गाउट एक प्रकार का रूमेटिक रोग है, जिसमें रक्त में यूरिक एसिड का लेवल बढ़ जाता है। हालांकि, ऐसा जरूरी नहीं है कि जिन लोगों को रक्त में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ता है उन्हें गाउट हो जाता है। गाउट आमतौर पर तब होता है, जब ब्लड में यूरिक एसिड का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है और इसके कारण शरीर के जोड़ों में कठोर गांठ बनने लग जाती हैं। गाउट को इंफ्लेमेटरी आर्थराइटिस भी कहा जाता है, जिससे अचानक से जोड़ों में तीव्र दर्द और सूजन होने लगती है। गाउट की कई अलग-अलग स्टेज हैं, जिनकी गंभीरता के अनुसार इसके लक्षण विकसित होते हैं। गाउट आमतौर पर इंफ्लेमेटरी आर्थराइटिस का एक सामान्य प्रकार है, जो विशेष रूप से पुरुषों में देखा जाता है। इसके लक्षण क्रोनिक हो सकते हैं, जो लंबे समय तक रहते हैं या फिर बीच-बीच में लंबे समय के लिए गायब भी रह सकते हैं।
गाउट को आमतौर पर चार चरणों में विभाजित किया गया है, जिनमें निम्न शामिल हैं -
एसिंप्टोमेटिक स्टेज - गाउट की इस स्टेज में मरीज के जोड़ों में कठोर क्रिस्टल जमा होने लग जाते हैं, हालांकि, अभी तक किसी प्रकार के लक्षण शुरू नहीं हुए होते हैं। यह संकेत देता है कि हाइपरयूरिसीमिया क्षति पहुंचा रहा है।
एक्यूट स्टेज - यह गाउट का दूसरा चरण है, जिसमें मरीज को दर्द होने लगता है। गाउट की एक्यूट स्टेज में गंभीर दर्द के साथ-साथ प्रभावित हिस्से में गंभीर सूजन और लालिमा भी हो जाती है। साथ ही प्रभावित हिस्से की त्वचा गर्म हो जाती है।
इंटरवल स्टेज - यह गाउट की वह स्टेज है, जब लक्षण शुरू हो कर गायब हो जाते हैं। साधारण भाषा में कहें तो लक्षण ठीक होने के बाद और फिर से शुरू होने से पहले के समय को इंटरवल स्टेज कहा गया है। इंटरवल स्टेज के दौरान उचित दवाओं व जीवनशैली की अच्छी आदतों की मदद से गाउट के लक्षणों को फिर से विकसित होने या फिर गंभीर होने से रोका जा सकता है।
क्रोनिक स्टेज - अगर किसी व्यक्ति के रक्त में लंबे समय से यूरिक एसिड का स्तर बढ़ा हुआ रहता है, तो यह गाउट का संकेत देता है। इसमें लक्षण बार-बार विकसित होते हैं और दर्द गंभीर हो जाता है। क्रोनिक स्टेज में लक्षण आमतौर पर कुछ दिनों से महीनों तक रह सकते हैं। कुछ दुर्लभ मामलों में क्रोनिक गाउट के कारण जोड़ भी क्षतिग्रस्त हो सकता है और काम करना बंद कर देता है।
गाउट के लक्षण
गाउट के लक्षण शुरू होते ही उसका निदान किया जा सकता है। हालांकि, कुछ लक्षण हैं, जो गाउट के शुरुआती चरणों में देखे जा सकते हैं -
जोड़ों में दर्द
प्रभावित हिस्से की त्वचा में सूजन
त्वचा छिल जाना
जोड़ में कठोर पदार्थ जमा होने के कारण सूजन
बुखार
गाउट आमतौर पर ऐसी स्थिति है, जो अचानक से विकसित होती है और इस दौरान जोड़ में दर्द, जलन, अकड़न और सूजन की समस्याएं हो जाती है। गाउट अधिकतर मामलों में पैर के अंगूठे के प्रभावित करता है, हालांकि, इसके अलावा इससे टखने, एड़ी, घुटने, उंगलियां, कोहनी और कलाई भी प्रभावित हो सकती है।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
गाउट काफी दर्दनाक स्थिति बन सकती है, इसलिए अगर आपको किसी भी वजह से लगता है कि आपको गाउट है, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से बात करें। अगर आपको ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई एक भी महसूस हो रहा है, तो जल्द से जल्द इस बारे में डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।
गाउट के कारण
यूरिक एसिड प्रोटीन मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया से बनने वाला एक उप-उत्पाद है, जो पेशाब के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाता है। हालांकि, कई बार यूरिक एसिड के बनने या फिर शरीर से बाहर निकलने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की समस्या हो जाती है, जिसे हाइपरयूरिसीमिया कहा जाता है। हाइपरयूरिसीमिया के कारण यूरेट क्रिस्टल ऊतकों या जोड़ों में जमा होने लग जाते हैं। हाइपरयूरिसीमिया के प्रमुख कारणों में निम्न शामिल हैं -
अधिक मात्रा में यूरिक एसिड बनना
गुर्दे अच्छे से यूरिक एसिड को शरीर से बाहर न निकाल पाना
हालांकि, कुछ लोगों को एक साथ ये दोनों समस्याएं हो जाती हैं और ऐसे में उन्हें गाउट के गंभीर लक्षण होने लगते हैं।
गाउट के जोखिम कारक
ऐसे कई कारक हैं, जो आपको गाउट होने का खतरा बढ़ाते हैं -
पुरुष - महिलाओं की तुलना में पुरुषों को गाउट होने का खतरा अधिक रहता है। ऐसा माना जाता है कि महिलाओं में मौजूद एस्ट्रोजन हार्मोन गाउट के खतरे को कम करता है।
उम्र - 60 साल के बाद गाउट होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है। ऐसा आमतौर पर उम्र के साथ-साथ शरीर में होने वाले बदलावों के कारण होता है।
जीन - अगर आपके परिवार में पहले से ही किसी व्यक्ति को गाउट की समस्या है, तो आपको भी यह रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।
शरीर का वजन बढ़ना - अगर शरीर का वजन सामान्य से अधिक बढ़ गया है, तो उससे अधिक मात्रा में यूरिक एसिड बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है।
दवाएं - कुछ प्रकार की दवाएं भी हैं, जो गाउट के खतरे को बढ़ा सकती हैं। रूमेटाइड आर्थराइटिस व सोरायसिस के लिए ली जा रही दवाएं और डाइयुरेटिक्स आदि लेने के कारण गाउट होने के जोखिम बढ़ जाते हैं।
प्यूरीन युक्त आहार - अधिक मात्रा में ऐसे मीट या मछली आदि खाना जिनमें प्यूरीन नामक केमिकल अधिक होता है, भी आपको गाउट होने के खतरा बढ़ा सकता है।
कुछ प्रकार के रोग - डायबिटीज, हाई बीपी, हाई कोलेस्ट्रॉल और किडनी संबंधी रोग भी गाउट होने के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
शराब का सेवन - अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन करने से स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याएं होने के साथ-साथ गाउट होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
गाउट का निदान
गाउट का निदान आमतौर पर इसके लक्षणों के आधार पर किया जाता है। निदान के दौरान डॉक्टर आपके व परिवार के स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारियां लेते हैं और साथ ही आप से लक्षणों के बारे में पूछते हैं। अगर लक्षणों से डॉक्टर को संदेह हो गया है कि आप गाउट से ग्रसित हैं, तो रक्त में यूरिक एसिड के स्तर की जांच करने के लिए ब्लड टेस्ट किया जा सकता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि रक्त में यूरिक एसिड की अधिक मात्रा गाउट का ही संकेत देती है। अगर रक्त में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ी हुई है, गाउट की पुष्टि करने के लिए निम्न टेस्ट किए जा सकते हैं -
इमेजिंग स्कैन - हड्डियों व नरम ऊतकों में सूजन व लालिमा का पता लगाने के लिए एक्स रे, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई स्कैन किया जा सकता है।
माइक्रोस्कोपिक एनालिसिस - इस टेस्ट के दौरान माइक्रोस्कोप की मदद से प्रभावित हिस्से में मौजूद द्रव की जांच की जाती है। माइक्रोस्कोप की मदद से जोड़ों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल का पता लगाया जाता है।
गाउट की रोकथाम
गाउट से ग्रस्त व्यक्ति निम्न बातों का ध्यान रखकर लक्षणों के विकसित होने से बचाव कर सकता है -
ऐसी चीजें न खाएं जिनमें अधिक मात्रा में प्यूरीन होता है जैसे मीट व मछली आदि
शराब छोड़ दें और अगर छोड़ नहीं पा रहे हैं तो उसके सेवन को काफी कम कर दें।
अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थ न खाएं, क्योंकि वे आपका वजन बढ़ा सकते हैं
दवाएं समय पर लेते रहें और डॉक्टर के सभी निर्देशों का पालन करें
अपने आहार में चेरी फल को शामिल करें, जो गाउट अटैक के खतरे को कम करती है
रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिए ताकि गुर्दे सामान्य रूप से काम करते रहें
संतुलित आहार लें और नियमित रूप से एक्सरसाइज करें, ताकि मोटापे का खतरा कम हो जाए
गाउट का इलाज
गाउट के इलाज में मुख्य रूप से दवाओं को ही शामिल किया जाता है। अगर गाउट के लक्षण लंबे समय से हो रहे हैं, तो इससे जोड़ों में कठोर पदार्थ जमा होने लग जाता है और ऐसी स्थितियों में सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। गाउट के इलाज में निम्न दवाएं शामिल हैं -
लक्षणों को कम करने वाली दवाएं
एनएसएआईडी - नॉन-स्टेरॉयडल एंटी इंफ्लेमेटरी ड्रग्स का इस्तेमाल गाउट के अचानक से विकसित होने वाले लक्षणों को रोकने के लिए किया जाता है। एनएसआईडी दवाओं से दर्द व सूजन को कम किया जा सकता है। इनमें इबुप्रोफेन, नेप्रोक्सेन, सोडियम और सेलेकोक्सिब दवाएं आदि शामिल हैं।
स्टेरॉयड - अगर आप किसी स्वास्थ्य समस्या के कारण एनएसएआईडी या अन्य कोई पेन किलर नहीं ले पा रहे हैं। दर्द व सूजन को कम करने के लिए स्टेरॉयड दवाएं दी जा सकती हैं। ये दवाएं आमतौर पर टेबलेट व इंजेक्शन के रूप में मिलती हैं।
यूरिक एसिड को कम करने वाली दवाएं
जिन लोगों के शरीर में अधिक मात्रा में यूरिक एसिड बन रहा है, उन्हें एलोप्यूरिनॉल और फैबक्सोस्टेट दवाएं दी जाती हैं, जो यूरिक एसिड के स्तर को कम करने में मदद करती हैं।
जिन लोगों के शरीर से यूरिक एसिड नहीं निकल पा रहा है उन्हें प्रोबेनिसिड और पेग्लोटिकेस आदि दवाएं दी जा सकती हैं, जो यूरिक एसिड के पेशाब के माध्यम से शरीर से बाहर निकालने में मदद करती हैं।
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