रिसर्च में पाया कुछ बीमारियों का पता लगाने में AI है डॉक्टर से बेहतर: हार्वर्ड यूनिवर्सिटी

हाल ही हुई एक रिसर्च में पाया गया कि एआई कुछ बीमारियों का पता लगाने में डॉक्टरों से भी बेहतर तरीके से काम करते हैं। इस लेख में हम हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की इस रिसर्च के बारे में पढ़ेंगे और जानेंगे कि किस तरह से एआई कुछ बीमरियों को का पता लगाने में इतना एडवांस हो गया है।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : May 10, 2026 10:29 AM IST

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने के बाद से ही 'क्या आने वाले समय में डॉक्टरों की भूमिका बदल जाएगी?' जैसे सवाल उठते रहे हैं। मगर हाल ही में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के द्वारा किए गए एक नए शोध ने इस बहस को और भी ज्यादा तेज कर दिया है। यह शोध इमरजेंसी ट्राइएज जैसे- हाई-प्रेशर मेडिकल हालात पर किया गया, जिसमें पाया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन हालातों में भी मानव डॉक्टरों से अधिक सटीक और तेज निदान कर सकता है। शोध के सामने आते ही इसे न केवल चिकित्सा क्षेत्र में, बल्कि पूरे हेल्थकेयर व्यवस्था के भविष्य के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।

आपातकालीन मामलों में बेहतर सटीकता

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च के लिए वैज्ञानिकों ने सैकड़ों मामलों का विश्लेषण किया, जहां एआई सिस्टम और डॉक्टरों को समान मरीज का डेटा दिया गया। परिणामों में एआई ने मानव डॉक्टरों के मुकाबले कई स्थितियों में बेहतर प्रदर्शन किया, खासकर तब जब सीमित जानकारी के आधार पर निर्णय लेना था। शोध में एआई ने 67% मामलों में सही या लगभग सही निदान योग्य सुझाव दिया, जबकि डॉक्टरों की सटीकता 50% से 55% के बीच ही रही। इसे देखते हुए वैज्ञानिकों ने कहा है कि भविष्य में तेज निर्णय वाली स्थितियों में एआई अधिक प्रभावी हो सकता है।

अधिक जानकारी मिलने पर और बेहतर प्रदर्शन

शोध में एक तरफ जहां, एआई को कम डाटा दिया गया तो उसकी सटीकता 67% रही तो वही जब एआई को अधिक विस्तृत मरीज का डेटा दिया गया, तो इसकी सटीकता 82% तक पहुंच गई। हालांकि विशेषज्ञ डॉक्टरों ने इसे 70%–79% के बीच ही बताया। वैसे तो यह अंतर बहुत निर्णायक नहीं था, लेकिन एआई की क्षमता स्पष्ट दिखी, जिसे नजरअंदाज करना संभव नहीं है। इससे साफ संकेत मिलता है कि जब एआई को विस्तरित डाटा दिया जाएगा तो वह गंभीर परिस्थिति में भी मरीज का सही इलाज करने में सक्षम हो सकेगा।

ट्रीटमेंट प्लान बनाने में भी आगे

वहीं, जब एआई से एंटीबायोटिक दवाओं के प्रयोगों या जीवन के अंतिम समय की प्रक्रियाओं की योजना बनाने जैसी बड़ी प्रक्रिया और उपचार योजनाओं के बारे में पूछा गया, तो इसने मानव डॉक्टरों के एक बड़े समूह से काफी बेहतर प्रदर्शन किया। इसके लिए वैज्ञानिकों ने एआई और 46 डॉक्टरों को पांच क्लिनिकल मामलों का अध्ययन करने के लिए कहा गया, लेकिन एआई ने काफी बेहतर योजनाएं बनाईं, जिसमें उसे 89% अंक मिले। वहीं, पारंपरिक तरीकों से काम करने वाले डॉक्टरों का स्कोर काफी कम केवल 34% था।

लेकिन कुछ सीमाएं भी हैं

हालांकि एआई केवल टेक्स्ट आधारित डेटा पर निर्भर था और वैज्ञानिकों ने माना कि मरीज की वास्तविक हालत, दर्द का स्तर या शारीरिक संकेतों को समझने की क्षमता इसमें नहीं थी। इसलिए उनका कहना है कि इमरजेंसी डॉक्टरों के लिए स्थिति पूरी तरह से खराब भी नहीं हुई है। असल में इस शोध में केवल टेक्स्ट किए जा सकने वाले रोगी के डेटा को ही शामिल किया गया था। इसमें रोगी की परेशानी का स्तर और उसकी शारीरिक बनावट जैसे संकेतों को समझने की एआई की क्षमता का परीक्षण नहीं किया गया था। यानी की अभी भी एआई कागजी कार्रवाई के आधार पर दूसरी राय देने वाले चिकित्सक की तरह काम करने में सक्षम नहीं है और इसलिए ही वास्तविक क्लिनिकल स्थिति में डॉक्टरों की भूमिका अभी भी जरूरी है।

भविष्य में सहयोगी जरूर है

वैज्ञानिकों का मानना है कि एआई डॉक्टरों की जगह नहीं लेगा, बल्कि डॉक्टर+मरीज+ एआई का नया मॉडल विकसित करेंगे। वहीं, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में एआई लैब के प्रमुख और इस शोध के प्रमुख लेखकों में से एक अर्जुन मनराई ने कहा, "मेरा मानना है कि इन निष्कर्षों को देखते हुए यह कहना सही है कि एआई डॉक्टरों की जगह ले लेगा। मेरा मानना है कि हम मेडिकल क्षेत्र में भविष्य में बहुत बड़ा बदलाव देखेंगे, जो चिकित्सा को नया रूप देगा। इसका एक कारण कानूनी जिम्मेदारी और एआई त्रुटियों को लेकर अभी स्पष्ट नियमों की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य से जुड़ी सही जानकारी देना है और इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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