Head injury : सिर की मामूली चोट भी हो सकती है घातक, न करें लापरवाही

क्‍या कभी आपने यह सोचा है कि किसी के सिर से सिर टकराने पर भी तनाव और बेचैनी बढ़ सकती है। सिर में लगने वाली चोटों पर अभी हाल ही में हुए शोध में इस बात का खुलासा हुआ है।

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Written By: Yogita Yadav | Published : July 25, 2019 8:56 PM IST

सिर की मामूली चोट (Head injury ) भी बहुत घातक हो सकती है। इससे न केवल हमारी संघूने की क्षमता पर असर पड़ता है, बल्कि कई बार यह मानसिक तनाव, गुस्‍सा और अवसाद के स्‍तर को भी बढ़ा देती है। ये चोटे किसी से सिर टकराने (Head injury )या बर्फ में फि‍सलने जितनी मामूली भी हो सकती हैं। जिन्‍हें लोग अकसर इग्‍नोर कर देते हैं।

क्‍या कहता है शोध (Head injury )

हाल ही एक रिसर्च में पता चला है कि सिर की वे मामूली चोटें (Head injury ) जिन्‍हें हम अकसर नजरंदाज कर देती हैं, वह भी सेहत पर बहुत ज्‍यादा प्रभाव डालती हैं। इनमें सेंसेस से लेकर ब्रेन हेल्‍थ भी शामिल है। ब्रेन इंजरी नामक पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में स्‍पष्‍ट किया गया है कि बर्फ पर फि‍सलने या किसी से सिर टकराना भी उतना ही घातक हो सकता है, जितना बिना हेलमेट के टू व्‍हीलर से गिरना। इससे तनाव, एंग्‍जाइटी और सूंघने की क्षमता कम होने की समस्‍या हो सकती है।

न करें इग्‍नोर (Head injury )

इस शोध के निदेशक कनाडा के मॉन्ट्रियल यूनिवर्सिटी के लेखक फैनी लेकायर जीगर ने कहा, 'बहुत से लोगों को लाइफ में कभी न कभी सिर में हल्की चोट (Head injury ) लगती ही है और उनके सूंघने की शक्ति कम हो गई है। पर हमें इसे अकसर इग्‍नोर कर जाते हैं। डॉक्‍टर भी इस बारे में ज्‍यादा नहीं पूछते। पर हमें इसके बारे में अपने डॉक्टर को बताना चाहिए।’

इस तरह किया गया शोध (Head injury )

इस रिसर्च के लिए शोधकर्ताओं ने 20 हॉस्पिटल के मरीजों की तुलना की, जिनको हलकी चोटें (Head injury) लगी थीं। इन में 22 मरीज ऐसे थे जिनके अंग टूट गए थे, लेकिन उनके सिर में चोट नहीं आई थी। सभी मरीजों को गुलाब, लहसुन, लौंग की सिंथेटिक खुशबू की पहचान करने को कहा गया था।

एक साल बाद रही यह प्रगति 

एक साल बाद फिर से सभी मरीजों को फॉलोअप क्वेस्चनायर भेजा गया। शोधकर्ताओं ने इन दोनों समूहों के मरीजों के चोट लगने के दिन और 12 महीने बाद सामने आए परिणामों की तुलना की। इसमें शोधकर्ताओं ने पाया कि ज्यादातर मरीजों की सूंघने की शक्ति ऐक्सिडेंट के छह महीने के भीतर ही वापस आ गई थी। हालांकि उनमें से कई लोगों में बेचैनी की समस्या देखने को मिली। शोधकर्ताओं ने कहा कि लगभग 65 प्रतिशत मरीजों ने इस तरह के लक्षणों के बारे में बताया।

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