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कोरोना महामारी के दौरान मुंबई में स्वाइन फ्लू (H-1 N-1 Swine flu) के मामले सामने आने के बाद लोगों में इस बीमारी के प्रति दहशत फैल गई है। यह बीमारी इतनी तेजी से फैलती है कि इससे घबराना स्वाभाविक है। पर स्वाइन फ्लू (H-1 N-1 Swine flu) से घबराने की बजाए जरूरत है इससे बचाव की। किसी भी संक्रामक बीमारी की तरह स्वाइन फ्लू में भी उपचार से बचाव बेहतर है। इसके अलावा कुछ ऐसी घरेलू औषधियां भी हैं जिन्हें आजमा कर इस खतरनाक बीमारी से बचा जा सकता है।
स्वाइन फ्लू (H-1 N-1 Swine flu) एक तीव्र संक्रामक रोग है। यह एक खास तरह के एंफ्लुएंजा वायरस (एच-1 एन-1) के द्वारा होता है। सबसे पहले यह सुअरों में पाया गया। इसलिए इसे एच 1 एन 1 स्वाइन फ्लू कहा जाता है। इससे संक्रमित व्यक्ति में साधारण सर्दी-जुकाम जैसे ही लक्षण नजर आते हैं। इसका वायरस रोगी के खांसने, छींकने और सांस लेने से फैलता है। यह इतना तेज होता है कि व्यक्ति खांसते या छींकते समय जब मुंह पर हाथ लगाता है, और वही हाथ जब अन्य वस्तुओं पर रखता है, तो वह वस्तु भी संक्रमित हो जाती है।
भारत में लगभग हर जगह पाई जाने वाली यह औषधीय बेल स्वाइन फ्लू (H-1 N-1 Swine flu) से बचाव में बहुत कारगर है। इसका काढ़ा बनाकर पीने से स्वाइन फ्लू से बचा जा सकता है।
कपूर को भी स्वाइन फ्लू से बचाव का अच्छा विकल्प माना जाता है। स्वाइन फ्लू के मौसम में लोग इसे रुमाल में बांध लेते हैं और सूंघते हैं। कई बार कपूर के पाउडर को पानी के साथ लेने से भी लाभ मिलता है। पर इसका इस्तेमाल महीने में सिर्फ एक या दो बार ही करना चाहिए।
लहसुन को एंटी-वयरल गुणों से भरपूर माना जाता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा होता है। वायरल संक्रमण के मौसम में हर रोज सुबह खाली पेट लहसुन की दो कलिया गुनगुने पानी के साथ लेनी चाहिए। इससे स्वाइन फ्लू के खिलाफ इम्यूनिटी बूस्ट होती है।