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क्या है किडनी की गंभीर बीमारी ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस जिसके नाम से डॉक्टर भी कांपते हैं, ऐसे दिखते हैं इसके शुरुआती लक्षण

World Kidney Day : ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस किडनी से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है। यह किडनी फेलियर का कारण भी बन सकता है। इसलिए इसके शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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Written By: Anju Rawat | Updated : March 11, 2025 12:26 PM IST

Glomerulonephritis in Hindi: ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस क्या है? यह किडनी की एक बीमारी है। इसमें ग्लोमेरुली को नुकसान पहुंचता है। आपको बता दें कि ग्लोमेरुली, किडनी के अंदर छोटे फिल्टर होते हैं। इनकी संख्या लगभग 10 लाख होती है। ग्लोमेरुली, रक्त से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर निकालते हैं। अगर ग्लोमेरुली स्वस्थ रहते हैं, तो अपना काम बिल्कुल सही तरीके से करते हैं। लेकिन, जब इन्हें नुकसान पहुंचता है, तो ये अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में असमर्थ हो जाते हैं। ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस की वजह से किडनी के फिल्टर को नुकसान पहुंचता है। यही वजह है कि इस बीमारी का समय पर इलाज करवाना जरूरी है। वैसे तो ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस का इलाज संभव है, लेकिन कुछ मामलों में इस रोग की वजह से किडनी फेल हो सकती है। यूरिन टेस्ट, ब्लड टेस्ट, किडनी बायोप्सी आदि के जरिए इस रोग का पता लगाया जाता है।

आपको बता दें कि किडनी हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंग हैं। रक्त को साफ करना और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना किडनी के मुख्य कार्य होते हैं। लेकिन, जब किडनी सही तरीके से काम नहीं कर पाती हैं, तो कई तरह की बीमारियां होनी शुरू हो जाती हैं। इसलिए किडनी जैसे अहम अंग को स्वस्थ रखना कितना जरूरी है, इसके बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 13 मार्च को विश्व किडनी दिवस (World Kidney Day) मनाया जाता है। इस साल किडनी दिवस की थीम “क्या आपकी किडनी ठीक है? समय रहते पता लगाएं, किडनी की सेहत की रक्षा करें” है। विश्व किडनी दिवस के मौके पर हम आपको किडनी की एक गंभीर बीमारी ‘ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस’ के शुरुआती लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए, जानते हैं फॉर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम के डायरेक्टर और नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. सलिल जैन से-

ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस के लक्षण- Glomerulonephritis Symptoms in Hindi

1. पेशाब में खून आना

पेशाब में खून आना ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस रोग का संकेत हो सकता है। दरअसल, इस रोग की वजह से किडनी के अंदर छोटे फिल्टर (ग्लोमेरुली) में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से किडनी रक्त को ठीक तरह से फिल्टर नहीं कर पाते हैं, जिससे रक्त कोशिकाएं पेशाब के माध्यम से बाहर निकलने लगती हैं। इसकी वजह से लगता है कि पेशाब में खून आ रहा है। इस रोग में पेशाब का रंग भूरा, गुलाबी या लाल हो सकता है।

2. पेशाब में झाग आना

ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस रोग की वजह से पेशाब में झाग आने लगता है। पेशाब में झाग आना इस बीमारी का शुरुआती लक्षण हो सकता है। इसकी वजह से पेशाब झागदार और बुलबुलेदार दिखाई दे सकता है। इसलिए अगर आपके पेशाब में झाग नजर आए, तो इस संकेत को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। इस बीमारी में किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो जाती है। इसकी वजह से पेशाब में प्रोटीन रिसाव होने लगता है, जिससे पेशाब में झाग दिखाई देता है। पेशाब में झाग, प्रोटीन ही होता है।

3. पैरों और चेहरे पर सूजन

अगर आपके पैरों और चेहरे पर लंबे समय से सूजन है, तो इस संकेत को बिल्कुल अनदेखा न करें। इस रोग की वजह से किडनी ठीक से काम नहीं कर पाते हैं, जिससे शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो जाते हैं। इसकी वजह से चेहरे और पैरों में सूजनदिखाई दे सकता है। अगर पैरों और चेहरे पर सूजन है, तो एक बार किडनी की जांच जरूर करवाएं।

4. त्वचा का रंग पीला पड़ना

ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस रोग की वजह से त्वचा भी पीली पड़ने लगती है। दरअसल, इस बीमारी की वजह से किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित हो जाती है। इससे शरीर में तरल पदार्थ और विषाक्त पदार्थ जमा हो जाते हैं। इसकी वजह से लिवर को रक्त को फिल्टर करने में काफी कठिनाई होती है। इससे त्वचा पीली नजर आ सकती है।

5. वजन कम होना

वजन कम होना भी ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस का संकेत हो सकता है। इस बीमारी में प्रोटीन और तरल पदार्थ का नुकसान हो जाता है। इससे वजन कम हो सकता है। इसके साथ ही, ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस रोग में भूख की कम हो जाती है और बार-बार उल्टी होती है, जो वेट लॉस का कारण बन सकते हैं।

Disclaimer: हमारे लेखों में साझा की गई जानकारी केवल इंफॉर्मेशनल उद्देश्यों से शेयर की जा रही है इन्हें डॉक्टर की सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी बीमारी या विशिष्ट हेल्थ कंडीशन के लिए स्पेशलिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य होना चाहिए। डॉक्टर/एक्सपर्ट की सलाह के आधार पर ही इलाज की प्रक्रिया शुरु की जानी चाहिए।