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Gynecology Health Problems Faced by Working Women: तेज रफ्तार जिंदगी में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए महिलाएं भी वर्किंग बन रही हैं। ऐसे में दिनभर 9 से 6 की नौकरी, उसके बाद घर के सारे काम, खाने में पोषण की कमी और परिवार के मेंटल प्रेशर का महिला की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। नई दिल्ली के पीएसआरआई हॉस्पिटल की कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. अमोदिता आहूजा का कहना है कि भारत में एक तिहाई महिलाएं करियर और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को नजरअंदाज करती हैं। ऐसे में कई बार छोटी सी बीमारी कब बड़ी हो जाती है, उन्हें इसका पता ही नहीं चलता है।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की मानें, तो वर्किंग महिलाओं को अपना ज्यादातर समय बैठकर बिताना पड़ता है। तकई बार नाइट शिफ्ट में काम करने, नींद की कमी और मानसिक तनाव की समस्या भी देखी जाती है। इन सबके कारण हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है। जिसकी वजह से महिलाओं को पीरियड्स देर से आना, पीरिड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग, पीरियड्स के दौरान अत्यधिक दर्द की समस्या देखी जाती है।
गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. अमोदिता आहूजा के अनुसार, वर्किंग महिलाओं को बीमारियां ना हो, इसके लिए उन्हें अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जरूरत होती है। आइए आगे जानते हैं इसके बारे में-
सबसे अहम बात ये है कि वर्किंग महिलाओं को गाइनेकोलॉजिस्ट और अन्य बीमारियों से बचने के लिए नियमित तौर पर डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द, वजाइना में खुजली, सेक्स के दौरान दर्द और सेक्स ड्राइव में होने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इन छोटी-छोटी बीमारियों का पता समय पर चलने से इलाज जल्दी शुरू हो सकता है। इससे भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों से बचने में मदद मिलती है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।