथमिक ब्रेन कैंसर का इलाज हमेशा कीमोथेरेपी से नहीं की जाती है। कई स्थितियों में दवाओं और सर्जरी के माध्याम से प्राथमिक ब्रेन कैंसर का इलाज पूरी तरह से किया जा सकता है। इसके अलावा डॉक्टर ब्रेन में होने वाली सूजन को कम करने के लिए एंटीइंफ्लेमेटरीस्टेरॉयड भी दे सकते हैं।
क्रेनियोटोमी : कई बार डॉक्टर ब्रेन ट्यूमर का इलाज क्रेनियोटोमी जी टेक्नीक से कर सकते हैं। इसमें सिर का वह हिस्सा हटाया जाता है, जिसमें कैंसर होता है।
एंडोस्कोपिक सर्जरी : सर्जरी की इस टेक्नीक में डॉक्टर घातक कोशिकाओं में छोटा सा चीरा लगाते हैं और कैमरे की मदद से उसे हटाने की कोशिश करते हैं।
मिनिमली इन्वेज़िव तकनीक : कुछ विशेष स्थितियों में मिनिमली इन्वेज़िव टेक्नीक का प्रयोग होता है। क्योंकि इसके बाद मरीजों को स्वास्थ्य लाभ बहुत तेजी से होता है और मस्तिष्क में आस-पास के टिश्यू को कम नुकसान पहुंचता है।
ध्यान रखें कि सिरदर्द जैसे मामूली से लक्षण भी ब्रेन कैंसर के हो सकते हैं। ऐसे में इसे इग्नोर करने की गलती न करें। अगर आपको अपने शरीर में किसी भी तरह का बदलाव दिख रहा है, तो फौरन अपने हेल्थ एक्सपर्ट की मदद लें।