जॉब करो, घर संभालो, हेल्थ भूल जाओ? वर्किंग महिलाओं को क्यों ज्यादा हो रही हैं PCOS, PCOD और गायनी से जुड़ी समस्याएं

डॉ. अमोदिता आहूजा का कहना है कि भारत में एक तिहाई महिलाएं करियर और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को नजरअंदाज करती हैं। जिसकी वजह से उन्हें बीमारियां हो रही हैं।

जॉब करो, घर संभालो, हेल्थ भूल जाओ? वर्किंग महिलाओं को क्यों ज्यादा हो रही हैं PCOS, PCOD और गायनी से जुड़ी समस्याएं
VerifiedVERIFIED By: Dr. Amodita Ahuja

Written by Ashu Kumar Das |Published : December 29, 2025 4:31 PM IST

Gynecology Health Problems Faced by Working Women: तेज रफ्तार जिंदगी में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए महिलाएं भी वर्किंग बन रही हैं। ऐसे में दिनभर 9 से 6 की नौकरी, उसके बाद घर के सारे काम, खाने में पोषण की कमी और परिवार के मेंटल प्रेशर का महिला की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। नई दिल्ली के पीएसआरआई हॉस्पिटल की कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. अमोदिता आहूजा का कहना है कि भारत में एक तिहाई महिलाएं करियर और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को नजरअंदाज करती हैं। ऐसे में कई बार छोटी सी बीमारी कब बड़ी हो जाती है, उन्हें इसका पता ही नहीं चलता है।

वर्किंग महिला में क्यों बढ़ रही है बीमारियां

स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की मानें, तो वर्किंग महिलाओं को अपना ज्यादातर समय बैठकर बिताना पड़ता है। तकई बार नाइट शिफ्ट में काम करने, नींद की कमी और मानसिक तनाव की समस्या भी देखी जाती है। इन सबके कारण हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है। जिसकी वजह से महिलाओं को पीरियड्स देर से आना, पीरिड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग, पीरियड्स के दौरान अत्यधिक दर्द की समस्या देखी जाती है।

वर्किंग महिलाओं में कौन सी बीमारियां बढ़ रही हैं?- Which diseases are becoming more common among working women?

  1. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS)- वर्किंग महिलाओं में पीसीओएस तेजी से बढ़ रहा है। खानपान में पोषण की कमी, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और बढ़ता वजन पीसीओएस की मुख्य वजह बनते हैं।
  2. यूटीआई- ऑफिस का टॉयलेट इस्तेमाल करने की वजह से वर्किंग महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी यूटीआई की शिकायत भी देखी जाती है। यूटीआई के कारण पेशाब के दौरान जलन, बार-बार पेशाब आना और पेट के निचले हिस्से में दर्द होता है।
  3. वजाइनल इंफेक्शन- लंबे समय तक ऑफिस में बैठकर काम करने की वजह से अक्सर महिलाएं पर्सनल हाइजीन का ध्यान नहीं रख पाती हैं। इससे वजाइनल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इससे वजाइनल एरिया में बार-बार खुजली, जलन, बदबूदार डिस्चार्ज या दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
  4. सेक्स ड्राइव में कमी- वर्क प्लेस पर बढ़ता तनाव अक्सर महिलाओं के यौन, प्रजनन स्वास्थ्य पर देखा जाता है। इस स्थिति में महिलाओं की सेक्स ड्राइव में कमी आ जाती है। वर्किंग महिलाओं की सेक्स ड्राइव में कमी का असर उनके रिश्ते और मानसिक स्वास्थ्य पर देखा जाता है।
  5. एंडोमेट्रियोसिस- एक जगह पर बैठकर काम करने की वजह से महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस के मामले भी बढ़े हैं। इसमें गर्भाशय lining (endometrium) बाहर की ओर बढ़ने लगता है। एंडोमेट्रियोसिस के कारण पीरियड्स के दौरान तेज दर्द, सेक्स के बाद तेज दर्द होना, पेट और कमर में दर्द की समस्या होती है।

वर्किंग महिलाएं बीमारियों से कैसे बचें- How can working women protect themselves from illnesses?

गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. अमोदिता आहूजा के अनुसार, वर्किंग महिलाओं को बीमारियां ना हो, इसके लिए उन्हें अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जरूरत होती है। आइए आगे जानते हैं इसके बारे में-

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  • खाने में संतुलित और पौष्टिक आहार लें
  • रोजाना 30 से 40 मिनट वॉक या योग करें
  • रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद जरूर लें
  • घर और ऑफिस में तनाव कम करने की कोशिश करें
  • प्रतिदिन 2 से 3 लीटर पानी जरूर पिएं
  • UTI से बचाव के लिए टायलेट हाइजीन का ध्यान रखें

सबसे अहम बात ये है कि वर्किंग महिलाओं को गाइनेकोलॉजिस्ट और अन्य बीमारियों से बचने के लिए नियमित तौर पर डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द, वजाइना में खुजली, सेक्स के दौरान दर्द और सेक्स ड्राइव में होने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इन छोटी-छोटी बीमारियों का पता समय पर चलने से इलाज जल्दी शुरू हो सकता है। इससे भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों से बचने में मदद मिलती है।

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Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।