Sunita Williams और अन्य महिला एस्ट्रोनॉट्स स्पेस में पीरियड्स आने पर क्या करती हैं?

Space mein periods aate hain ya nahi? अंतरिक्ष में रहते हुए महिला एस्ट्रोनॉट्स की हेल्थ में किस तरह के बदलाव आते हैं। ऐसे में यह सवाल भी आता है कि स्पेस में पीरियड्स आते हैं या नहीं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Published : April 4, 2025 7:57 AM IST

कुछ दिनों पहले ही सुनिता विलियम्स (Sunita Williams) अपनी 9 महीने के अंतरिक्ष यात्रा पूरी करके धरती पर वापस लौटी हैं। हालांकि, घर लौटने के बाद सुनिता विलियम्स और उनके साथियों को स्वास्थ्य से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है और वे धीरे-धीरे अपनी सामान्य ज़िंदगी की तरफ लौटने की कोशिश कर रहे हैं। बता दें कि सुनिता विलियम्स और उनकी पूरी टीम पूरे 9 महीने तक अंतरिक्ष में रही जहां जीवन धरती पर जिंदगी बिताने के तरीके से बहुत अलग होता है। ऐसे में लोगों के मन में ये जानने की उत्सुकता भी बढ़ गयी कि इन सभी ने इन 9 महीनों में कैसा खाना खाए, किस तरह एक्सरसाइज की और अ पनी सेहत का ख्याल कैसे रखा। ऐसा ही एक सवाल बहुत से लोगों ने पूछा कि, सुनिता विलियम्स जैसी महिला एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस में पीरियड्स आते हैं या नहीं और हर महीने पीरियड्स आने पर वे अपना ख्याल कैसे रखती हैं।

गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. श्वेता लालगुड़ी (By Dr Sweta Lalgudi, Gynecologist, Zynova Shalby Hospital Mumbai) बता रही हैं कि स्पेस में रहते हुए महिला एस्ट्रोनॉट्स पीरियड्स आने पर क्या करती हैं और कैसे मैनेज कर पाती हैं (managing menses during a space mission) इस मुश्किल स्थिति को।

स्पेस में पीरियड्स के दौरान महिला एस्ट्रोनॉट्स क्या करती हैं? (know how women astronauts manage their periods during the space mission)

डॉ. श्वेता कहती हैं कि, लोगों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि फीमेल एस्ट्रोनॉट्स जब किसी स्पेस प्रोग्राम के तहत अंतरिक्ष में जाती हैं तो वे पीरियड्स के दौरान क्या करती (manage their periods during the space mission) हैं।  तो बता दें कि स्पेस में रहते हुए पीरियड्स को मैनेज करने के लिए एक अच्छी-खासी प्लानिंग की जाती है। इस दौरान पूरी कोशिश की जाती है कि महिला एस्ट्रोनॉट्स को किसी तरह की परेशानी ना हो और वे स्वस्थ भी रह सकें।

स्पेस में बर्थ कंट्रोल पिल्स (birth control methods) जैसे तरीके भी अपनाए जाते हैं। इस तरह की गोलियों के सेवन से महिलाओं के पीरियड्स कुछ समय के लिए टालने में सहायता होती है। इनमें से अधिकांश फीमेल एस्ट्रोनॉट्स पीरियड्स की डेट आगे बढ़ाने वाली दवाओं (extended-cycle pills), आईयूडी ( intrauterine devices or IUDs) या  हार्मोनल इम्प्लांट्स (hormonal implants) की मदद लेती हैं। इस तरह एक्सपर्ट्स की गाइडेंस में अपने पीरियड्स की तारीखों को आगे सरकाने ( put their periods on hold) की कोशिश करती हैं। यह तरीका काफी सेफ है और स्पेस की तरह जमीन पर रहने वाली महिलाएं भी इन्हें अपनाती हैं।

पीरियड्स आने पर हाइजिन का ख्याल कैसे रखा जाता है?

लेकिन अगर महिला एस्ट्रोनॉट्स पीरियड्स को रोकना नहीं चाहती (if an astronaut chooses to menstruate) तो ऐसी स्थिति में नासा ( NASA) उन्हें हाइजिन प्रॉडक्ट्स (hygiene products) उपलब्ध कराती है, जो स्पेस में आसानी से इस्तेमाल किए जा सकें। इनमें टैम्पोन्स (tampons) और सैनिटरी पैड्स भी होते हैं जो काफी हल्के और साथ रखने के लिहाज से काफी सुविधाजनक होते हैं। अधिकांश एस्ट्रोनॉट्स इसी तरीके को चुनती हैं। इसी तरह कुछ महिलाएं मेंस्ट्रुअल कप (menstrual cups) का भी इस्तेमाल करती हैं, जो स्पेस प्रोग्राम के दौरान एक सुविधाजनक पर्याय माने जाते हैं।

डॉ. श्वेता बताती हैं कि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि स्पेस में शरीर उसी तरह काम करता है जैसे धरती पर करता है। स्पेस में फीमेल एस्ट्रोनॉट्स को किसी तरह की समस्या नहीं होती। स्पेस प्रोग्राम के दौरान डिहाइड्रेशन से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी और पौष्टिक भोजन (Hydration and proper nutrition) की जरूरत पड़ती है। इससे उन्हें पीरियड्स के दौरान तकलीफ और दर्द  से बचने में बहुत मदद होती है। हालांकि, महिला एस्ट्रोनॉट्स का निर्णय ही अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण होता है लेकिन, इन महिलाओं को लगातार एक मेडिकल टीम के सम्पर्क में रहना पड़ता है। अपने मिशन पर जाने से पहले और स्पेस के दौरान उनके साथ क्या हो सकता है इसकी पूरी तैयारी करवायी जाती है। स्पेस प्रोग्राम के दौरान पीरियड्स को रोकना एक बहुत ही कॉमन-सी बात है लेकिन, इसके लिए एक्सपर्ट्स और डॉक्टर्स के सभी निर्देशों का पालन अनिवार्य होता है।

Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशन उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।

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