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डायबिटीज रोगी हार्ट फेल्योर को रोकने के लिए दिन में करें ये 1 काम, जानें कैसे आसानी से बचेगी आपकी जान
हार्ट फेल्योर एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही है फिर चाहे वो विकसित देश हों या विकासशील देश। आलम ये है कि दुनियाभर में इसके मामले और इससे मरने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि दोनों ही बढ़े हैं। इस बीमारी में दिल शरीर के दूसरे अंगों तक रक्त की सप्लाई ठीक तरीके से नहीं कर पाता है, जिसके कारण आपको अपने सामान्य काम करने में भी परेशानी हो सकती है।
हार्ट फेल्योर जैसी स्थिति को नकारा नहीं जा सकता है और ये दुनिया भर में बीमारियों से होने वाली मौतों में प्रमुख कारण है। अगर इस स्थिति को बिना उपचार के छोड़ दिया जाए तो हार्ट फेल्योर से मरने का जोखिम 30 फीसदी तक बढ़ जाता है। हार्ट फेल्योर के कुछ प्रमुख जोखिम कारकों में मोटापा, हाइपरटेंशन और डायबिटीज है। बता दें कि करीब 40 से 55 फीसदी हार्ट फेल्योर के मरीज अस्पताल में भर्ती होते हैं क्योंकि उन्हें ये एक से ज्यादा बीमारियां होती हैं।
जिन पुरुषों को डायबिटीज होती है उनमें हार्ट फेल्योर का खतरा डायबिटीज न होने वाले लोगों की तुलना में दोगुना होता है। वहीं महिलाओं में ये खतरा 5 गुना तक ज्यादा होता है। भारत में तेजी से बढ़ रहे डायबिटीज के मामलों के कारण ही दुनियाभर में हमारे देश को डायबिटीज की राजधानी के तौर पर जाना जाने लगा है।
हार्ट फेल्योर एक घातक स्थिति है, जो जानलेवा साबित हो सकती है, लेकिन उपचार विकल्प मौजूद होना और सही प्रबंधन की मदद से रोगी को बचाया जा सकता है। बहुत से लोग ऐसे हैं, जिनमें इस रोग की पहचान हुई और इलाज के बाद काफी लंबे अरसे से ठीक-ठाक जीवन बिता रहे हैं। हालांकि अभी भी लोगों में जागरूकता की कमी है।
डायबिटीज, हृदय गति रुकने के जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में से एक है। वहीं मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी दूसरी बीमारियों के साथ उपस्थित हो सकता है। डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है, जो किसी न किसी रूप में रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकती है।
1-सीने में बेचैनी
2-मतली
3-अपच
4-पेट में दर्द
5-हाथ तक फैलने वाला दर्द
6-चक्कर आना
7-हल्कापन महसूस होना
8- गले या जबड़े में दर्द
9-थकान
10- खर्राटे लेना
11- पसीना आना
12-बंद न होने वाली खांसी
13-पैरों और टखनों में सूजन