चेहरे पर बाल आना और सिर से इसका जाना, कहीं इस बीमारी की शिकार तो नहीं हो रही हैं आप

करीब 10 फीसदी महिलाएं किशोरावस्था में ही पीसीओएस की समस्या से प्रभावित होती हैं।

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Written By: Anshumala | Updated : June 18, 2018 6:08 PM IST

महिलाओं में बांझपन की समस्या का एक मुख्य कारण पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम होता है, जिसकी वजह से बनने वाले सिस्ट का समय रहते इलाज न किया जाए तो यह एक कैंसर का रूप ले सकता है। मां द्वारा अपनी बेटी को किशोरावस्था (टीनएज) में दी हुई कुछ हिदायतें उसे बांझपन (Infertility) के सबसे बड़े कारण पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) के खतरे से बचा सकती है। मैक्स हॉस्पिटल की गायनकोलॉजिस्ट व आईवीएफ विशेषज्ञ डॉक्टर श्वेता गोस्वामी का कहना है कि करीब 10 फीसदी महिलाएं किशोरावस्था में ही पीसीओएस की समस्या से प्रभावित होती हैं। उन्होंने बताया कि आमतौर पर यह समस्या महिलाओं को प्रजनन की उम्र से लेकर रजोनिवृत्ति (Menopause) तक प्रभावित करती है। महिलाओं और पुरुषों दोनों के शरीर में प्रजनन संबंधी हार्मोन बनते हैं। एंड्रोजेंस हार्मोन पुरुषों के शरीर में भी बनते हैं लेकिन पीसीओएस की समस्या से ग्रस्त महिलाओं के अंडाशय में हार्मोन सामान्य से अधिक बनते हैं। इसकी वजह से अंडाणु सिस्ट या गांठ में तब्दील हो जाता है। कई बार यह कैंसर का रूप भी ले लेता है, जो खतरनाक हो सकता है।

गर्भ धारण करने में आती है परेशानी

डॉ. गोस्वामी ने बताया कि ये सिस्ट छोटी-छोटी थैलीनुमा रचनाएं होती हैं, जिनमें तरल पदार्थ भरा होता है। अंडाशय में ये सिस्ट एकत्र होते रहते हैं और इनका आकार भी बढ़ता जाता है। यह स्थिति पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम कहलाती है। उन्होंने कहा कि इस समस्या की वजह से महिलाएं गर्भ धारण नहीं कर पातीं हैं।

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पीसीओएस के लक्षण

इस समस्या के उन महिलाओं में होने की संभावना अधिक होती है जिन्हें असामान्य मासिक धर्म हो या मासिक धर्म बिल्कुल न हो। चेहरे, ब्रेस्ट, पेट, पीठ, अंगूठे, उंगलियों में बाल आना, तैलीय त्वचा, मुंहासे, सिर के बाल तेजी से झड़ना आदि पीसीओएस के लक्षण हैं। उन्होंने बताया कि पीसीओएस के कारण अंडोसर्ग, ओवेल्यूशन में भी बाधा आती हैं। इससे वजन बढ़ने लगता है। यदि पीसीओएस का शुरुआत में पता न चल पाए और इलाज न हो तो बांझपन की समस्या के साथ-साथ महिला को मधुमेह टाइप 2 और अत्यधिक कोलेस्ट्रॉल की शिकायत भी हो जाती है। सिस्ट लंबे समय तक अंडाशय में रहे तो कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। पीसीओएस के इलाज के लिए कई दवाएं हैं। ऑपरेशन से भी सिस्ट निकाल कर बाहर किया जा सकता है लेकिन अगर संयंमित जीवनशैली अपनाई जाए तो इस समस्या से बहुत हद तक छुटकारा मिल सकता है।

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मोटापा है तो सावधान

ज्यादा वसा युक्त भोजन, व्यायाम की कमी और जंक फूड खाने से तेजी से वजन बढ़ता है। अत्यधिक चर्बी से एस्ट्रोजन हार्मोन की मात्रा में बढ़ोतरी होती है जो ओवरी में सिस्ट बनाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। ऐसे में वजन घटाने से इस बीमारी को बहुत हद तक काबू में किया जा सकता है। इसके साथ ही जो महिलाएं बीमारी होने के बावजूद अपना वजन घटा लेती हैं, उनकी ओवरीज में वापस से अंडे बनना शुरू हो जाते हैं। जीवनशैली में सुधार करने से इस तरह की बीमारी के खतरों को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।

निम्न लक्षण हों तो सतर्क हो जाएं

शरीर व चेहरे पर अत्यधिक बालों का बढ़ना जिसे हिरस्यूटिज्म (Hirsutism) कहते हैं।

यौन इच्छा में अचानक कमी आना।

युवावस्था या प्रजनन की उम्र के दौरान अनियमित मासिक धर्म का होना।

त्वचा संबंधी रोगों का सामने आना जैसे अचानक भूरे रंग के धब्बों का उभरना या बहुत ज्यादा मुंहासों का होना।

शादीशुदा महिलाओं में बांझपन या गर्भ न ठहर पाना।

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इन बातो का रखें ख्याल

मोटापे को न बढ़ने दें। यह पीसीओएस बीमारी के होने की मुख्य वजह है।

रोजाना व्यायाम करें।

अत्यधिक तैलीय, मीठे और वसा युक्त भोजन न खाएं।

तनाव रहित जीवन जिएं।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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