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जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल फीज़ियोलॉजी में प्रकाशित यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर के अध्ययन में बताया गया है कि, किस प्रकार नींद एक व्यक्ति के ह्रदय के स्वास्थ्य और उसके पूरे शरीर (फीजियोलॉजी) को प्रभावित करती है। इस अध्ययन में यह बताया गया है कि जो लोग रात में 7 घंटों की नींद नहीं लेते, उन्हें अक्सर 3 मनोवैज्ञानिक स्थितियों या माइक्रो आरएनए के कारण खून के निम्न स्तर की समस्या होती है, जो रक्त वाहिकाओं संबंधी स्वास्थ्य बनाए रखने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। एक अन्य अध्ययन में यह पाया गया कि जो वयस्क केवल 6 घंटों की नींद लेते हैं उनकी एंडोथेलियल कोशिकाएं निष्क्रीय हो जाती हैं। यह कोशिकाएं रक्त वाहिकाओं में पाई जाती हैं। इस निष्क्रियता के कारण जिन्हें पर्याप्त नींद नहीं मिलती उन लोगों में धमनियों का फैलाव और संकुचन सीमित हो जाता है।
डॉ. संतोष कुमार डोरा, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट, एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट के मुताबिक, अत्यधिक समय तक नींद से वंचित रहने के कारण मानसिक स्वास्थ्य में परिवर्तन देखने को मिल सकता है। जैसे, व्यवहारिक सतर्कता में कमी,चौकन्ना न रहना, इंटेलीजेंस में कमी, छोटे-छोटे कार्यों में गड़बड़ी करना, किसी भी काम में खराब प्रदर्शन, खराब मनोदशा, चिडचिड़ापन, ऊर्जा में कमी, कामवासना में कमी और किसी भी प्रकार के निर्णय न ले पाना आदि। वहीं लंबे समय तक नींद की कमी दुर्घटनाएं, वर्कप्लेस पर गलतियां, बार-बार जम्हाई लेना और अनियोजित झपकियां जैसी समस्याएं आती हैं, जिसके कारण घर और कार्यस्थल दोनों जगहों पर होते हैं। यह अच्छी तरह सिद्ध हो चुका है कि नींद की कमी के कारण कार्डियोवास्कुलर डिजीज होती हैं। कार्डियोमेटाबोलिक सिंड्रोम के विकास में इसकी निश्चित ही एक भूमिका होती है, जिसके कारण मोटापा, हाई बीपी, डायबिटीज़ और व्यक्ति के लिपिड (वसा) प्रोफाइल में खराबी जैसी समस्याएं आती हैं।
इसलिए, स्वस्थ ह्रदय के लिए हर व्यक्ति को अच्छी नींद की आदतें रखनी चाहिए और कभी भी रात वाली अच्छी नींद के महत्व को कम नहीं आंकना चाहिए। आमतौर पर नींद की अवधि 7 से 9 घंटों से कम नहीं होती। नींद की गहराई भी इसकी अवधि जितनी ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही वो समय होता है जब शरीर आराम की प्रक्रिया से होकर गुज़रता है।
(इनपुट्स: डॉ. संतोष कुमार डोरा, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट, एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट, बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स, मुंबई)