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Written By: Anshumala | Updated : July 27, 2021 12:42 PM IST
क्या होता है सिर और गर्दन का कैंसर और इसके लक्षण, कारण जानें यहां....
आज (27 जुलाई) 'हेड एंड नेक कैंसर डे 2021' (Head and Neck Cancer Day 2021) है। सिर और गर्दन का कैंसर आमतौर पर स्क्वैमस कोशिकाओं (Squamous cells) में शुरू होता है, जो सिर और गर्दन की भीतरी नम एवं म्युकोसल सतह में पाई जाती हैं, जैसे मुंह, नाक और गले के भीतर की तरफ। सिर और गर्दन में पाए जाने वाले इस प्रकार के कैंसर को स्क्वैमस सैल कैंसर भी (Squamous cell cancer) कहते हैं। इस तरह का कैंसर लार ग्रंथियों यानी सैलाइवरी ग्लैंड्स में भी शुरू हो सकता है, लेकिन आमतौर पर ऐसे मामले कम देखे जाते हैं। क्या होता है सिर और गर्दन का कैंसर (What is Head and Neck Cancer) और इसके लक्षण, कारण इस पर विस्तार से जानकारी दे रहे हैं इन्द्रप्रस्थ अपोलो हाॅस्पिटल्स (नई दिल्ली) के सीनियर कंसलटेंट, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डाॅ. प्रवीण गर्ग...
सैलाइवरी ग्लैंड्स में कई तरह की कोशिकाएं होती हैं, जो कैंसर कोशिकाओं में बदल सकती हैं। इस तरह सैलाइवरी ग्लैंड्स का कैंसर भी कई तरह का होता है। 50 की उम्र के बाद सिर और गर्दन के कैंसर के मामले महिलाओं की तुलना में पुरुषों में दोगुना पाए जाते हैं। आमतौर पर इस प्रकार के कैंसर का मुख्य कारण होता है तम्बाकू और शराब का सेवन। सिर और गर्दन के कैंसर के आम लक्षण हैं- निगलने में परेशानी, आवाज में बदलाव, गले में घाव, गर्दन में गांठ, मुंह में घाव जो ठीक न हो रहा हो।
1. शराब और तंबाकू का सेवन करना (धुंए रहित तंबाकू, कभी-कभी तंबाकू चबाने और सूंघने) सिर और गर्दन के कैंसर का मुख्य कारण हैं। सिर और गर्दन के कैंसर के 75 फीसदी मामलों का कारण तंबाकू और शराब का सेवन ही होता है। वे लोग जो तंबाकू और शराब दोनों का सेवन करते हैं, उनमें कैंसर की संभावना और अधिक बढ़ जाती है। हालांकि, तंबाकू और शराब लार ग्रंथियों के कैंसर का कारण नहीं होते।
2. तंबाकू का सेवन दो तरीकों से किया जाता है या तो तंबाकू चबाना जैसे मसाला, गुटका, खैनी आदि या धूम्रपान जैसे सिगरेट और बीड़ी आदि। तंबाकू में मौजूद निकोटीन के कारण इसकी लत लग जाती है और इसमें कैंसर पैदा करने वाले 300 कार्सिनोजन होते हैं। भारत में बड़ी संख्या में लोग तंबाकू चबाते हैं, जो सिर और गर्दन के कैंसर का मुुख्य कारण है।
धुएं रहित तंबाकू में एरोमेटिक बीटल की पत्तियां और नट्स होते हैं। व्यक्ति लम्बे समय तक इन्हें मुंह में रखकर चबाता रहता है। जब ये पत्तियां लगातार लम्बे समय तक चबाई जाती हैं, तो मुंह में निकोटीन रिलीज होने लगता है, जिससे लार बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। आमतौर पर व्यक्ति इसे थूकता है। धूम्रपान के दौरान निकोटीन फेफड़ों में जाकर अन्य अंगों को नुकसान पहुंचाता है, जबकि चबाने से यह मुंह में ही रहता है। मुंह में टार्टर बनने से मसूड़े खराब होने लगते हैं और मुंह में लार बनने की प्रक्रिया पर भी बुरा असर पड़ता है।
3. चबाने वाले तंबाकू में कैंसर पैदा करने वाले 28 रसायन होते हैं, जिन्हें कार्सिनोजन कहा जाता है। तंबाकू चबाने से कैंसर पैदा करने वाला मुख्य कारक है टोबैको-एक्सप्लिसिट नाईट्रोसेमिनेस (टीएसएनए)। चबाने वाले तंबाकू में कुछ अन्य कारक भी पाए जाते हैं जैसे फाॅर्मेल्डीहाईड, एसिटेल्डिहाईड, आर्सेनिक, बेंजोपायरीन, निकल और कैडमियम। बहुत से लोगों को यह गलत लगता है कि फरमेंटेड की बजाए स्नस तंबाकू चबाने का सुरक्षित तरीका है, जिसे नॉर्वे या स्वीडन में उगाया जाता है। उनका कहना है कि इसमें कम मात्रा में नाइट्रोसेमिनेस होते हैं। किंतु वास्तव में स्नस में कैंसर कारक रसायन पाए जाते हैं। जरूरी नहीं अमेरिका में निर्मित स्नस उसी तरह से प्रसंस्कृत (processed) किया जाए, जिस तरह इसे नॉर्वे या स्वीडन में प्रसंस्कृत किया जाता है।
शोधकर्ता और चिकित्सक निरंतर उन कारकों पर शोध कर रहे हैं, जो कैंसर के कारण हैं, साथ ही इसकी रोकथाम के उपायों पर भी अनुसंधान किए जा रहे हैं। हालांकि, कैंसर से बचने का कोई प्रमाणित तरीका नहीं है, किंतु इसके जोखिम को कम किया जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मुंह और ग्रसनी (pharynx) के कई रोगों से बचा जा सकता है।
इलाज के लिए सर्जरी और इसके बाद रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी का उपयोग किया जाता है। कुछ ऐहतियात बरत कर कैंसर से बचाव संभव है। इसके लिए तम्बाकू का सेवन और धूम्रपान न करें। ऐसे अन्य कारकों पर भी नियंत्रण करें, जो कैंसर का कारण हो सकते हैं।
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