
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Updated : June 16, 2026 1:42 AM IST
Medically Verified By: Dr Vaibhav Mathur
Grip Strenght
Grip Strength : जब फिटनेस की बात की जाती है, तो अधिकतर लोगों का ध्यान वजन, बॉडी मास इंडेक्स या शारीरिक गतिविधियों पर जाता है। लेकिन अब ग्रिप स्ट्रेंथ यानी हाथों की पकड़ की ताकत को भी स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। न्यूरोलॉजी और उम्र बढ़ने से जुड़ी स्वास्थ्य जांच में ग्रिप स्ट्रेंथ का इस्तेमाल तेजी से बढ़ता है।
जयपुर स्थित नारायणा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजिस्ट मूवमेंट डिसऑर्डर एंड डीबीएस स्पेशलिस्ट डॉ. वैभव माथुर का कहना है कि हाथों की मजबूत पकड़ सिर्फ वस्तुओं को मजबूती से थामने की क्षमता नहीं दिखाती, बल्कि यह शरीर की मांसपेशियों, नसों और समग्र शारीरिक कार्यक्षमता के बारे में भी जानकारी देती है।
ग्रिप स्ट्रेंथ को हाथ से किसी वस्तु को दबाने या पकड़ने के दौरान लगाई गई ताकत से मापा जाता है। हालांकि, यह क्रिया हाथों से की जाती है, लेकिन इसका संबंध पूरे शरीर के स्वास्थ्य से होता है।
Strenght Grip
जब मांसपेशियां, नसें और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम सही ढंग से काम करते हैं, तब ग्रिप स्ट्रेंथ बेहतर बनी रहती है। वहीं इन प्रणालियों में कमजोरी आने पर हाथों की पकड़ भी कमजोर पड़ने लगती है। इसी वजह से ग्रिप स्ट्रेंथ को शरीर की कार्यक्षमता का एक सरल लेकिन प्रभावी संकेत माना जाता है।
बढ़ती उम्र के साथ शरीर की मांसपेशियों में प्राकृतिक रूप से कमी आती है। इस प्रक्रिया के कारण ताकत और सहनशक्ति धीरे-धीरे कम होने लगती है। कई बार ग्रिप स्ट्रेंथ में गिरावट अन्य शारीरिक समस्याओं के सामने आने से पहले ही दिखाई देती है। जार खोलना, सामान उठाना या लंबे समय तक किसी वस्तु को पकड़कर रखना कठिन लगने लगता है।
Old Age Grip Weak
इसी कारण ग्रिप स्ट्रेंथ को स्वस्थ उम्र बढ़ने का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। इसकी नियमित निगरानी से भविष्य में होने वाली शारीरिक कमजोरी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
न्यूरोलॉजी के नजरिए से देखा जाए तो ग्रिप स्ट्रेंथ सिर्फ मांसपेशियों पर निर्भर नहीं करती। इसके लिए मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और नसों के बीच सही तालमेल होना जरूरी होता है।
brain and Veins
जब मस्तिष्क हाथों की मांसपेशियों को संकेत भेजता है, तब नसें उन संकेतों को आगे पहुंचाती हैं। अगर इस प्रक्रिया में किसी तरह की रुकावट आती है, तो हाथों की ताकत प्रभावित हो सकती है। कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याओं, नसों की क्षति या तंत्रिका संबंधी विकारों में ग्रिप स्ट्रेंथ कम होती हुई देखी जाती है। इसलिए हाथों की पकड़ में अचानक आई कमजोरी को नजरअंदाज नहीं किया जाता।
कमजोर पकड़ हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं होती, लेकिन यह कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हो सकती है। मांसपेशियों की कमी, पोषण की कमी और लंबे समय तक रहने वाली सूजन जैसी स्थितियों में ग्रिप स्ट्रेंथ घटती हुई देखी जाती है। इसके अलावा गिरने का जोखिम बढ़ना, संतुलन में कमी आना और बीमारी से रिकवरी में अधिक समय लगना भी कमजोर ग्रिप स्ट्रेंथ से जुड़ा होता है।
Muscles Weak
ग्रिप स्ट्रेंथ को बेहतर बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रेजिस्टेंस ट्रेनिंग, हल्के वजन उठाना और हाथों की एक्सरसाइज मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करती हैं।
इसके साथ ही प्रोटीन, विटामिन और खनिजों से भरपूर संतुलित आहार लिया जाता है। नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और पुरानी बीमारियों का सही प्रबंधन भी हाथों की ताकत को बनाए रखने में योगदान देता है।
Disclaimer : ग्रिप स्ट्रेंथ एक साधारण जांच की तरह दिखाई देती है, लेकिन यह शरीर की वास्तविक स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण संकेत देती है। मजबूत पकड़ को बेहतर मांसपेशी स्वास्थ्य, स्वस्थ नसों और अच्छी शारीरिक कार्यक्षमता से जोड़ा जाता है। यही कारण है कि आज ग्रिप स्ट्रेंथ को सिर्फ हाथों की ताकत नहीं, बल्कि स्वस्थ उम्र बढ़ने और बेहतर समग्र स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है।